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दखल ऐसी तो 3.36 लाख नौनिहाल कैसे पाएंगे समय से स्वेटर
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गोंडा। बेसिक शिक्षा के 3140 स्कूलों में पढ़ने वाले 3.36 लाख बच्चों को स्वेटर वितरण में विभाग का पसीना छूट रहा है। दो दिनों से विभाग स्वेटर वितरण के लिए संस्था के चयन की कवायद कर रहा है, सर्व शिक्षा अभियान से हटाकर शनिवार को जिलाधिकारी के कार्यालय में संस्था चयन के लिए तकनीकी बिड जांची गई। विकास भवन में संस्थाओं के प्रतिनिधियों से रोकटोक की सूचनाओं के बाद कलेक्ट्रेट में टेंडर फाइनल करने की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। माना जा रहा है कि सियासी दखल से स्वेटर सप्लायर के प्रतिनिधियों के कदम लड़खड़ा रहे हैं। फिलहाल शनिवार को चार आवेदकों ने अपने नमूने जमा किए हैं।
स्कूल प्रबंध समितियों के माध्यम से प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक अब तक स्वेटर वितरण का कार्य करते थे। अधिकारी सिर्फ ठंडा चलाने का कार्य करते थे, इस बार सरकार ने जेम पोर्टल के माध्यम से स्वेटर सप्लाई के लिए संस्था चयन करने की व्यवस्था दी है। जेम पोर्टल पर आवेदकों से नमूना मांगने के लिए शुक्रवार को सर्व शिक्षा अभियान विकास भवन में नमूना जमा करने के लिए तय किया गया था। वहां पर दूसरे मंजिल पर होने के कारण नमूना लेकर आए संस्थाओं के प्रतिनिधियों से कुछ लोगों ने रोकटोक किया। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को मिली तो देर शाम को कलेक्ट्रेट में नमूना लेने का आदेश जारी हुआ।
शनिवार को जिलाधिकारी की देखरेख में नमूना जमा किया गया, लेकिन बड़ों की दखल और भुगतान फंसने के डर से जेम पोर्टल पर अव्वल रहने वाले ने नमूना देने से किनारा कस लिया है। दिन भर में बड़े अधिकारियों की निगरानी होने के बाद चार लोगों ने नमूना जमा किया है। स्वेटर वितरण की व्यवस्था पहली बार केंद्रीय होने से लोगों की निगाहें टिक गई हैं। सात करोड़ के करीब का बजट है और इसमें सेंध लगाने की संभावना दिख रही है। वहीं शिक्षक तो इस बार खुश हैं कि स्वेटर वितरण का कार्य ले लिया गया है लेकिन अधिकारियों के माथे पर पसीना दिख रहा है।
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ठेके का कोई भी कार्य हाथ न जाने देने पर पूरी नजर
जिले में बड़ों का नाम लेकर ठेके हथियाने वालों की टीम लगातार सक्रिय है। कोई भी ठेका हाथ से न जाने पाए, इसके लिए हर स्तर से प्रयास करेंगे। इसी की भेंट स्वेटर वितरण भी चढ़ गई है। एक बच्चे के लिए 200 रुपये का बजट स्वेटर के लिए तय किया गया है। लेकिन यह कार्य भी कहीं दूसरे लोग न पा जाएं इसके लिए पूरी कोशिश दो दिनों से होती रही। इसका असर शनिवार को दिखा। जब संस्था चयन की प्रक्रिया डीएम के कार्यालय में करानी पड़ी।
नमूना एक जमा हुआ, वितरण 3.36 लाख करना है
जेम पोर्टल के माध्यम से भी सामानों की आपूर्ति में खेल का रास्ता निकाल लिया है। नमूने में एक या दो स्वेटर अच्छी गुणवत्ता का जमा कर देंगे। कार्य हथियाने के बाद कमाने का रास्ता निकल आएगा, वितरण तो 3.36 लाख बच्चों में करना है। प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में वितरण करने से भुगतान में भी कोई दिक्कत नहीं होगी। दूसरा कोई कार्य पाएगा तो जांच की कार्रवाई कराने के साथ ही बड़े स्तर तक मांग उठना तय है। ऐसी तरह चेतावनियों से सप्लायर संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रभावित किया जा रहा है।
फंस सकती है स्वेटर सप्लाई की प्रक्रिया
जेम पोर्टल से स्वेटर वितरण के लिए संस्था चयन की प्रक्रिया सवालों से घिर गई है। बताया जा रहा है कि एल-वन में दर्ज संस्था को किनारे किया जा रहा है। चयन में सर्वाधिक सिक्योरिटी देने वाली संस्था का चयन प्राथमिकता में है और आईएसओ का प्रमाण पत्र भी संस्था के पास होना चाहिए। इन बिंदुओं के साथ ही स्वेटर निर्माण कर रही संस्था है या फिर वह कहीं से स्वेटर खरीद कर देगी। इसका भी ध्यान देना है, अब संस्था चयन के बाद शिकायतों का दौर सीएम के दरबार तक पहुंचेगा। इससे अधिकारी भी संस्था चयन में पूरी सावधानी बरत रहे हैं, माना जा रहा है कि कई पेंच फंस सकते हैं।
