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स्वास्थ्य विभाग में दवाओं का स्टॉक खत्म
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2016 09:53 PM IST
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अभी तक तो स्वास्थ्य विभाग में केवल कुछ गिनी-चुनी दवाइयों का ही अकाल था, लेकिन धीरे-धीरे हालात यह हो गए हैं कि पीएचसी से लेकर सीएचसी और यहां तक कि ड्रग स्टोर में एंटीबायटिक, बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, सांस, नार्मल एलाइन जैसी 135 प्रकार की दवाइयों की कमी हो गई है। इसके चलते मरीजों को जहां बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं तो वहीं कंपनियों से मिलने वाली दवाओं की डिलीवरी में हो रही देरी से स्वास्थ्य अधिकारी भी परेशान हैं।
एसएमओ स्टोर डॉ. गयासुल हसन की मानें तो उनकी ओर से दवाओं की डिलीवरी के लिए सीएमएसडी लखनऊ व डीजी मेडिसिन हेडक्वार्टर को कई बार रिमाइंडर के जरिये दवाइयों की आपूर्ति करने के लिए बार पत्र लिखा गया। लेकिन अभी तक उन्हें 135 दवाओं में से किसी भी दवा की डिलीवरी नहीं मिल पाई है। इसके कारण कभी लोकेज परचेजिंग तो कभी खुद के मैनेजमेंट से जैसे-तैसे काम चलाना पड़ रहा है।
रिंगर लैक्टेट (आरएल), डेक्सट्रोस, डाइक्लोफिनैक, सीफोटैक्सिम, बेजिंल बेेंजोएट, सिट्रीजिन, क्लोक्वीन, प्राइमाक्वीन, क्लोरोफिनरामाइन, जेंटामाइसिन, ओफ्लाक्सासिन, अंडस्ट्रान, पैरासीटामाल टेबलट/सीरप, जिंक, सिफरोफ्लाक्सासिन, एमाक्सिलीन, एसाइक्लोफिनैक, ब्रोमोहेक्सीन, एलप्रोरजोलम, डाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड सहित कुल 135 प्रकार की दवाओं के ऑर्डर पेंडिंग पड़े हैं।
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सीएमओ के अधीन संचालित सामुदायिक, प्राथमिक व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कारण ग्रामीण इलाकों के मरीजों को मजबूरी में अपना समय और पैसा खर्च करके जिला अस्पताल आना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें अपने समय के साथ पैसा भी बर्बाद करना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में संचालित 16 सीएचसी-पीएचसी व 50 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की दवाओं की खपत होती है। लेकिन इधर पिछले कुछ महीनों से दवाओं का स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो जाने से स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को यह दवाएं नहीं मिल पा रहीं।
बुखार व दर्द में ज्यादातर काम आने वाली पैरासीटामाल टेबलेट की जगह सीएचसी-पीएचसी में इन दिनों मरीजों को एस्प्रिन टेबलेट दी जा रही है। जबकि ठीक इसी तरह जहां जेंटा की जरूरत है, वहां मेकासिन दी जा रही है।
इसी तरह कई अन्य मर्जों के लिए मरीजों को विकल्प के तौर पर ऐसी दवाएं दी जा रही है, जिनका आगे चलकर मरीजों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की संभावना है।
एसएमओ स्टोर डॉ. गयासुल हसन ने कहा कि सीएमएसडी स्टोर में 135 तरह की दवाओं का स्टॉक पूरी तरह से खत्म है। जिसके लिए रोज ही इसका रिमाइंटर सीएमएसडी मुख्यालय और डीजी मेडिसिन को भेजा जा रहा है।
लेकिन बात जहां तक मरीजों को मुहैया होने वाली दवा की है तो उसके लिए जहां तक उनसे बन पड़ता है, वह दवाएं लोकेल परचेजिंग व अन्य स्रोतों से मैनेज करते हैं, ताकि मरीजों को कोई समस्या न हो। उम्मीद है कि जल्द ही सारी दवाएं उन्हें मुहैया हो जाएंगी।
