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बाढ़ ने छीन ली 50 हजार लोगों की खुशियां

Fri, 21 Aug 2020 10:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2020 10:03 PM IST
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Flood took away the happiness of 50 thousand people
तरबगंज/नवाबगंज (गोंडा)। बाढ़ की कहानी भी अजीब है। हर साल आती है। तमाम घरों की पूरी गृहस्थी का सामान उजाड़ कर चली जाती है। माझा क्षेत्र के लोग अपना कुनबा पुन: बसा लेते हैं, लेकिन इस दैवी आपदा पर प्रशासनिक लापरवाही अब भारी पड़ रही है। आलम यह है कि जिन लोगों पर क्षेत्र के 50 हजार से अधिक लोगों के सुरक्षा की जिम्मेदारी है वे ग्रामीणों के दुख-दर्द में शामिल होने के बजाय बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को पिकनिक स्पॉट ही मान रहे हैं। बाढ़ प्रभावित लगभग 28 ग्राम पंचायतों में स्थिति काफी खराब है। सरयू की बाढ़ के चलते विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई है, लेकिन ग्रामीणों को रात में उजाले के लिए मिट्टी का तेल भी नहीं दिया जा रहा है। राशन व पशु चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
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बताते चलें कि जिले में मिट्टी तेल आवंटन खत्म कर दिया गया है। ऐसे में हजारों लोगों की आबादी रात में अंधेरे में रहने को विवश हैं। जलप्लावन के बीच लगातार सर्पदंश की घटनाएं भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। हद तो तब हो गई जब एक 22 वर्षीय युवक बाढ़ के पानी में डूब कर मर गया। अब उसके परिवार में वृद्ध माता पिता ही बचे हैं, लेकिन तहसील प्रशासन ने उसे दैवी आपदा ना मानते हुए सहायता देने से ही इनकार कर दिया। तरबगंज तहसील क्षेत्र में सरयू की बाढ़ ऐली परसौली से शुरू होकर कटरा शिवदयाल गंज तक के लगभग 3 दर्जन से अधिक गांव में व्यापक कहर ढा रही है। ढेमवा घाट पुल के बगल स्थित गांव बेउंदा माझा के 17 मजरे पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं। ऊंचे टीलों पर बैठे लोग अपनी गृहस्थी संभाल रहे हैं। यहां के 90 फीसदी लोग अपने मवेशियों के साथ बगल के गांव खोजनपुर, सरांवा, भानपुर, धौरहराघाट तथा दुर्जनपुर घाट में शरण ले चुके हैं।
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यहां के निवासी प्रताप, रामबहादुर, राम सुधर और राधे शरण का कहना है कि बाढ़ उनकी नियति बन चुकी है। हर साल बाढ़ के विकराल रूप लेने पर वह मवेशियों समेत पलायन करते हैं लेकिन परिवार गांव में ही रह जाता है। इस वर्ष बिजली सप्लाई बंद करा दी गई है। ऐसे में रात में जलाने के लिए लोगों के पास मिट्टी तेल भी नहीं है। लिहाजा सर्पदंश से अब तक आधा दर्जन लोग पीड़ित हो चुके हैं। गुरुवार की रात अनीता पुत्री हरिराम को विषैले सांप ने काट लिया। गांव के प्रधान केशवराम यादव ने सहयोगियों के साथ उसे फैजाबाद के कुचेरा बाजार भिजवाया। जहां इलाज के बाद उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर है। इसके अलावा छल्लू राम व उजागिर की बहू को भी अब सांप काट चुका है। पलिया चरौठा में भी पांच मजरे बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। इसके अलावा बनगांव, दत्त नगर, बहादुरपुर माझा, परास, जबरनगर, रांगी, घांचा बीकापुर, जैतपुर, दुल्लापुर में भी बाढ़ का पानी कहर ढा रहा है। बनगांव के मजरे कोडरी, नगरिया, महिषासुर, भैया पुरवा, रतनपुर, कंचनपुर में चारों तरफ पानी ही पानी है।
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राजस्व कर्मी की लापरवाही से बूढ़े मां-बाप बहा रहे खून के आंसू
दैवीय आपदा में जान गंवाने के बाद मृतक के परिजनों को सहायता मिलने में राजस्व कर्मी रोड़े अटका रहे हैं। बनगांव गांव के नगरिया निवासी राजेश पुत्र नंगू भैंस चराने के लिए गया था। अचानक बाढ़ के पानी में पैर फिसलने से बीते 5 अगस्त को उसकी डूबकर मृत्यु हो गई। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद भी लेखपाल राकेश यादव और राजस्व निरीक्षक आदित्य सिंह ने मामले में पेच फंसा दिया। राजस्व कर्मियों का कहना है कि युवक की मौत उसकी लापरवाही के चलते हुई है। वह बाढ़ के पानी के पास जानवर चराने ले गया था। अब यह मृतक से कौन पूछने जाए कि लापरवाही कैसे हुई। उधर मृतक युवक राजेश के विरुद्ध माता-पिता की स्थिति काफी खराब है। वहीं तहसीलदार नरसिंह नारायण वर्मा का कहना है की जांच रिपोर्ट में मृतक की ही लापरवाही सामने आने के कारण अब तक सहायता नहीं दी गई है, जबकि ग्राम प्रधान सुरेश सिंह ने बताया कि आखिर मृतक ने जानबूझकर तो बाढ़ के पानी में छलांग लगाई नहीं तो फिर उसे सहायता क्यों नहीं दी जा रही है। इस मामले में वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
हर तरफ पानी, पुल सड़क सब चपेट में
नवाबगंज के जैतपुर माझा, दुल्लापुर सहित अन्य गांव पूरी तरह जलमग्न हैं। पूरा गांव बाढ़ से घिरे हैं। दुल्लापुर गांव निवासी पाटनदीन निषाद ने बताया कि प्रशासन की तरफ से उन लोगों को कोई सहायता नहीं मिली है। पन्नी का वितरण किसे किया गया नहीं पता। उन लोगों को कुछ नहीं मिला है। जैतपुर के महेश निषाद ने बताया कि बाढ़ की वजह से पशुओं के चारे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। माझा क्षेत्र का पूरा इलाका पानी से भरा है। जैतपुर गांव के लोग पानी के बीच गुजर कर चारा की जुगत करते देखे गए। लोगों पानी के बीच से गुजर कर आते जाते हैं। कुछ जगह नावें लगाई गई हैं जो सभी लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है।
पीड़ितों की जुबानी, दूर नहीं हो रही परेशानी
बेउंदा माझा के राम बहादुर ने बताया कि गांव के सभी मजरे पानी में समा चुके हैं। हम लोग सुरक्षित स्थान पर चले आए हैं। बनगांव के प्रधान सुरेश सिंह ने कहा कि प्रशासन को अनदेखी नहीं करनी चाहिए। बाढ़ के पानी में चाहे लापरवाही या अनजाने में मौत हो उसे मुआवजा दिया जाना चाहिए। बेउंदा माझा के प्रधान केशवराम ने बताया कि प्रशासन की ओर से दी जा रही सहायता न के बराबर है। हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन को चाहिए कि मिट्टी तेल का ही वितरण करा दें जिससे लोग अंधेरे से बच सकें। मनीराम व गंगा राम ने बाढ़ की विभीषिका से द्रवित दिखे और कहा कि अब राशन व चारा दोनों का संकट है।

160 नावें लगाई गईं
अब तक 12 ग्राम पंचायतें पूरी तरह प्रभावित हैं तथा 29 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। गांव में 160 नावें लगातार चलाई जा रही हैं। 56 क्षतिग्रस्त मकान अब तक चिह्नित किए गए हैं। वहीं लगभग 530 हेक्टेयर जमीन का बाढ़ के पानी में समा चुकी है। 500 लोगों को त्रिपाल वितरित किया जा चुका है। राहत सामग्री 210 लोगों में वितरित की गई है और 50 क्विंटल भूसा 101 परिवारों में बांटा गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पूरी सतर्कता बरती जा रही है।-नरसिंह नारायण वर्मा, तहसीलदार तरबगंज
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