फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   cultural

संसार में बेटी के कन्यादान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं, कोई दान नहीं

Sat, 17 Jul 2021 10:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jul 2021 10:36 PM IST
विज्ञापन
cultural
बालपुर (गोंडा)। विकास खंड परसपुर के सरैया चौबे बासु देव बाबा कुट्टी हनुमंत धाम में गंगा दशहरा के अवसर पर 11 दिवसीय राम कथा एवं हनुमंत महायज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को को कथा वाचक राजन जी महाराज ने शिव पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे रहे।
विज्ञापन

कथा वाचक राजन जी महाराज ने कहा कि इस संसार में बेटी के कन्या दान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं कोई दान नहीं, जिस घर में बेटियों का सम्मान होता है, वहां पर बेटी के पायल की छम छम आवाज सुनाई देती है। उस घर में देवताओं का निवास होता है। बेटा तो केवल एक कुल का मान बढ़ता है लेकिन बेटी दो कुलों का सम्मान बढ़ाती है। समाज में बेटियों के शादी में लोग दहेज की मांग करते है यह गलत है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि नारद जी के कहने से माता पार्वती ने कई वर्षों तक शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या किया। जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवताओं, भूत, प्रेत, अनेक रूप बनाकर हिमांचल के नगर की तरफ शोर गुल मचाते हुए चल दिए। बरात में राजा हिमाचल के नगर में प्रवेश करती है तो लोग भाग खड़े हुए। रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर जाती है। विकराल वेश में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगे। मैनावती ने माता पार्वती को गोद में लेकर जोर से विलाप कर रही है। कहती है कि इस पागल के साथ मैं अपनी बेटी का विवाह नहीं करूंगी चाहे जो भी हो जाए। नारद जी आये और बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहे हैं, वे शक्ति स्वरूपा है। विदाई के समय मैना रानी ने पार्वती जी से कह रही है कि हमेशा अपने पति के पद की सेवा करना। पति धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

महाराज ने कहा कि देखो पार्वती जी महल छोड़कर आयी है कितना खुश है। जीवन में सुख साधन से नही हो सकता है। जीवन मे सुख मन के स्वीकार करने की शक्ति से होता है।अगर आप परिस्थिति को स्वीकार कर लिया तो दुनिया की कोई ताकत आपको दु:खी नही कर सकती है। उन्होंने कहा कि देवता बहुत समय बीत जाने पर परेशान हो गये। सोच की बहुत काल बीत गया अभी संकट बना हुआ है। तारकासुर नाम के राक्षस को तो शंकर का पुत्र ही मरेगा। कुछ समय बाद छह मुखवाले स्वामी कार्तिक का जन्म हुआ और तारकासुर का वध किया। देवता खुश होकर पुष्प वर्षा करने लगे। इस दौरान राम दास जी महाराज, प्रधान प्रतिनिधि आशीष तिवारी, जिला पंचायत सदस्य विनय शंकर दूबे बिन्नू भैया, राज बहादुर तिवारी, अरुण देव तिवारी, महेश तिवारी, राज कमल तिवारी प्रधान, रघुराज शुक्ल, अरुण तिवारी, अशोक तिवारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed