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खतरे के निशान के करीब पहुंची घाघरा
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गोंडा। मानसून से पहले ही बारिश होने से माझा वासियों की धड़कनें बढ़ा रही है। घाघरा के तेवर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। करनैलगंज में रिंग बांध बनने से तटवर्ती गांव सुरक्षित हो गए हैं।
वहीं नकहरा गांव पर आफत बनी है। यह गांव बांध के भीतर आ गया है। यहां के लोगों को दूसरे स्थानों पर बाढ़ के समय तक रोका जाएगा। इसी तरह तरबगंज तहसील में बांध होने के बाद भी ऐली व सोनौली के कई गांव बांढ के दायरे में रहेंगे।
साथ ही ऐली के बाद लोलपुर तक दो दर्जन से अधिक गांवों की सुरक्षा के लिए कोई बांध नही है। इससे वहां बाढ़ का कहर होना तय माना जा रहा है। करीब एक लाख की आबादी इस बार भी बाढ़ के चपेट में आनी तय है।
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लगातार बारिश के बाद से घाघरा नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। जिससे बांध पर बसे लोगों के साथ बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों से लोगों का रुख बांध व सुरक्षित स्थानों की तरफ हो चुका है।
अब घाघरा नदी खतरे के निशान तक पहुंचने में मात्र 5 सेंटीमीटर की कसर रह गई है। एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान 106.07 के सापेक्ष 105.986 पर पहुंच चुका है। रविवार को घाघरा का डिसचार्ज भी 2 लाख 93 हजार 550 क्यूसेक रहा।
बाढ़ का पानी अब खेतों व खलिहानों में भरकर गांव की तरफ बढ़ने लगा है। एल्गिन चरसडी बांध के साथ एक रिंग बांध बन जाने से काशीपुर, गौरासिंहपुर, गुमदहा, वैद्यपुर, प्रतापपुर, घरकुइयां सहित क्षेत्र के अन्य गांव बाढ़ की चपेट में आने से बचे रहेंगे।
ग्राम पंचायत नकहरा के ग्रामीणों की समस्या जस की तस बनी है। इस गांव के लगभग सभी मजरे बांध व नदी के बीच में हैं। बाढ़ का पानी नदी से बाहर आते ही यह जलमग्न हो जाएंगे।
जिससे इनके सामने अनेकों तरह की समस्या खड़ी हो जाएगी। यहां तक कि घर से बाहर जाने के लिये इन्हें नाव का सहारा लेना पड़ेगा। भोजन, पानी सहित पशुओं के चारे का भी संकट गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों की माने तो प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी उन्हें बाढ़ का दंश झेलना पड़ेगा। इसके अलावा उनके पास कोई अन्य रास्ता नही है। ग्रामीणों का कहना है कि रिंग बांध के निर्माण के समय यदि प्रशासन चाहता तो उन्हें बांध के बाहर जमीन मुहैया कराकर बाढ़ की समस्या से मुक्ति दिला देता, मगर ऐसा नही हुआ।
उन्हें बांध के अंदर मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आवास का भी निर्माण कराना पड़ा। जिसे नदी किसी भी समय अपने आगोश में लेकर धारा में मिला सकती है। उनका आशियाना अब नदी के रहमोकरम पर खड़ा है। इसी तरह नदी के जल स्तर ने वृद्धि होती रही अगले सप्ताह सभी मजरे बाढ़ गिरफ्त में होंगे।
एसडीएम हीरालाल ने बताया कि बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि लगातार क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। इस बार ग्रामीणों को किसी तरह की समस्या नही होगी। बांध पर मरम्मत कार्य तेज करा दिया गया है। जहां जहां घाघरा बांध के समीप आ गई है वहां निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बचाव का खाका खींचा है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थान मुहैय्या कराने के लिए अभी से व्यवस्था बनाने का निर्देश दोनो तहसीलों के एसडीएम को दे चुके हैं।
इसके अलावा बांध के आसपास के गावों पर नजर रखने की हिदायत दी है। करनैलगंज के पाल्हापुर में बाढ़ प्रभावितों के लिए व्यवस्था होगी। वहीं नवाबगंज के पटपरगंज व ऐली परसौली पर बाढ़ से आने वाली समस्याओं के निदान के लिए राहत शिविर होंगे।
जिलाधिकारी ने इसके साथ ही राजस्व, पुलिस, सिंचाई एवं बाढ़, पशुपालन, चिकित्सा विभाग को समन्वय स्थापित करके व्यवस्था बनाने की हिदायत दी है। जिससे अचानक बाढ़ की स्थिति बनने पर व्यवस्था की जा सके।
नदी के तेवर को देखते हुए बाढ़ कार्य विभाग भी सतर्क हो गया है। बीते दिनों जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने निरीक्षण कर अफसरों के पेंच कसे थे। उसके बाद बांध के बचाव के साथ ही अधूरे कार्य को पूरा करने का प्रयास हो रहा है।
बारिश से बंधों पर दरार पड़ने की निगरानी करने और उन्हें दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। एल्गिन ब्रिज से भिखारीपुर तटबंध के साथ ही सकरौर से एली बांध के मरम्मत का कार्य हो रहा है। माना जा रहा है कि बाढ़ की स्थिति तक बांध को सही कर लिया जाएगा।
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वहीं नकहरा गांव पर आफत बनी है। यह गांव बांध के भीतर आ गया है। यहां के लोगों को दूसरे स्थानों पर बाढ़ के समय तक रोका जाएगा। इसी तरह तरबगंज तहसील में बांध होने के बाद भी ऐली व सोनौली के कई गांव बांढ के दायरे में रहेंगे।
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साथ ही ऐली के बाद लोलपुर तक दो दर्जन से अधिक गांवों की सुरक्षा के लिए कोई बांध नही है। इससे वहां बाढ़ का कहर होना तय माना जा रहा है। करीब एक लाख की आबादी इस बार भी बाढ़ के चपेट में आनी तय है।
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लगातार बारिश के बाद से घाघरा नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। जिससे बांध पर बसे लोगों के साथ बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों से लोगों का रुख बांध व सुरक्षित स्थानों की तरफ हो चुका है।
अब घाघरा नदी खतरे के निशान तक पहुंचने में मात्र 5 सेंटीमीटर की कसर रह गई है। एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान 106.07 के सापेक्ष 105.986 पर पहुंच चुका है। रविवार को घाघरा का डिसचार्ज भी 2 लाख 93 हजार 550 क्यूसेक रहा।
बाढ़ का पानी अब खेतों व खलिहानों में भरकर गांव की तरफ बढ़ने लगा है। एल्गिन चरसडी बांध के साथ एक रिंग बांध बन जाने से काशीपुर, गौरासिंहपुर, गुमदहा, वैद्यपुर, प्रतापपुर, घरकुइयां सहित क्षेत्र के अन्य गांव बाढ़ की चपेट में आने से बचे रहेंगे।
ग्राम पंचायत नकहरा के ग्रामीणों की समस्या जस की तस बनी है। इस गांव के लगभग सभी मजरे बांध व नदी के बीच में हैं। बाढ़ का पानी नदी से बाहर आते ही यह जलमग्न हो जाएंगे।
जिससे इनके सामने अनेकों तरह की समस्या खड़ी हो जाएगी। यहां तक कि घर से बाहर जाने के लिये इन्हें नाव का सहारा लेना पड़ेगा। भोजन, पानी सहित पशुओं के चारे का भी संकट गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों की माने तो प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी उन्हें बाढ़ का दंश झेलना पड़ेगा। इसके अलावा उनके पास कोई अन्य रास्ता नही है। ग्रामीणों का कहना है कि रिंग बांध के निर्माण के समय यदि प्रशासन चाहता तो उन्हें बांध के बाहर जमीन मुहैया कराकर बाढ़ की समस्या से मुक्ति दिला देता, मगर ऐसा नही हुआ।
उन्हें बांध के अंदर मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आवास का भी निर्माण कराना पड़ा। जिसे नदी किसी भी समय अपने आगोश में लेकर धारा में मिला सकती है। उनका आशियाना अब नदी के रहमोकरम पर खड़ा है। इसी तरह नदी के जल स्तर ने वृद्धि होती रही अगले सप्ताह सभी मजरे बाढ़ गिरफ्त में होंगे।
एसडीएम हीरालाल ने बताया कि बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि लगातार क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। इस बार ग्रामीणों को किसी तरह की समस्या नही होगी। बांध पर मरम्मत कार्य तेज करा दिया गया है। जहां जहां घाघरा बांध के समीप आ गई है वहां निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बचाव का खाका खींचा है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थान मुहैय्या कराने के लिए अभी से व्यवस्था बनाने का निर्देश दोनो तहसीलों के एसडीएम को दे चुके हैं।
इसके अलावा बांध के आसपास के गावों पर नजर रखने की हिदायत दी है। करनैलगंज के पाल्हापुर में बाढ़ प्रभावितों के लिए व्यवस्था होगी। वहीं नवाबगंज के पटपरगंज व ऐली परसौली पर बाढ़ से आने वाली समस्याओं के निदान के लिए राहत शिविर होंगे।
जिलाधिकारी ने इसके साथ ही राजस्व, पुलिस, सिंचाई एवं बाढ़, पशुपालन, चिकित्सा विभाग को समन्वय स्थापित करके व्यवस्था बनाने की हिदायत दी है। जिससे अचानक बाढ़ की स्थिति बनने पर व्यवस्था की जा सके।
नदी के तेवर को देखते हुए बाढ़ कार्य विभाग भी सतर्क हो गया है। बीते दिनों जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने निरीक्षण कर अफसरों के पेंच कसे थे। उसके बाद बांध के बचाव के साथ ही अधूरे कार्य को पूरा करने का प्रयास हो रहा है।
बारिश से बंधों पर दरार पड़ने की निगरानी करने और उन्हें दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। एल्गिन ब्रिज से भिखारीपुर तटबंध के साथ ही सकरौर से एली बांध के मरम्मत का कार्य हो रहा है। माना जा रहा है कि बाढ़ की स्थिति तक बांध को सही कर लिया जाएगा।