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बालू मिट्टी खनन प्वाइंट पर एनजीटी के निर्देश पर संयुक्त टीम का छापा-
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एनजीटी की टीम का रेतवागाड़ा में छापा, पकड़ा अवैध खनन
गोंडा। बालू व मिट्टी के अवैध खनन को लेकर एक बार फिर जिला सुर्खियों में है। बालू व मिट्टी के अवैध खनन प्वाइंट पर शुक्रवार को एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व खनिकर्म विभाग की टीम ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ छापा मारा।
टीम ने कई स्थान पर खनन से बने गड्ढों की नाप की है। टीम ने पांच से छह मीटर तक गहराई तक खनन किया जाना पाया।
सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेतवागाड़ा निवासी सिया राम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली में शिकायत की थी कि गांव के पास खनन माफिया की ओर से पिछले एक दशक से फर्जी तरीके से बालू व मिट्टी का खनन किया जा रहा है।
खनन माफिया भाईयों ने मिलकर खनन वाले क्षेत्र को ऊसर बना दिया है जबकि इस इस अवैध तरीके से खनन किये बालू मिट्टी से गोंडा व बलरामपुर जिले में अपने कई संचालित ईंट भट्ठों में ईंट बना कर बेच डाला है।
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सियाराम की ओर से एनजीटी को शिकायत में बताया गया कि कई सरकारी गाटे की जमीन में माफिया ने खनन करने के साथ आसपास के इलाके को भी खनन कर करीब 50 फिट गहरा खंदक बना दिया है।
इस अवैध खनन से से जहां करोड़ा रुपये राजस्व की क्षति हुई वहीं पर्यावरण को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। यही नही आसपास गहरे गड्ढे से भूस्खलन से आसपास के गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
उसने साथ में यह भी शिकायत की वह इस अवैध खनन की पिछले पांच छह साल से शासन व जिला प्रशासन स्तर पर कई शिकायत कर चुका है सभी मामले में अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी रिपोर्ट लगा कर खनन माफिया को उसके राजनीकि रसूख के चलते बचाया जा रहा है।
इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंभीरता से लिया। एनजीटी के अध्यक्ष की ओर से इस मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के रीजनल आफीसर को खनिकर्म व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ मामले में छापेमारी कर जांच कर कार्रवाई करने के साथ रिपोर्ट तलब की थी।
एनजीटी के आदेश पर शुक्रवार को प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड फैजाबाद के रीजनल आफीसर स्वामी नाथ, एसडीएम सदर एसएन त्रिपाठी, खनिज एवं खनिक र्म विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम कुमार, खनन निरीक्षक राजेश कुमार धानेपुर पुलिस के साथ ग्राम रेतवागाड़ा के पास खनन स्थल पर छापा मारा।
मौके पर कोई खनन करने वाला नही मिला। टीम ने खनन किये गये स्थल की चौहद्दी देखी। कई स्थान पर टीम ने खनन से बने गड्ढों को नापा तो कहीं पांच तो कहीं पर छह मीटर की गहराई तक खनन किया जाना पाया गया। एनजीटी की ओर से गठित टीम खनन किये गये स्थल की शनिवार को व्यापक पैमाईश करेगी।
सदर तहसील के ग्राम रेतवागाड़ा गांव के पास अवैध तरीके से हुए बालू व मिट्टी के खनन से खनन माफिया ने दो जिलों में फैले अपने ईंट भट्ठों को कच्ची ईंट की खूब खुराक दी।
अवैध खनन के खुराक से उसके दो जिले में ईंट भट्ठे पिछले कई साल से धधक रहे हैं। अपने राजनीतिक रसूख के चलते पिछले पांच छह साल से होने वाले शिकायतों की जांच को दबवाता रहा।
शिकायतकर्ता सियाराम ने जिले में तहसील, कलेक्ट्रेट, मंडलायुक्त कार्यालय के अलावा प्रदेश स्तर पर मुख्य सचिव व खनन के विभाग के प्रमुख सचिव को कई बार शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई।
उच्चाधिकारियों की ओर से दिये गये निर्देश के क्रम में जांच अधिकारियों ने खनन माफियाओं से मिली भगत कर रिपोर्ट को देर से व गोलमोल प्रस्तुत किया जिससे आज तक कोई कार्रवाई नही हो सकी।
बताया जाता है कि अवैध खनन से खनन माफिया ने अब तक कई करोड़ रुपये की प्रापर्टी बना ली है। जांच अधिकारी हमेशा खनन माफिया के प्रभाव में रहे। इतना ही इस खनन पर क्षेत्रीय लेखपाल व पुलिस कर्मी पर्दा डालते रहे। तहसील व संबंधित थाने के अधिकारी भी इस पर उच्चाधिकारियों को भ्रमित करते रहे।
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गोंडा। बालू व मिट्टी के अवैध खनन को लेकर एक बार फिर जिला सुर्खियों में है। बालू व मिट्टी के अवैध खनन प्वाइंट पर शुक्रवार को एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व खनिकर्म विभाग की टीम ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ छापा मारा।
टीम ने कई स्थान पर खनन से बने गड्ढों की नाप की है। टीम ने पांच से छह मीटर तक गहराई तक खनन किया जाना पाया।
सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेतवागाड़ा निवासी सिया राम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली में शिकायत की थी कि गांव के पास खनन माफिया की ओर से पिछले एक दशक से फर्जी तरीके से बालू व मिट्टी का खनन किया जा रहा है।
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खनन माफिया भाईयों ने मिलकर खनन वाले क्षेत्र को ऊसर बना दिया है जबकि इस इस अवैध तरीके से खनन किये बालू मिट्टी से गोंडा व बलरामपुर जिले में अपने कई संचालित ईंट भट्ठों में ईंट बना कर बेच डाला है।
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सियाराम की ओर से एनजीटी को शिकायत में बताया गया कि कई सरकारी गाटे की जमीन में माफिया ने खनन करने के साथ आसपास के इलाके को भी खनन कर करीब 50 फिट गहरा खंदक बना दिया है।
इस अवैध खनन से से जहां करोड़ा रुपये राजस्व की क्षति हुई वहीं पर्यावरण को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। यही नही आसपास गहरे गड्ढे से भूस्खलन से आसपास के गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
उसने साथ में यह भी शिकायत की वह इस अवैध खनन की पिछले पांच छह साल से शासन व जिला प्रशासन स्तर पर कई शिकायत कर चुका है सभी मामले में अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी रिपोर्ट लगा कर खनन माफिया को उसके राजनीकि रसूख के चलते बचाया जा रहा है।
इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंभीरता से लिया। एनजीटी के अध्यक्ष की ओर से इस मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के रीजनल आफीसर को खनिकर्म व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ मामले में छापेमारी कर जांच कर कार्रवाई करने के साथ रिपोर्ट तलब की थी।
एनजीटी के आदेश पर शुक्रवार को प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड फैजाबाद के रीजनल आफीसर स्वामी नाथ, एसडीएम सदर एसएन त्रिपाठी, खनिज एवं खनिक र्म विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम कुमार, खनन निरीक्षक राजेश कुमार धानेपुर पुलिस के साथ ग्राम रेतवागाड़ा के पास खनन स्थल पर छापा मारा।
मौके पर कोई खनन करने वाला नही मिला। टीम ने खनन किये गये स्थल की चौहद्दी देखी। कई स्थान पर टीम ने खनन से बने गड्ढों को नापा तो कहीं पांच तो कहीं पर छह मीटर की गहराई तक खनन किया जाना पाया गया। एनजीटी की ओर से गठित टीम खनन किये गये स्थल की शनिवार को व्यापक पैमाईश करेगी।
सदर तहसील के ग्राम रेतवागाड़ा गांव के पास अवैध तरीके से हुए बालू व मिट्टी के खनन से खनन माफिया ने दो जिलों में फैले अपने ईंट भट्ठों को कच्ची ईंट की खूब खुराक दी।
अवैध खनन के खुराक से उसके दो जिले में ईंट भट्ठे पिछले कई साल से धधक रहे हैं। अपने राजनीतिक रसूख के चलते पिछले पांच छह साल से होने वाले शिकायतों की जांच को दबवाता रहा।
शिकायतकर्ता सियाराम ने जिले में तहसील, कलेक्ट्रेट, मंडलायुक्त कार्यालय के अलावा प्रदेश स्तर पर मुख्य सचिव व खनन के विभाग के प्रमुख सचिव को कई बार शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई।
उच्चाधिकारियों की ओर से दिये गये निर्देश के क्रम में जांच अधिकारियों ने खनन माफियाओं से मिली भगत कर रिपोर्ट को देर से व गोलमोल प्रस्तुत किया जिससे आज तक कोई कार्रवाई नही हो सकी।
बताया जाता है कि अवैध खनन से खनन माफिया ने अब तक कई करोड़ रुपये की प्रापर्टी बना ली है। जांच अधिकारी हमेशा खनन माफिया के प्रभाव में रहे। इतना ही इस खनन पर क्षेत्रीय लेखपाल व पुलिस कर्मी पर्दा डालते रहे। तहसील व संबंधित थाने के अधिकारी भी इस पर उच्चाधिकारियों को भ्रमित करते रहे।