{"_id":"597784894f1c1b1f698b456e","slug":"191501004937-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब रमवापुर में कटी नहर, किसानों की 200 बीघा फसल जलमग्न","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
ब रमवापुर में कटी नहर, किसानों की 200 बीघा फसल जलमग्न
Updated Tue, 25 Jul 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रमवापुर में कटी नहर, 200 बीघा फसल जलमग्न
अमर उजाला ब्यूरो
मंगुराबाजार (गोंडा)। सरयू नहर खंड प्रथम की करनैलगंज तरबगंज शाखा से रमवापुर गांव को होकर जाने वाली नहर सोमवार रात दो बजे के आसपास पानी छोड़े जाने से कट गई। बताया जाता है कि इस नहर से होकर एक चकरोड गांव को जाती है। जिसका उपयोग गांव के लोग रास्ते के तौर पर करते थे। काफी समय पहले जब नहर विभाग के लोग चकरोड को पाटने के लिए उसकी पटाई मिट्टी से कर रहे थे तो उस समय ग्रामीणों ने इसका विरोध यह कहते हुए किया था कि वह बजाए इसपर मिट्टी डालने के यहां एक पुलिया बना दें। जिससे कि उनके आवागमन की दिक्कत खत्म हो जाए। क्योंकि मिट्टी डालने से उनके आने-जाने में समस्या होगी। बावजूद इसके नहर विभाग ने उनकी इस समस्या को नजरंदाज कर दिया और बिना इसकी पुष्टि किए कि जिस नहर में वह पानी छोड़ रहे हैं उसका पानी कहां जाएगा। नहर में पानी भी छोड़ दिया। जिसका नतीजा हुआ कि नहर सोमवार रात कट गई। इससे यहां के रामानन्द पांडेय, उमेश चन्द्र पान्डेय, दिनेश चन्द्र पान्डेय, केदारनाथ पान्डेय, शिवकुमार शुक्ल, ऊधवराम शुक्ल, अजय शुक्ल, चन्द्र प्रताप पान्डेय आदि किसानों की दो सौ बीघे खेत में खड़ी फसल पानी-पानी हो गई। मंगलवार को नहर कटने की जानकारी होने पर नहर विभाग के अवर अभियंता कुछ लोगों को लेकर नहर बंधवाने आए। लेकिन देरशाम समाचार भेजे जाने तक नहर बांधी नहीं जा सकी। वहीं नहर से आने वाले पानी के फैलाव से किसानों के खेत पानी में डूबते जा रहे थे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मंगुराबाजार (गोंडा)। सरयू नहर खंड प्रथम की करनैलगंज तरबगंज शाखा से रमवापुर गांव को होकर जाने वाली नहर सोमवार रात दो बजे के आसपास पानी छोड़े जाने से कट गई। बताया जाता है कि इस नहर से होकर एक चकरोड गांव को जाती है। जिसका उपयोग गांव के लोग रास्ते के तौर पर करते थे। काफी समय पहले जब नहर विभाग के लोग चकरोड को पाटने के लिए उसकी पटाई मिट्टी से कर रहे थे तो उस समय ग्रामीणों ने इसका विरोध यह कहते हुए किया था कि वह बजाए इसपर मिट्टी डालने के यहां एक पुलिया बना दें। जिससे कि उनके आवागमन की दिक्कत खत्म हो जाए। क्योंकि मिट्टी डालने से उनके आने-जाने में समस्या होगी। बावजूद इसके नहर विभाग ने उनकी इस समस्या को नजरंदाज कर दिया और बिना इसकी पुष्टि किए कि जिस नहर में वह पानी छोड़ रहे हैं उसका पानी कहां जाएगा। नहर में पानी भी छोड़ दिया। जिसका नतीजा हुआ कि नहर सोमवार रात कट गई। इससे यहां के रामानन्द पांडेय, उमेश चन्द्र पान्डेय, दिनेश चन्द्र पान्डेय, केदारनाथ पान्डेय, शिवकुमार शुक्ल, ऊधवराम शुक्ल, अजय शुक्ल, चन्द्र प्रताप पान्डेय आदि किसानों की दो सौ बीघे खेत में खड़ी फसल पानी-पानी हो गई। मंगलवार को नहर कटने की जानकारी होने पर नहर विभाग के अवर अभियंता कुछ लोगों को लेकर नहर बंधवाने आए। लेकिन देरशाम समाचार भेजे जाने तक नहर बांधी नहीं जा सकी। वहीं नहर से आने वाले पानी के फैलाव से किसानों के खेत पानी में डूबते जा रहे थे।