फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Hope for the light of prosperity from earthen pots and lamps

Gonda News: मिट्टी के करवा और दीये से समृद्धि के उजाले की आस

Sun, 05 Oct 2025 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 05 Oct 2025 11:17 PM IST
विज्ञापन
Hope for the light of prosperity from earthen pots and lamps
महराजगंज मोहल्ले में मिट्टी गूंधते नीलू। - संवाद
गोंडा। करवाचौथ और दीपोत्सव के लिए कुम्हारों ने तैयारी तेज कर दी है। मिट्टी के कारीगर एक माह से दीपोत्सव के लिए सामान तैयार कर रहे हैं। इसमें उनका पूरा परिवार लगा है। दीपोत्सव पर लोगों के घर रोशन करने वाले इन कारीगरों को अपने घर में भी मां लक्ष्मी के आगमन की आस है।
विज्ञापन



जिलेभर के कुम्हार दीपोत्सव की तैयारी में जुटे हैं। महराजगंज मोहल्ले में बरकत अली, नीलू समेत कई अन्य कुम्हारों के परिवार मिट्टी के दीये, करवा, खिलौने समेत अन्य सामान बनाने में जुटे हैं। बरकत अली ने बताया कि दीपावली से उम्मीदें तो काफी हैं, लेकिन कुम्हारों के सामने समस्याएं भी बहुत हैं। मिट्टी अब बहुत मुश्किल से मिल पाती है। मिट्टी खदान के लिए जल्दी अनुमति भी नहीं मिल पाती। बरकत अली ने बताया कि उनके पूर्वज भी माटी कला से जुड़े थे। वह भी इसी से जीविका चला रहे हैं। परिवार की महिलाएं और बच्चे दीपक, करवा, खिलौने, गुल्लक बनाने में जुटे हैं।
विज्ञापन

बरकत अली का कहना है कि मिट्टी आसानी से मिल जाए तो समस्या दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि मिट्टी के दीये और बर्तन पकाने के लिए भट्ठी जलाने पर भी सख्ती हो रही है। भट्ठी से धुआं निकलने पर पांच हजार रुपये जुर्माने और कारावास का भय दिखाया जा रहा है। इसलिए दो किलोमीटर दूर भट्ठी लगाई है। वहीं से बर्तन पकाकर लाते हैं। इसके चलते भाड़ा तो देना पड़ता है, साथ ही बर्तन और दीये टूट भी जाते हैं। नीलू का कहना है कि मौजूदा समय मिट्टी का इंतजाम करना ही सबसे बड़ी समस्या है।
विज्ञापन
विज्ञापन





आवेदन के बाद भी नहीं मिला चाक
बरकत अली का कहना है कि सरकार माटी कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से योजनाएं चला रही है। इलेक्टि्रक चाक की व्यवस्था है। पिछले साल उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन अब तक उन्हें चाक नहीं मिल पाया। अधिकारियों के यहां दस्तक भी दी, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। इससे पुरानी पद्धति से ही वह कार्य कर रहे हैं। यदि इलेक्टि्रक चाक उपलब्ध हो जाए तो काम में आसानी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed