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Gonda News: ठंड में बच्चों के फेफड़ों में सूजन की परेशानी, पीआईसीयू फुल
Mon, 13 Jan 2025 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 13 Jan 2025 11:08 PM IST
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गोंडा। ठंड के कारण छोटे बच्चों में जकड़न व सांस लेने की दिक्कत भी बढ़ने लगी है। इसके चलते मेडिकल कॉलेज में बॉल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में इलाज के लिए हर 150 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 25 बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों में सूजन) की तकलीफ से पीड़ित मिल रहे हैं। ऐसे गंभीर बच्चों को इलाज के लिए भर्ती करने से पीआईसीयू वार्ड फुल हो गया है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि ठंड के दौरान एक साल की उम्र तक के बच्चों को ब्रोंकियोलाइटिस की तकलीफ अधिक होती है। इससे अधिक उम्र के बच्चे निमोनिया का शिकार होते हैं। एक साल से छोटे बच्चों में होने वाली ब्रोंकियोलाइटिस के दौरान सेंसटियल नाम का वायरस बच्चों के फेफड़ों में सूजन पैदा कर देता है। इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार समय पर उचित इलाज न मिल पाने से संक्रमित बच्चे की मौत तक हो जाती है।
बीमारी से बचाने के लिए बरते सावधानी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब ने बताया कि ठंड में बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए उनकी साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्हें ठंड से बचाने के साथ ही ताजा भोजन व शुद्ध पानी का ही सेवन कराना चाहिए। नवजात को छह माह तक मां का दूध देने के साथ ही बोतल से दूध पिलाने से बचना चाहिए। बोतल की जगह बच्चे को कटोरी चम्मच से दूध पिलाना चाहिए।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि ठंड के दौरान एक साल की उम्र तक के बच्चों को ब्रोंकियोलाइटिस की तकलीफ अधिक होती है। इससे अधिक उम्र के बच्चे निमोनिया का शिकार होते हैं। एक साल से छोटे बच्चों में होने वाली ब्रोंकियोलाइटिस के दौरान सेंसटियल नाम का वायरस बच्चों के फेफड़ों में सूजन पैदा कर देता है। इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार समय पर उचित इलाज न मिल पाने से संक्रमित बच्चे की मौत तक हो जाती है।
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बीमारी से बचाने के लिए बरते सावधानी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब ने बताया कि ठंड में बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए उनकी साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्हें ठंड से बचाने के साथ ही ताजा भोजन व शुद्ध पानी का ही सेवन कराना चाहिए। नवजात को छह माह तक मां का दूध देने के साथ ही बोतल से दूध पिलाने से बचना चाहिए। बोतल की जगह बच्चे को कटोरी चम्मच से दूध पिलाना चाहिए।
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