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तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक सब फंसे
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फोटो-1-गोंडा स्थित सदर तहसील। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। राजस्व अफसरों पर आम लोगों की जमीनों के साथ ही उनकी अन्य समस्याओं के निराकरण की जिम्मेदारी है। राजस्व लेखपाल पूरी व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी है, लेकिन भ्रष्टाचार की शुरूआत भी लेखपाल ही शुरू करते हैं। चंद लेखपालों की हरकतों से पूरे विभाग को विपरीत स्थितियों का सामना करना पड़ता है। बात तहसील सदर की करें, तो यहां के तहसीलदार से लेकर कई लेखपाल जनता की अनदेखी के मामलों में फंसे हैं। तहसीलदार के विरुद्ध तो सीजेएम के यहां याचिका दाखिल कर एफआईआर की मांग तक की गई है। जिस पर सीजेएम ने एसडीएम से रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा व्यवस्था को प्रभावित करने वाले लेखपालों को एसडीएम ने चिह्नित कर नोटिस जारी किया है।
एसडीएम सदर की सख्ती से अफसरों के होश उड़े हैं। उन्होंने तहसीलदार के साथ ही सभी नायब तहसीलदारों को तहसील का कामकाज बेहतर ढंग से करने की हिदायत दी है साथ ही पूरी रिपोर्ट डीएम को भेजी है। यही नहीं लेखपालों से जुड़ी शिकायतें लगातार एसडीएम के पास पहुंच रहीं हैं, निर्देश के बाद भी कुछ लेखपालों में कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है। अब उन्हें नोटिस दिया गया है। इससे साफ है कि तहसील सदर की व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
दाखिल खारिज में हो रहा खेल
तहसील में अविवादित दाखिल खारिज के मामलों में बैकडेट में आदेश जारी करने और धन उगाही के मामलाें की गूंज है। बार संघ के पदाधिकारियों के सवाल पर तहसीलदार समेत नायब तहसीलदारों ने आगे से बैकडेट न होने का भरोसा दिया और धन उगाही पर कहा कि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो बताया जाए। इस तरह तहसील में चल रहे खेल से पर्दा उठा। यही नहीं सवाल ये भी उठा कि लेनदेन तय न होने पर फाइलों को बेवजह लेखपालों के पास भेज दिया जाता है या फिर लेखपालों की रिपोर्ट के इंतजार में फंसाए रखा जाता है। तहसीलदार ने भले ही इन सवालों में सुधार लाने का वायदा किया है, लेकिन अभी कई सालों से मामले लंबित ही चल रहे हैं। एसडीएम वीके सिंह ने कहा कि मामलों का निस्तारण कराया जा रहा है।
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अमलदरामद के लिए मांगे 20 हजार
तहसील के धनौली गांव के इंद्रपाल राजस्व परिषद के आदेश का अमलदरामद आदेश की अंकना के लिए सात दिसंबर 2021 से दौड़ रहे हैं। सुनवाई न होने पर सीजेएम के यहां तहसीलदार न्यायिक के विरुद्ध वाद दायर कर एफआईआर की मांग की है। उनका आरोप है कि आदेश का अंकना कराने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की गई है। रकम न दे पाने पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस पर सीजेएम ने डीएम से रिपोर्ट मांगी है। एसडीएम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
लेखपालों की कारस्तानी से जनता पस्त
तहसील सदर में लेखपालों की मनमानी बढ़ती जा रही है। तहसील के तिनोहना और मंगरवा के लेखपाल बृजेश कुमार श्रीवास्तव पर सरकारी भूमि पर धन उगाही कर आवास निर्माण कराने का आरोप हैं। एसडीएम ने नायब तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने बताया कि लेखपाल पहले सरकारी भूमि पर हो रहे निर्माण को रोकते हैं और खुद ही निर्णय लेकर निर्माण शुरू करा देते हैं। यही नहीं जाति, आय व निवास प्रमाणपत्र के आवेदनों पर रिपोर्ट लिखने के नाम पर आवास पर बुलाकर धन उगाही किए जाने का मामला सामने आया है। एसडीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। इसी तरह बेलभरिया के लेखपाल वीरेंद्र कुमार पर अतिक्रमण की रिपोर्ट न देने का आरोप है। कुरासी के लेखपाल संतोष कुमार शर्मा ने तो हद ही कर दी है, सरकारी भूमियों का चिन्हांकन ही नहीं किया। एसडीएम ने आशंका जताई कि इनके पास सरकारी अभिलेख भी सुरक्षित नहीं हैं। इसके साथ ही सेवा में रहने से राजकोष पर भार पड़ रहा है। उन्होंने वेतन रोकते हुए जवाब मांगा है। भटपी के लेखपाल विक्रमाजीत ही सरकारी कार्य में बाधा बने हैं, वह जनता के मामलों का निस्तारण तक नहीं करते। एसडीएम ने उनका भी वेतन रोका है, जवाब मांगा है। इस तरह पूरे तहसील के लेखपाल प्रशासन की निगाहों पर आ गए हैं, तहसीलदार से भी रिपोर्ट तलब की गई है। बताया जा रहा है कि कई लेखपाल तो क्षेत्र में जाते ही नहीं हैं।
