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पट्टे की आंड़ में 3575 घनमीटर बालू का कर लिया अवैध खनन

Sun, 08 Jul 2018 10:32 PM IST
Updated Sun, 08 Jul 2018 10:32 PM IST
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पट्टे की आंड़ में 3575 घनमीटर बालू का कर लिया अवैध खनन
पट्टे की आड़ में 3575 घनमीटर बालू का अवैध खनन
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गोंडा। बालू खनन के लिए मिले पट्टे के स्थान के बदले दूसरी जगह करीब एक हजार ट्रॉली बालू का अवैध खनन कर डाला। मामले का खुलासा होने पर डीएम ने पट्टे को निरस्त कर दिया है।

तरबगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम तुलसीपुर माझा निवासी शिवाजी सिंह को ग्राम पूरे अम्बरपुर में गाटा संख्या 2511 व 2514 3.253 हेक्टेयर का पट्टा मिला था। उनके अवैध खनन करने की शिकायत कुछ लोगों ने प्रशासन से की थी। जांच में पाया गया कि दोनों जमीनों पर किसी प्रकार का खनन नहीं किया गया जबकि मौके पर करीब एक हजार ट्रॉली बालू डंप पाया गया।
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गांव में ही दूसरी जमीन पर अवैध बालू खनन कर डंप किया गया पाया। खनन निरीक्षक ने बताया कि बालू का अवैध खनन किया गया था। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की गई जिस पर डीएम ने पट्टाधारक का लाइसेंस निरस्त कर दिया।
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क्षेत्र में अवैध खनन की रोकथाम के लिए खान निरीक्षक राजेश कुमार ने क्षेत्र का भ्रमण कर खनन स्थलों का निरीक्षण किया। खनन के निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किये जाने के मामले में खान निरीक्षक ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी।

इस मामले में खान निरीक्षक राजेश कुमार का कहना है कि पट्टाधारक की ओर से निर्धारित स्थान से अलग अवैध बालू खनन किये जाने पर कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी कैप्टन प्रभांशु कुमार श्रीवास्तव ने पट्टाधारक का बालू भंडारण स्वीकृत लाइसेंस को निरस्त कर दिया है।

पुराने मामले में नहीं हुई कार्रवाई

पहले भी 2424 घनमीटर बालू का किया गया जा चुका है अवैध खनन
इसी गांव में करीब एक सप्ताह पहले 2424 घनमीटर अवैध बालू खनन का मामला प्रकाश में आ चुका है। मामले में डीएम ने कार्रवाई के लिए लिखा लेकिन अवैध खनन के इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है।

होता रहा अवैध खनन, प्रशासन देता रहा क्लीन चिट

जिले में अवैध खनन का मामला बहुत समय से चल रहा है। यहां तक तरबगंज क्षेत्र में ही चकरसूल में अवैध बालू खनन में प्रशासन को एनजीटी की फटकार मिल चुकी है और प्रशासन की ओर से अवैध खनन रोकने का प्रमाण पत्र भी दाखिल किया जाता रहा।


प्रशासन हर माह एनजीटी व सरकार को अवैध बालू खनन न होने का प्रमाण पत्र देता रहा पर अवैध खनन नहीं रुका। अब जब बरसात शुरू होते ही सभी लाइसेंस का कार्यकाल समाप्त हो गया तो अवैध खनन का खुलासा होने लगा। सवाल है कि प्रशासन किस आधार पर अवैध खनन न होने का प्रमाण पत्र जारी करता रहा।
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