{"_id":"5db08c068ebc3e012c654736","slug":"crisis-on-pottery-art-no-electronic-chalk-found-gonda-news-lko4885797143","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुम्हारी कला पर संकट, नहीं मिले इलेक्ट्रॉनिक चाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुम्हारी कला पर संकट, नहीं मिले इलेक्ट्रॉनिक चाक
विज्ञापन
गोंडा में दीवाली के लिए तैयार हो रहे दीये।
- फोटो : GONDA
गोंडा। माटी कला से जुड़े कारीगरों की सेहत सुधरने के बजाए दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। शासन स्तर पर माटी कला को बढ़ावा देने के लिए माटी कला बोर्ड का गठन कर कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक देने के साथ-साथ बोर्ड को अन्य कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। दीपावली का त्योहर करीब आ चुका है और अभी तक किसी भी कुम्हार को इलेक्ट्रॉनिक चाक नहीं दिया जा सका है। पैतृक पेशा से जुड़े 42 लोगों ने खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में इलेक्ट्रिक चाक के लिए आवेदन किया था। जिसमें 25 लोगों को चयनित कर सूची शासन को भेज दी गई है। विभाग का दावा है कि पांच इलेक्ट्रिॉनिक चाक आए हैं और 20 का इंतजार है।
शासन ने विलुप्त होती माटी कला को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी के कलाकारों शिल्पकारों को हाईटेक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई है। मिट्टी कला को हाईटेक करने के लिए एक स्वशासी निकाय गठित किया गया है। इस बोर्ड के माध्यम से माटीकला व माटी शिल्पकला के विकास के लिए नीति निर्धारण करने के साथन ही साथ इस कला के उन्नयन एवं आधुनिकीकरण के लिए प्रभावी योजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बोर्ड के माध्यम से माटीकला व माटी शिल्पकला के कारीगरों की समस्याओं का निराकरण व इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कारीगरों से सुझाव भी लिए जाएंगे, तथा तैयार उत्पादों के विपणन की व्यवस्था भी बोर्ड कराएगा।
ऐसे कारीगरों को औद्योगिक क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर शेड भी आवंटन किए जाएंगे। उद्योग स्थल तक बिजली, पानी, संपर्क मार्ग आदि की व्यवस्था की जाएगी। कारीगरों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। परंपरागत एवं नव प्रशिक्षित शिल्पीयों के लिए शिल्प के डिजाइन विकास के लिए नवीनतम तकनीक एवं उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए बैंक ऋण एवं मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार विशेषकर विकास आयुक्त हस्तशिल्प एवं खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा।
विज्ञापन
बताया जाता है कि इस जिले को पांच इलेक्ट्रिक चाक निशुल्क में वितरण कराने के लिए मिले थे। आवेदनों के सापेक्ष विभाग इन चाक का वितरण कैसे करें इसके लिए योजना बना रहा था। खास बात यह है कि इस योजना में सिर्फ कुम्हार बिरादरी के लोगों को शामिल किया गया है जबकि कसघर बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में माटी के बर्तन का निर्माण करते हैं। गांव में बर्तन कुटीर उद्योग चला रहे कुम्हार बिरादरी के लोगों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि प्रचार-प्रसार के अभाव में योजना दम घुट रही हो।
रुपईडीह विकासखंड के ग्राम पंचायत जेठपुरवा के मजरा पूरे सलई निवासी श्याम रंग प्रजापति बताते हैं कि यह उनका पुश्तैनी धंधा है बाबा दादा के जमाने से करते चले आ रहे हैं। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में इलेक्ट्रिक चाक के लिए आवेदन किया था अभी तक नहीं मिला है। इन लोगों का कहना है कि दीपावली पर्व आते ही मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ती है अब कुछ तेजी पकड़ने लगी है ।अब कुल्हड़ परई के ग्राहक भी गांव में आने लगे है।
500 से अधिक हैं शिल्पकार, सिर्फ दीपावली से ही उम्मीद
जिले में 500 से अधिक शिल्पकार हैं जो माटी से सामग्री का निर्माण करते हैं। लेकिन इनको सिर्फ दीपावली से ही उम्मीद होती है। अन्य सामान्य दिनों के लिए स्थायी रोजगार की कोई व्यवस्था अभी नही हो पाई है। शहर में ही बहराइच रोड़ पर, पॉलीटेक्निक के पास और बेलसर पर रोड़ पर माटी के शिल्पकार हैं। उनका कहना है कि वे लोग कुज्जा व परई के साथ मटकी आदि बनाते हैं लेकिन रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
माटी कला के शिल्पकारों के उत्थान के लिए कार्य हो रहा है। इलेक्ट्रानिक चाक का वितरण होना है। इसके लिए 42 आवेदन मिले थे जबकि जनपद का लक्ष्य 25 का था ऐसे में 25 का चयन कर सूची शासन को भेज दी गई है, वहां से दिशा-निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -डीके मिश्रा, जिला खादीग्रामोद्योग अधिकारी
विज्ञापन
शासन ने विलुप्त होती माटी कला को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी के कलाकारों शिल्पकारों को हाईटेक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई है। मिट्टी कला को हाईटेक करने के लिए एक स्वशासी निकाय गठित किया गया है। इस बोर्ड के माध्यम से माटीकला व माटी शिल्पकला के विकास के लिए नीति निर्धारण करने के साथन ही साथ इस कला के उन्नयन एवं आधुनिकीकरण के लिए प्रभावी योजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बोर्ड के माध्यम से माटीकला व माटी शिल्पकला के कारीगरों की समस्याओं का निराकरण व इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कारीगरों से सुझाव भी लिए जाएंगे, तथा तैयार उत्पादों के विपणन की व्यवस्था भी बोर्ड कराएगा।
विज्ञापन
ऐसे कारीगरों को औद्योगिक क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर शेड भी आवंटन किए जाएंगे। उद्योग स्थल तक बिजली, पानी, संपर्क मार्ग आदि की व्यवस्था की जाएगी। कारीगरों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। परंपरागत एवं नव प्रशिक्षित शिल्पीयों के लिए शिल्प के डिजाइन विकास के लिए नवीनतम तकनीक एवं उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए बैंक ऋण एवं मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार विशेषकर विकास आयुक्त हस्तशिल्प एवं खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा।
विज्ञापन
बताया जाता है कि इस जिले को पांच इलेक्ट्रिक चाक निशुल्क में वितरण कराने के लिए मिले थे। आवेदनों के सापेक्ष विभाग इन चाक का वितरण कैसे करें इसके लिए योजना बना रहा था। खास बात यह है कि इस योजना में सिर्फ कुम्हार बिरादरी के लोगों को शामिल किया गया है जबकि कसघर बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में माटी के बर्तन का निर्माण करते हैं। गांव में बर्तन कुटीर उद्योग चला रहे कुम्हार बिरादरी के लोगों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि प्रचार-प्रसार के अभाव में योजना दम घुट रही हो।
रुपईडीह विकासखंड के ग्राम पंचायत जेठपुरवा के मजरा पूरे सलई निवासी श्याम रंग प्रजापति बताते हैं कि यह उनका पुश्तैनी धंधा है बाबा दादा के जमाने से करते चले आ रहे हैं। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में इलेक्ट्रिक चाक के लिए आवेदन किया था अभी तक नहीं मिला है। इन लोगों का कहना है कि दीपावली पर्व आते ही मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ती है अब कुछ तेजी पकड़ने लगी है ।अब कुल्हड़ परई के ग्राहक भी गांव में आने लगे है।
500 से अधिक हैं शिल्पकार, सिर्फ दीपावली से ही उम्मीद
जिले में 500 से अधिक शिल्पकार हैं जो माटी से सामग्री का निर्माण करते हैं। लेकिन इनको सिर्फ दीपावली से ही उम्मीद होती है। अन्य सामान्य दिनों के लिए स्थायी रोजगार की कोई व्यवस्था अभी नही हो पाई है। शहर में ही बहराइच रोड़ पर, पॉलीटेक्निक के पास और बेलसर पर रोड़ पर माटी के शिल्पकार हैं। उनका कहना है कि वे लोग कुज्जा व परई के साथ मटकी आदि बनाते हैं लेकिन रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
माटी कला के शिल्पकारों के उत्थान के लिए कार्य हो रहा है। इलेक्ट्रानिक चाक का वितरण होना है। इसके लिए 42 आवेदन मिले थे जबकि जनपद का लक्ष्य 25 का था ऐसे में 25 का चयन कर सूची शासन को भेज दी गई है, वहां से दिशा-निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -डीके मिश्रा, जिला खादीग्रामोद्योग अधिकारी