कई लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। जवाब तलब किया गया है, बार संघ के पदाधिकारियों की शिकायतों का निस्तारण किया गया है। तहसील की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जो दोषी मिल रहा है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। विनोद कुमार सिंह, एसडीएम
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एसडीएम सदर की सख्ती से अफसरों के होश उड़े हैं। उन्होंने तहसीलदार के साथ ही सभी नायब तहसीलदारों को तहसील का कामकाज बेहतर ढंग से करने की हिदायत दी है साथ ही पूरी रिपोर्ट डीएम को भेजी है। यही नहीं लेखपालों से जुड़ी शिकायतें लगातार एसडीएम के पास पहुंच रहीं हैं, निर्देश के बाद भी कुछ लेखपालों में कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है। अब उन्हें नोटिस दिया गया है। इससे साफ है कि तहसील सदर की व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
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दाखिल खारिज में हो रहा खेल
तहसील में अविवादित दाखिल खारिज के मामलों में बैकडेट में आदेश जारी करने और धन उगाही के मामलाें की गूंज है। बार संघ के पदाधिकारियों के सवाल पर तहसीलदार समेत नायब तहसीलदारों ने आगे से बैकडेट न होने का भरोसा दिया और धन उगाही पर कहा कि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो बताया जाए। इस तरह तहसील में चल रहे खेल से पर्दा उठा। यही नहीं सवाल ये भी उठा कि लेनदेन तय न होने पर फाइलों को बेवजह लेखपालों के पास भेज दिया जाता है या फिर लेखपालों की रिपोर्ट के इंतजार में फंसाए रखा जाता है। तहसीलदार ने भले ही इन सवालों में सुधार लाने का वायदा किया है, लेकिन अभी कई सालों से मामले लंबित ही चल रहे हैं। एसडीएम वीके सिंह ने कहा कि मामलों का निस्तारण कराया जा रहा है।
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अमलदरामद के लिए मांगे 20 हजार
तहसील के धनौली गांव के इंद्रपाल राजस्व परिषद के आदेश का अमलदरामद आदेश की अंकना के लिए सात दिसंबर 2021 से दौड़ रहे हैं। सुनवाई न होने पर सीजेएम के यहां तहसीलदार न्यायिक के विरुद्ध वाद दायर कर एफआईआर की मांग की है। उनका आरोप है कि आदेश का अंकना कराने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की गई है। रकम न दे पाने पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस पर सीजेएम ने डीएम से रिपोर्ट मांगी है। एसडीएम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
लेखपालों की कारस्तानी से जनता पस्त
तहसील सदर में लेखपालों की मनमानी बढ़ती जा रही है। तहसील के तिनोहना और मंगरवा के लेखपाल बृजेश कुमार श्रीवास्तव पर सरकारी भूमि पर धन उगाही कर आवास निर्माण कराने का आरोप हैं। एसडीएम ने नायब तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने बताया कि लेखपाल पहले सरकारी भूमि पर हो रहे निर्माण को रोकते हैं और खुद ही निर्णय लेकर निर्माण शुरू करा देते हैं। यही नहीं जाति, आय व निवास प्रमाणपत्र के आवेदनों पर रिपोर्ट लिखने के नाम पर आवास पर बुलाकर धन उगाही किए जाने का मामला सामने आया है। एसडीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। इसी तरह बेलभरिया के लेखपाल वीरेंद्र कुमार पर अतिक्रमण की रिपोर्ट न देने का आरोप है। कुरासी के लेखपाल संतोष कुमार शर्मा ने तो हद ही कर दी है, सरकारी भूमियों का चिन्हांकन ही नहीं किया। एसडीएम ने आशंका जताई कि इनके पास सरकारी अभिलेख भी सुरक्षित नहीं हैं। इसके साथ ही सेवा में रहने से राजकोष पर भार पड़ रहा है। उन्होंने वेतन रोकते हुए जवाब मांगा है। भटपी के लेखपाल विक्रमाजीत ही सरकारी कार्य में बाधा बने हैं, वह जनता के मामलों का निस्तारण तक नहीं करते। एसडीएम ने उनका भी वेतन रोका है, जवाब मांगा है। इस तरह पूरे तहसील के लेखपाल प्रशासन की निगाहों पर आ गए हैं, तहसीलदार से भी रिपोर्ट तलब की गई है। बताया जा रहा है कि कई लेखपाल तो क्षेत्र में जाते ही नहीं हैं।
कई लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। जवाब तलब किया गया है, बार संघ के पदाधिकारियों की शिकायतों का निस्तारण किया गया है। तहसील की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जो दोषी मिल रहा है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। विनोद कुमार सिंह, एसडीएम