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Gonda News: बैराजों के पानी से बाढ़ का खतरा
Mon, 10 Jul 2023 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 10 Jul 2023 11:08 PM IST
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करनैलगंज में घाघरा नदी का दृश्य। - संवाद
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गोंडा। जिले में बाढ़ का खतरा बारिश से कम बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से अधिक बना हुआ है। 1.60 लाख क्यूसेक पानी सरयू नदी में छोड़ा जा चुका है। इससे नदी में पानी बढ़ता जा रहा है। यह बात अलग है कि नदी का पानी आसपास के गांवों में फैल रहा है। इससे जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे ही है।
सरयू नदी का जलस्तर सोमवार को खतरे के निशान से 1.25 मीटर दूर रह गया। इससे बाढ़ का पानी तरबगंज तहसील के गांवों की ओर बढ़ रहा है। पहाड़ी नालों से पानी आने के कारण बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। यही नहीं पानी तटबंध से होते हुए आगे बढ़ रहा है। तरबगंज के ऐली परसौली तक ही तटबंध है, उसके आगे कोई तटबंध नहीं है। इसके कारण तरबगंज में नदी का पानी गांवों की ओर रुख कर रहा है। साकीपुर, जैतपुर, दुर्गागंज, तुलसीपुर समेत नदी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ की दस्तक से लोग सहमे हैं। तमाम किसानों के खेत नदी में समा गए हैं। नदी अब खेतों में कटान कर गांवों में घुसने को बेताब है। माना जा रहा है कि यही स्थिति रही तो इसी महीने के अंत तक बाढ़ के हालात गंभीर हो जाएंगे।
करनैलगंज संवाद के मुताबिक सरयू का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी बांध की तरफ रुख करती जा रही है। बांध और नदी के बीच खाली पड़ी कृषि योग्य भूमि में कटान शुरू हो गई है। कृषि योग्य भूमि नदी लगातार निगलती जा रही है। ऐसे में किसानों को परवल, भिंडी, करेला और मक्का की फसल आनन-फानन काटनी पड़ रही है।
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ग्राम बांसगांव, रायपुर मांझा और पारा, बेहटा तथा नकहरा के सामने नदी और बांध के बीच सैकड़ों किसानों के खेत हैं। जिनमें वह खेती करते हैं। मौजूदा समय में खेतों में अधिकांश सब्जी की फसल लगी है। जिसे नदी की कटान में समाते देख किसान आनन-फानन फसल काटने लगे हैं। किसानों के खेत सीधे नदी की जद में आ गए हैं। नीचे से कटान करती हुई सरयू नदी तेजी से बांध की तरफ बढ़ रही है। जिससे बांध के आसपास खासकर रायपुर माझा गांव पर खतरा मंडराने लगा है।
सहायक अभियंता अमरेश सिंह का कहना है कि बांध से नदी अभी दूर है। बांध को मजबूत किया जा चुका है। किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। उपजिलाधिकारी विशाल कुमार कहते हैं कि बांध के आसपास के गांवों में राजस्व विभाग की टीमों को लगाया गया है। लगातार निगरानी कराई जा रही है। अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है।
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सरयू नदी का जलस्तर सोमवार को खतरे के निशान से 1.25 मीटर दूर रह गया। इससे बाढ़ का पानी तरबगंज तहसील के गांवों की ओर बढ़ रहा है। पहाड़ी नालों से पानी आने के कारण बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। यही नहीं पानी तटबंध से होते हुए आगे बढ़ रहा है। तरबगंज के ऐली परसौली तक ही तटबंध है, उसके आगे कोई तटबंध नहीं है। इसके कारण तरबगंज में नदी का पानी गांवों की ओर रुख कर रहा है। साकीपुर, जैतपुर, दुर्गागंज, तुलसीपुर समेत नदी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ की दस्तक से लोग सहमे हैं। तमाम किसानों के खेत नदी में समा गए हैं। नदी अब खेतों में कटान कर गांवों में घुसने को बेताब है। माना जा रहा है कि यही स्थिति रही तो इसी महीने के अंत तक बाढ़ के हालात गंभीर हो जाएंगे।
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करनैलगंज संवाद के मुताबिक सरयू का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी बांध की तरफ रुख करती जा रही है। बांध और नदी के बीच खाली पड़ी कृषि योग्य भूमि में कटान शुरू हो गई है। कृषि योग्य भूमि नदी लगातार निगलती जा रही है। ऐसे में किसानों को परवल, भिंडी, करेला और मक्का की फसल आनन-फानन काटनी पड़ रही है।
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ग्राम बांसगांव, रायपुर मांझा और पारा, बेहटा तथा नकहरा के सामने नदी और बांध के बीच सैकड़ों किसानों के खेत हैं। जिनमें वह खेती करते हैं। मौजूदा समय में खेतों में अधिकांश सब्जी की फसल लगी है। जिसे नदी की कटान में समाते देख किसान आनन-फानन फसल काटने लगे हैं। किसानों के खेत सीधे नदी की जद में आ गए हैं। नीचे से कटान करती हुई सरयू नदी तेजी से बांध की तरफ बढ़ रही है। जिससे बांध के आसपास खासकर रायपुर माझा गांव पर खतरा मंडराने लगा है।
सहायक अभियंता अमरेश सिंह का कहना है कि बांध से नदी अभी दूर है। बांध को मजबूत किया जा चुका है। किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। उपजिलाधिकारी विशाल कुमार कहते हैं कि बांध के आसपास के गांवों में राजस्व विभाग की टीमों को लगाया गया है। लगातार निगरानी कराई जा रही है। अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है।