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संसार में बेटी के कन्यादान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं, कोई दान नहीं
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बालपुर (गोंडा)। विकास खंड परसपुर के सरैया चौबे बासु देव बाबा कुट्टी हनुमंत धाम में गंगा दशहरा के अवसर पर 11 दिवसीय राम कथा एवं हनुमंत महायज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को को कथा वाचक राजन जी महाराज ने शिव पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे रहे।
कथा वाचक राजन जी महाराज ने कहा कि इस संसार में बेटी के कन्या दान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं कोई दान नहीं, जिस घर में बेटियों का सम्मान होता है, वहां पर बेटी के पायल की छम छम आवाज सुनाई देती है। उस घर में देवताओं का निवास होता है। बेटा तो केवल एक कुल का मान बढ़ता है लेकिन बेटी दो कुलों का सम्मान बढ़ाती है। समाज में बेटियों के शादी में लोग दहेज की मांग करते है यह गलत है।
उन्होंने कहा कि नारद जी के कहने से माता पार्वती ने कई वर्षों तक शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या किया। जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवताओं, भूत, प्रेत, अनेक रूप बनाकर हिमांचल के नगर की तरफ शोर गुल मचाते हुए चल दिए। बरात में राजा हिमाचल के नगर में प्रवेश करती है तो लोग भाग खड़े हुए। रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर जाती है। विकराल वेश में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगे। मैनावती ने माता पार्वती को गोद में लेकर जोर से विलाप कर रही है। कहती है कि इस पागल के साथ मैं अपनी बेटी का विवाह नहीं करूंगी चाहे जो भी हो जाए। नारद जी आये और बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहे हैं, वे शक्ति स्वरूपा है। विदाई के समय मैना रानी ने पार्वती जी से कह रही है कि हमेशा अपने पति के पद की सेवा करना। पति धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है।
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महाराज ने कहा कि देखो पार्वती जी महल छोड़कर आयी है कितना खुश है। जीवन में सुख साधन से नही हो सकता है। जीवन मे सुख मन के स्वीकार करने की शक्ति से होता है।अगर आप परिस्थिति को स्वीकार कर लिया तो दुनिया की कोई ताकत आपको दु:खी नही कर सकती है। उन्होंने कहा कि देवता बहुत समय बीत जाने पर परेशान हो गये। सोच की बहुत काल बीत गया अभी संकट बना हुआ है। तारकासुर नाम के राक्षस को तो शंकर का पुत्र ही मरेगा। कुछ समय बाद छह मुखवाले स्वामी कार्तिक का जन्म हुआ और तारकासुर का वध किया। देवता खुश होकर पुष्प वर्षा करने लगे। इस दौरान राम दास जी महाराज, प्रधान प्रतिनिधि आशीष तिवारी, जिला पंचायत सदस्य विनय शंकर दूबे बिन्नू भैया, राज बहादुर तिवारी, अरुण देव तिवारी, महेश तिवारी, राज कमल तिवारी प्रधान, रघुराज शुक्ल, अरुण तिवारी, अशोक तिवारी आदि मौजूद रहे।
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कथा वाचक राजन जी महाराज ने कहा कि इस संसार में बेटी के कन्या दान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं कोई दान नहीं, जिस घर में बेटियों का सम्मान होता है, वहां पर बेटी के पायल की छम छम आवाज सुनाई देती है। उस घर में देवताओं का निवास होता है। बेटा तो केवल एक कुल का मान बढ़ता है लेकिन बेटी दो कुलों का सम्मान बढ़ाती है। समाज में बेटियों के शादी में लोग दहेज की मांग करते है यह गलत है।
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उन्होंने कहा कि नारद जी के कहने से माता पार्वती ने कई वर्षों तक शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या किया। जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवताओं, भूत, प्रेत, अनेक रूप बनाकर हिमांचल के नगर की तरफ शोर गुल मचाते हुए चल दिए। बरात में राजा हिमाचल के नगर में प्रवेश करती है तो लोग भाग खड़े हुए। रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर जाती है। विकराल वेश में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगे। मैनावती ने माता पार्वती को गोद में लेकर जोर से विलाप कर रही है। कहती है कि इस पागल के साथ मैं अपनी बेटी का विवाह नहीं करूंगी चाहे जो भी हो जाए। नारद जी आये और बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहे हैं, वे शक्ति स्वरूपा है। विदाई के समय मैना रानी ने पार्वती जी से कह रही है कि हमेशा अपने पति के पद की सेवा करना। पति धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है।
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महाराज ने कहा कि देखो पार्वती जी महल छोड़कर आयी है कितना खुश है। जीवन में सुख साधन से नही हो सकता है। जीवन मे सुख मन के स्वीकार करने की शक्ति से होता है।अगर आप परिस्थिति को स्वीकार कर लिया तो दुनिया की कोई ताकत आपको दु:खी नही कर सकती है। उन्होंने कहा कि देवता बहुत समय बीत जाने पर परेशान हो गये। सोच की बहुत काल बीत गया अभी संकट बना हुआ है। तारकासुर नाम के राक्षस को तो शंकर का पुत्र ही मरेगा। कुछ समय बाद छह मुखवाले स्वामी कार्तिक का जन्म हुआ और तारकासुर का वध किया। देवता खुश होकर पुष्प वर्षा करने लगे। इस दौरान राम दास जी महाराज, प्रधान प्रतिनिधि आशीष तिवारी, जिला पंचायत सदस्य विनय शंकर दूबे बिन्नू भैया, राज बहादुर तिवारी, अरुण देव तिवारी, महेश तिवारी, राज कमल तिवारी प्रधान, रघुराज शुक्ल, अरुण तिवारी, अशोक तिवारी आदि मौजूद रहे।