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Gonda News: आजीवन कारावास काट रही युवती को मिली जमानत
Mon, 24 Nov 2025 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 24 Nov 2025 11:15 PM IST
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गोंडा। युवक की हत्या के मामले में छह साल से जेल में बंद अभियुक्त मानसी चौरसिया का जमानत प्रार्थनापत्र हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से स्वीकार करते हुए सशर्त रिहाई का आदेश दिया है।
नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी रमेश गुप्ता 25 नवंबर 2019 को लापता हो गए थे। परिजनों की तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज हुई थी। दो दिसंबर 2019 को उनका शव सिविल लाइंस स्थित अफीम कोठी के पीछे कुएं में मिला था। विवेचना में मानसी चौरसिया, उसके पिता रोहित, भाई दीपू और अंकित सिंह का नाम सामने आया। पुलिस ने सात दिसंबर 2019 को मानसी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसने नाबालिग होने का दावा किया, लेकिन कोर्ट ने इसके लिए प्रस्तुत कागजात को अस्वीकृत कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान 13 फरवरी 2023 को सत्र न्यायालय ने रोहित, दीपू और अंकित सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया। इसके बाद 11 जुलाई 2023 को अदालत ने मानसी चौरसिया को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
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निचली अदालत में मानसी की जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। उसने हाईकोर्ट में दांडिक अपील दाखिल की। मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जमानत प्रार्थनापत्र सशर्त स्वीकार कर लिया।
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नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी रमेश गुप्ता 25 नवंबर 2019 को लापता हो गए थे। परिजनों की तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज हुई थी। दो दिसंबर 2019 को उनका शव सिविल लाइंस स्थित अफीम कोठी के पीछे कुएं में मिला था। विवेचना में मानसी चौरसिया, उसके पिता रोहित, भाई दीपू और अंकित सिंह का नाम सामने आया। पुलिस ने सात दिसंबर 2019 को मानसी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसने नाबालिग होने का दावा किया, लेकिन कोर्ट ने इसके लिए प्रस्तुत कागजात को अस्वीकृत कर दिया।
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मामले की सुनवाई के दौरान 13 फरवरी 2023 को सत्र न्यायालय ने रोहित, दीपू और अंकित सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया। इसके बाद 11 जुलाई 2023 को अदालत ने मानसी चौरसिया को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
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निचली अदालत में मानसी की जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। उसने हाईकोर्ट में दांडिक अपील दाखिल की। मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जमानत प्रार्थनापत्र सशर्त स्वीकार कर लिया।