सीएमओ गोंडा डॉ. अमर सिंह कुशवाहा ने बताया कि सीएमएसडी स्टोर में रेट कांट्रैक्ट (आरसी) की ज्यादातर दवाएं खत्म हो चुकी हैं, जिसके लिए दवा आपूर्ति करने वाली फर्मों के पास उनके आर्डर लगे हुए हैं। ऊपर के अधिकारियों से भी लगातार उनकी बात दवाओं की आपूर्ति को लेकर चल रही है।
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एसएमओ स्टोर डॉ. गयासुल हसन की मानें तो उनकी ओर से दवाओं की डिलीवरी के लिए सीएमएसडी लखनऊ व डीजी मेडिसिन हेडक्वार्टर को कई बार रिमाइंडर के जरिये दवाइयों की आपूर्ति करने के लिए बार पत्र लिखा गया। लेकिन अभी तक उन्हें 135 दवाओं में से किसी भी दवा की डिलीवरी नहीं मिल पाई है। इसके कारण कभी लोकेज परचेजिंग तो कभी खुद के मैनेजमेंट से जैसे-तैसे काम चलाना पड़ रहा है।
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रिंगर लैक्टेट (आरएल), डेक्सट्रोस, डाइक्लोफिनैक, सीफोटैक्सिम, बेजिंल बेेंजोएट, सिट्रीजिन, क्लोक्वीन, प्राइमाक्वीन, क्लोरोफिनरामाइन, जेंटामाइसिन, ओफ्लाक्सासिन, अंडस्ट्रान, पैरासीटामाल टेबलट/सीरप, जिंक, सिफरोफ्लाक्सासिन, एमाक्सिलीन, एसाइक्लोफिनैक, ब्रोमोहेक्सीन, एलप्रोरजोलम, डाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड सहित कुल 135 प्रकार की दवाओं के ऑर्डर पेंडिंग पड़े हैं।
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सीएमओ के अधीन संचालित सामुदायिक, प्राथमिक व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कारण ग्रामीण इलाकों के मरीजों को मजबूरी में अपना समय और पैसा खर्च करके जिला अस्पताल आना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें अपने समय के साथ पैसा भी बर्बाद करना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में संचालित 16 सीएचसी-पीएचसी व 50 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की दवाओं की खपत होती है। लेकिन इधर पिछले कुछ महीनों से दवाओं का स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो जाने से स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को यह दवाएं नहीं मिल पा रहीं।
बुखार व दर्द में ज्यादातर काम आने वाली पैरासीटामाल टेबलेट की जगह सीएचसी-पीएचसी में इन दिनों मरीजों को एस्प्रिन टेबलेट दी जा रही है। जबकि ठीक इसी तरह जहां जेंटा की जरूरत है, वहां मेकासिन दी जा रही है।
इसी तरह कई अन्य मर्जों के लिए मरीजों को विकल्प के तौर पर ऐसी दवाएं दी जा रही है, जिनका आगे चलकर मरीजों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की संभावना है।
एसएमओ स्टोर डॉ. गयासुल हसन ने कहा कि सीएमएसडी स्टोर में 135 तरह की दवाओं का स्टॉक पूरी तरह से खत्म है। जिसके लिए रोज ही इसका रिमाइंटर सीएमएसडी मुख्यालय और डीजी मेडिसिन को भेजा जा रहा है।
लेकिन बात जहां तक मरीजों को मुहैया होने वाली दवा की है तो उसके लिए जहां तक उनसे बन पड़ता है, वह दवाएं लोकेल परचेजिंग व अन्य स्रोतों से मैनेज करते हैं, ताकि मरीजों को कोई समस्या न हो। उम्मीद है कि जल्द ही सारी दवाएं उन्हें मुहैया हो जाएंगी।
सीएमओ गोंडा डॉ. अमर सिंह कुशवाहा ने बताया कि सीएमएसडी स्टोर में रेट कांट्रैक्ट (आरसी) की ज्यादातर दवाएं खत्म हो चुकी हैं, जिसके लिए दवा आपूर्ति करने वाली फर्मों के पास उनके आर्डर लगे हुए हैं। ऊपर के अधिकारियों से भी लगातार उनकी बात दवाओं की आपूर्ति को लेकर चल रही है।