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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   child's body rotting in river in border dispute

सीमा विवाद में 22 घंटे नदी में सड़ता रहा बच्चे का शव

Sat, 10 Jun 2017 10:40 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Sat, 10 Jun 2017 10:40 PM IST
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  डीजीपी भले ही अपने मातहतों को मानवीय संवेदनाओं के कितने भी पाठ क्यों न पढ़ा लें। लेकिन पुलिस है कि वह अपनी पुलिसिंग का रवैया कतई बदलने को तैयार नहीं है। गौरासिंघनापुर गांव के रहने वाले राघेश्याम का 10 साल का बेटा शुक्रवार को घाघरा नदी में नहाते समय डूब गया था।
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 जिसकी शिकायत लेकर बाप खुद भंभुवा पुलिस चौकी गया और पुलिस से बच्चे को खोजने की मिन्नतें भी की। लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी और मामला बाराबंकी जनपद का बताकर इससे पल्ला झाड़ लिया। शनिवार को बच्चे का शव जब नदी मे उतराता दिखाई दिया तो ग्रामीणों ने उसे बाहर निकाला। 
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भंभुवा पुलिस चौकी क्षेत्र में एक गांव पड़ता है गौरासिंहनापुर। जहां रहने वाले राधेश्याम का 10 साल का बेटा अक्षय लाल शुक्रवार को अपने दोस्तों से साथ खेलते-खेलते घाघरा नदी के किनारे गया था। गांव के बच्चों के साथ अक्षय लाल नदी में नहाने लगा। तभी अचानक उसका पैर नदी में फिसल गया और वह डूबने लगा।
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गांव के बाकी बच्चों से जब इसकी सूचना राधेश्याम को लगी, तो वह दौड़ा-दौड़ा भंभुवा पुलिस चौकी पर पहुंचा और वहां पुलिसकर्मियों से पूरी बताई। लेकिन यहां की पुलिस घंटों बाद जब मौके पर पहुंची तो उसने बाराबंकी का मामला का बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और बच्चे को खोजने तक का कोई प्रयास नहीं किया। जिसके बाद पूरी रात परिवार के लोग घाघरा नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे बच्चे को खोजते रहे।

यहां तक कि नदी में नाव के सहारे भी बच्चे को खोजा गया। पर उसका कहीं कोई पता नहीं चला। शनिवार को बच्चे का शव नदी में उतराता देख ग्रामीणों ने जैसे ही बच्चे को नदी से बाहर निकाला। पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई।


इस बारे में सीओ सबीहुल हम्द से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में तो फिलहाल ऐसा कोई मामला नहीं आया है। लेकिन अगर भंभुवा पुलिस ने इस तरह की किसी मानवीय संवेदना को दरकिनार किया है तो यह वाकई में बेहद गंभीर प्रकरण है। जिसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्योंकि पुलिस का काम लोगो की मदद करना है। जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं है। 

 
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