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स्कूली बच्चों की पढ़ाई के साथ सेहत भी सुधरेगी
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गोंडा। बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य पर जोर रहेगा। जिले के 2611 स्कूलों में पढ़ने वाले करीब चार लाख दस हजार बच्चों की सेहत को सुधारने की मुहिम चलेगी। स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच कराने की तैयारी हो रही है। इसके आधार पर ही सभी का हेल्थ कार्ड तैयार होगा। साथ ही उन्हें पोषण युक्त बेहतर आहार भी दिया जाएगा। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर एमडीएम के मेन्यू में बदलाव की तैयारी भी है।
विभाग में चल रही कवायद में मिड-डे मील में स्थानीय स्तर पर मौजूद मोटे अनाज को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, सावा, कुट्टू आदि शामिल हैं। इसके साथ स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली दाल या सब्जियों को भी शामिल करने की तैयारी हो रही है। ऐसी तैयारी हो रही है कि बच्चों को जो भी खाने को दिया जाए, वह पूरी तरह से पोषण युक्त हो। एमडीएम में बदलाव के लिए राज्य स्तर से निर्णय होने है। प्रदेश के कुछ जिलों में व्यवस्था को लागू किया गया। जिले में निर्देश आने पर ही लागू किया जाएगा। फिलहाल कई मेन्यू में बदलाव होने से बच्चों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था में भी परिवर्तन होगा।
बच्चों के हेल्थ कार्ड तैयार करने पर होगा जोर
बेसिक शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कई बदलाव होने जा रहे हैं। स्कूली बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाने की तैयारी हो रही। पहले भी बाल स्वास्थ्य आशीर्वाद गारंटी योजना से बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने और हेल्थ कार्ड बनाने की व्यवस्था थी। चिकित्सकों की ओर से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण तो हुआ लेकिन हेल्थ कार्ड बनाने की योजना को गंभीरता से नहीं लिया गया। नए शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में हेल्थ कार्ड की व्यवस्था को लागू होनी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की चौथी रिपोर्ट में यह बात सामने आ चुकी है कि पांच वर्ष की उम्र के करीब 38 फीसद बच्चे कुपोषण के चलते बौनापन और करीब 59 फीसद बच्चे खून की कमी से पीड़ित हैं। इससे बच्चों की सेहत पर जोर दिया जा रहा है।
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आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए चल रही है पोषण योजना
बेसिक स्कूलों में एमडीएम देने की योजना ही शामिल है लेकिन आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए पोषण योजना भी चल रही है। उन्हें पोषणयुक्त सामग्री देने के लिए केंद्रों पर अभियान चलाया जा रहा है। अब परिषदीय स्कूलों के बच्चों को भी पोषणयुक्त एमडीएम देने की पहल शुरू करने की तैयारी हो रही है।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत का पूरा ध्यान रखा जाता है। समय- समय पर स्वास्थ्य टीमें परीक्षण करती हैं। शासन के निर्देश पर योजनाओं को लागू किया जाएगा। - जय प्रताप सिंह, बीएसए
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विभाग में चल रही कवायद में मिड-डे मील में स्थानीय स्तर पर मौजूद मोटे अनाज को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, सावा, कुट्टू आदि शामिल हैं। इसके साथ स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली दाल या सब्जियों को भी शामिल करने की तैयारी हो रही है। ऐसी तैयारी हो रही है कि बच्चों को जो भी खाने को दिया जाए, वह पूरी तरह से पोषण युक्त हो। एमडीएम में बदलाव के लिए राज्य स्तर से निर्णय होने है। प्रदेश के कुछ जिलों में व्यवस्था को लागू किया गया। जिले में निर्देश आने पर ही लागू किया जाएगा। फिलहाल कई मेन्यू में बदलाव होने से बच्चों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था में भी परिवर्तन होगा।
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बच्चों के हेल्थ कार्ड तैयार करने पर होगा जोर
बेसिक शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कई बदलाव होने जा रहे हैं। स्कूली बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाने की तैयारी हो रही। पहले भी बाल स्वास्थ्य आशीर्वाद गारंटी योजना से बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने और हेल्थ कार्ड बनाने की व्यवस्था थी। चिकित्सकों की ओर से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण तो हुआ लेकिन हेल्थ कार्ड बनाने की योजना को गंभीरता से नहीं लिया गया। नए शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में हेल्थ कार्ड की व्यवस्था को लागू होनी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की चौथी रिपोर्ट में यह बात सामने आ चुकी है कि पांच वर्ष की उम्र के करीब 38 फीसद बच्चे कुपोषण के चलते बौनापन और करीब 59 फीसद बच्चे खून की कमी से पीड़ित हैं। इससे बच्चों की सेहत पर जोर दिया जा रहा है।
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आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए चल रही है पोषण योजना
बेसिक स्कूलों में एमडीएम देने की योजना ही शामिल है लेकिन आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए पोषण योजना भी चल रही है। उन्हें पोषणयुक्त सामग्री देने के लिए केंद्रों पर अभियान चलाया जा रहा है। अब परिषदीय स्कूलों के बच्चों को भी पोषणयुक्त एमडीएम देने की पहल शुरू करने की तैयारी हो रही है।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत का पूरा ध्यान रखा जाता है। समय- समय पर स्वास्थ्य टीमें परीक्षण करती हैं। शासन के निर्देश पर योजनाओं को लागू किया जाएगा। - जय प्रताप सिंह, बीएसए