स्वेटर वितरण समय से और गुणवत्तापूर्ण कराना प्राथमिकता में है। संस्था चयन की कार्रवाई जिलाधिकारी की अध्यक्षता में की जा रही है। हर बिंदुओं की पड़ताल के बाद ही वितरण के लिए संस्था नामित की जाएगी। -मनिराम सिंह, बीएसए गोंडा
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स्कूल प्रबंध समितियों के माध्यम से प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक अब तक स्वेटर वितरण का कार्य करते थे। अधिकारी सिर्फ ठंडा चलाने का कार्य करते थे, इस बार सरकार ने जेम पोर्टल के माध्यम से स्वेटर सप्लाई के लिए संस्था चयन करने की व्यवस्था दी है। जेम पोर्टल पर आवेदकों से नमूना मांगने के लिए शुक्रवार को सर्व शिक्षा अभियान विकास भवन में नमूना जमा करने के लिए तय किया गया था। वहां पर दूसरे मंजिल पर होने के कारण नमूना लेकर आए संस्थाओं के प्रतिनिधियों से कुछ लोगों ने रोकटोक किया। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को मिली तो देर शाम को कलेक्ट्रेट में नमूना लेने का आदेश जारी हुआ।
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शनिवार को जिलाधिकारी की देखरेख में नमूना जमा किया गया, लेकिन बड़ों की दखल और भुगतान फंसने के डर से जेम पोर्टल पर अव्वल रहने वाले ने नमूना देने से किनारा कस लिया है। दिन भर में बड़े अधिकारियों की निगरानी होने के बाद चार लोगों ने नमूना जमा किया है। स्वेटर वितरण की व्यवस्था पहली बार केंद्रीय होने से लोगों की निगाहें टिक गई हैं। सात करोड़ के करीब का बजट है और इसमें सेंध लगाने की संभावना दिख रही है। वहीं शिक्षक तो इस बार खुश हैं कि स्वेटर वितरण का कार्य ले लिया गया है लेकिन अधिकारियों के माथे पर पसीना दिख रहा है।
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ठेके का कोई भी कार्य हाथ न जाने देने पर पूरी नजर
जिले में बड़ों का नाम लेकर ठेके हथियाने वालों की टीम लगातार सक्रिय है। कोई भी ठेका हाथ से न जाने पाए, इसके लिए हर स्तर से प्रयास करेंगे। इसी की भेंट स्वेटर वितरण भी चढ़ गई है। एक बच्चे के लिए 200 रुपये का बजट स्वेटर के लिए तय किया गया है। लेकिन यह कार्य भी कहीं दूसरे लोग न पा जाएं इसके लिए पूरी कोशिश दो दिनों से होती रही। इसका असर शनिवार को दिखा। जब संस्था चयन की प्रक्रिया डीएम के कार्यालय में करानी पड़ी।
नमूना एक जमा हुआ, वितरण 3.36 लाख करना है
जेम पोर्टल के माध्यम से भी सामानों की आपूर्ति में खेल का रास्ता निकाल लिया है। नमूने में एक या दो स्वेटर अच्छी गुणवत्ता का जमा कर देंगे। कार्य हथियाने के बाद कमाने का रास्ता निकल आएगा, वितरण तो 3.36 लाख बच्चों में करना है। प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में वितरण करने से भुगतान में भी कोई दिक्कत नहीं होगी। दूसरा कोई कार्य पाएगा तो जांच की कार्रवाई कराने के साथ ही बड़े स्तर तक मांग उठना तय है। ऐसी तरह चेतावनियों से सप्लायर संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रभावित किया जा रहा है।
फंस सकती है स्वेटर सप्लाई की प्रक्रिया
जेम पोर्टल से स्वेटर वितरण के लिए संस्था चयन की प्रक्रिया सवालों से घिर गई है। बताया जा रहा है कि एल-वन में दर्ज संस्था को किनारे किया जा रहा है। चयन में सर्वाधिक सिक्योरिटी देने वाली संस्था का चयन प्राथमिकता में है और आईएसओ का प्रमाण पत्र भी संस्था के पास होना चाहिए। इन बिंदुओं के साथ ही स्वेटर निर्माण कर रही संस्था है या फिर वह कहीं से स्वेटर खरीद कर देगी। इसका भी ध्यान देना है, अब संस्था चयन के बाद शिकायतों का दौर सीएम के दरबार तक पहुंचेगा। इससे अधिकारी भी संस्था चयन में पूरी सावधानी बरत रहे हैं, माना जा रहा है कि कई पेंच फंस सकते हैं।
स्वेटर वितरण समय से और गुणवत्तापूर्ण कराना प्राथमिकता में है। संस्था चयन की कार्रवाई जिलाधिकारी की अध्यक्षता में की जा रही है। हर बिंदुओं की पड़ताल के बाद ही वितरण के लिए संस्था नामित की जाएगी। -मनिराम सिंह, बीएसए गोंडा