फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Gonda's Kachori will also get recognition along with Dahi Bada

Gonda News: दही बड़ा के साथ गोंडा की कचौड़ी को भी मिलेगी पहचान

Mon, 18 May 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 18 May 2026 11:19 PM IST
विज्ञापन
Gonda's Kachori will also get recognition along with Dahi Bada
इटियाथोक में दही बड़ा बनाता कारीगर व गोंडा की कचाैड़ी। संवाद - फोटो : संवाद
गोंडा। जिले के दही बड़ा के साथ ही अब कचौड़ी को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। एक जनपद एक उत्पाद की तर्ज पर एक जनपद एक व्यंजन के तहत दही बड़ा के बाद अब कचौड़ी का भी चयन किया गया है। जिला उद्योग विभाग संबंधित कारीगरों को निशुल्क प्रशिक्षण के साथ ही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक में जरूरी मदद करेगा।
विज्ञापन

अधिकारियों ने बताया कि इटियाथोक का दही बड़ा खाने के लिए जिलेभर के साथ ही बाहर से भी लोग आते हैं। मैदे व आटे की कचौड़ी भी लोगों को खूब भा रही है। गोंडा मुख्यालय से लेकर इटियाथोक व अन्य क्षेत्रों में कारीगर कचौड़ी बनाते हैं। मसालेदार दाल, मटर या आलू भरकर कचौड़ी को तेल में तलकर तैयार किया जाता है। पारंपरिक होने के साथ ही लोग नाश्ते में भी कचौड़ी को खूब पसंद करते हैं।
विज्ञापन

जिला उद्योग उपायुक्त बाबूराम ने बताया कि गोंडा पहले अवध क्षेत्र के प्रभाव में रहा है। जहां मसालेदार और घी आधारित व्यंजन लोकप्रिय हैं। इसी परंपरा से खस्ता कचौड़ी का विकास हुआ है। गोंडा में कचौड़ी अपने विशिष्ट स्वाद व विशेष प्रकार की उड़द दाल एवं रेसिपी के कारण बिल्कुल अलग है। पारंपरिक अवसरों व त्योहारों पर घरों में इसे प्रमुख व्यंजन के रूप में बनाया जाता है। गोंडा की कचौड़ी में हींग, धनिया और दाल की भराई का पारंपरिक उपयोग स्थानीय कृषि और मसालों की संस्कृति को भी दर्शाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



400 से अधिक कारीगर कर रहे जीवनयापन
अधिकारियों ने बताया कि जिले में 100 से अधिक छोटी व बड़ी इकाइयां क्रियाशील हैं। इनमें चार सौ से अधिक कारीगर जीवन यापन कर रहे हैं। संपूर्ण वर्ष में कचौड़ी का स्वाद लिया जा सकता है। हालांकि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखना, कम शेल्फ लाइफ, कुशल कारीगरों की कमी और प्रतिस्पर्धा अभी भी चुनौती बनी हुई है।



1988 में खोली थी छोटी सी दुकान
इटियाथोक। केशव राम शुक्ल ने 1988 में थाने के पास छोटी सी दुकान खोलकर शुरुआत की थी। केशव राम ने बताया कि अब बेटा कृपाशंकर शुक्ल दुकान संभालता है। यहां दूध से ताजा दही तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल दुकान पर होता है। उड़द की दाल को अच्छी तरह धोकर और पीसकर दही बड़े बनाए जाते हैं। इन बड़ों की खास बात यह है कि इनके अंदर ड्राई फ्रूट्स डालकर बढ़िया स्वाद बना देते हैं। मसालों के साथ इसे ग्राहकों को परोसा जाता है। शिक्षक अनिल कुमार ने बताया कि इटियाथोक का दही बड़ा उन्हें व परिजनों को बेहद पसंद है। वह अक्सर दही बड़ा का स्वाद लेने इटियाथोक पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed