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Gonda News: बाढ़ के पानी से घिरे गोंडा व बाराबंकी के चार मजरे

Sun, 03 Aug 2025 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 03 Aug 2025 11:35 PM IST
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Four villages of Gonda and Barabanki surrounded by flood water
नवाबगंज के साकीपुर चहलावा में हो रहा कटान। - संवाद
करनैलगंज (गोंडा)। लगातार हो रही बरसात और सरयू नदी में बढ़ते जलस्तर से दो ग्राम पंचायतों के चार मजरे पानी से घिर गए हैं। रविवार को सुबह से ही लगातार बरसात होने से बांध के अंदर बसे गांवों के आसपास के तालाब, गड्ढे सब लबालब हो गए हैं। सरयू की बाढ़ का पानी अब तेजी से गांवों की तरफ बढ़ रहा है।
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सरयू नदी का जलस्तर तीन दिन से खतरे के निशान के आसपास ही बना हुआ है। शाम को जलस्तर में एकाएक बढ़ोतरी होने लगी। नदी खतरे के निशान 106.07 से एक सेंटीमीटर दूर 106.08 मीटर पर पहुंच गई है। उफनाई सरयू का पानी ग्राम माझा रायपुर तथा चंदापुर किटौली की आबादी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इन गांवों से लोगों का पलायन शुरू हो गया है। ग्रामीण बांध पर पहले से अपना आशियाना बना चुके हैं। अब गांव से गृहस्थी का सामान लेकर बांध की तरफ जाने लगे हैं। चंदापुर किटौली के मजरे बिचला व धुसवां बांध के अंदर हैं। करीब 150 की आबादी वाले ये दोनों मजरे पानी से घिर गए हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ओमप्रकाश द्विवेदी का कहना है कि तहसील प्रशासन से नाव की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया है।
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वहीं, जिले की सीमा पर बसे बाराबंकी के बेहटा गांव के मजरे चरपुरवा व रेता बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन मजरों में करीब 70 परिवारों के 250 सदस्य रहते हैं। ग्राम प्रधान दुर्गेश कुमार निषाद के मुताबिक प्रशासन से तीन नावों की मांग की गई है।
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एसडीएम यशवंत राव ने बताया कि तहसील के चंदापुर किटौली गांव के दो मजरे पानी से घिरे हैं। राजस्व टीम को मौके पर भेजकर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।

बाढ़ की निगरानी में जुटे अधिकारी

सरयू नदी का डिस्चार्ज शनिवार को करीब 2.45 लाख क्यूसेक रहा। रविवार को जलस्तर बढ़ता रहा मगर डिस्चार्ज 2.42 लाख क्यूसेक पर बना रहा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार साहू, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड जय सिंह सहित अन्य अभियंता तटबंध की निगरानी में जुटे हैं।




तेज बारिश और कटान से सांसत में जान, चारे का संकट गहराया
विश्नोहरपुर (गोंडा)। कटान पीड़ितों के लिए रविवार का दिन पीड़ादायी रहा। दोपहर को तेज बारिश ने मुसीबतों में इजाफा कर दिया। साकीपुर में खेती व आबादी की जमीन निगल रही सरयू का रूप विकराल होता जा रहा है। बढ़ता जलस्तर तट पर बसे लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। रविवार को शुक्लापुरवा माझा के बालकराम ने बताया कि कटान से अब तक वह दो बार स्थान बदल चुके हैं। जहां इस बार आशियाना बनाया, वहां भी नदी पहुंच गई है। ऐसे में तेज बारिश ने और मुसीबत खड़ी कर दी है। पशुओं के लिए चारे की भी समस्या खड़ी हो गई है। राम मनोरथ यादव ने बताया कि कटान से वह भी पीड़ित हैं। ढाई बीघा धान का खेत महज 15 दिन में ही पानी में समा गया, लेकिन अब तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। मुआवजा न पिछले साल मिला और न ही इस बार कोई हाल पूछने आया।
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