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Gonda News: दूध की गंदी बोतल से बीमार हो रहे बच्चे
Sat, 06 May 2023 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 06 May 2023 11:18 PM IST
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गोंडा। आधुनिक मां का बेपरवाही भरा प्यार दुधमुंहे बच्चों में बढ़ती बीमारी की वजह बन गया है। सप्ताह भर में मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में डायरिया व अन्य बीमारियों पीड़ित 73 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें से 55 केस में दूध की गंदी बोतल बच्चों की बीमारी का सबब बनी।
बरसात के बाद दिन में उमस भरी गर्मी व रात में ठंड से डायरिया का प्रकोप बढ़ गया है। शनिवार को जिला अस्पताल की विभिन्न ओपीडी में करीब 105 बच्चों का इलाज किया गया। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे उल्टी, दस्त और खांसी से ग्रसित थे। जिला अस्पताल सहित नर्सिंगहोम में भी मरीजों में सर्वाधिक संख्या बच्चों की है। यहां भी मरीजों की भीड़ लगी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड व पीआईसीयू कई दिन से बीमार बच्चों से भरा है। ओपीडी में आए गंभीर बच्चों को भर्ती किया जाता है तथा अन्य को दवा देकर घर भेज दिया जाता। यदि बच्चे को 24 घंटे में तीन से चार दस्त हों तो ध्यान रखें कि वह डायरिया का शिकार हो सकता है। ऐसे बच्चे को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। इसके साथ ही डॉक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए।
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पीआईसीयू के प्रभारी डॉ. आफताब आलम ने करीब एक माह में बीमार बच्चों की 100 से अधिक गंदी बोतलें जब्त की हैं। वह बोतल जमा कराने के बाद ही बच्चों को भर्ती करते हैं। उन्होंने बताया कि गंदी बोतल से दूध पिलाने के कारण बच्चा पेट के गंभीर संक्रमण का शिकार हो सकता है। डायरिया के संक्रमण का मूल कारण दूध की गंदी बोतल ही है।
एक वर्ष के बच्चे का वजन दस किलोग्राम होना चाहिए। एक साल के जो बच्चे सात से आठ किलोग्राम के हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं। बच्चे को ओआरएस घोल या दाल का पानी पिलाते रहें। नमक और चीनी का घोल बनाकर दे सकते हैं। डायरिया में बच्चों को दूध बिल्कुल न पिलाएं।
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बरसात के बाद दिन में उमस भरी गर्मी व रात में ठंड से डायरिया का प्रकोप बढ़ गया है। शनिवार को जिला अस्पताल की विभिन्न ओपीडी में करीब 105 बच्चों का इलाज किया गया। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे उल्टी, दस्त और खांसी से ग्रसित थे। जिला अस्पताल सहित नर्सिंगहोम में भी मरीजों में सर्वाधिक संख्या बच्चों की है। यहां भी मरीजों की भीड़ लगी है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि चिल्ड्रेन वार्ड व पीआईसीयू कई दिन से बीमार बच्चों से भरा है। ओपीडी में आए गंभीर बच्चों को भर्ती किया जाता है तथा अन्य को दवा देकर घर भेज दिया जाता। यदि बच्चे को 24 घंटे में तीन से चार दस्त हों तो ध्यान रखें कि वह डायरिया का शिकार हो सकता है। ऐसे बच्चे को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। इसके साथ ही डॉक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए।
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पीआईसीयू के प्रभारी डॉ. आफताब आलम ने करीब एक माह में बीमार बच्चों की 100 से अधिक गंदी बोतलें जब्त की हैं। वह बोतल जमा कराने के बाद ही बच्चों को भर्ती करते हैं। उन्होंने बताया कि गंदी बोतल से दूध पिलाने के कारण बच्चा पेट के गंभीर संक्रमण का शिकार हो सकता है। डायरिया के संक्रमण का मूल कारण दूध की गंदी बोतल ही है।
एक वर्ष के बच्चे का वजन दस किलोग्राम होना चाहिए। एक साल के जो बच्चे सात से आठ किलोग्राम के हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं। बच्चे को ओआरएस घोल या दाल का पानी पिलाते रहें। नमक और चीनी का घोल बनाकर दे सकते हैं। डायरिया में बच्चों को दूध बिल्कुल न पिलाएं।