फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Child,gonda,cmo,Problem,medicin

सेहत के लिए मिलीं 30 दवाएं, बांटीं सिर्फ तीन

Thu, 29 Sep 2022 12:16 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 12:16 AM IST
विज्ञापन
Child,gonda,cmo,Problem,medicin
फोटो-10 गोंडा के मनकापुर में बच्चों की सेहत का जांच करते अपर निदेशक। -संवाद फाइल फोटो - फोटो : GONDA
गोंडा। विद्यालयों में पढ़ने वाले 18 साल तक की उम्र के बच्चों व किशोरों की सेहत संवारने के लिए संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही। कागजों पर वाहनों को दौड़ा कर 2.21 करोड़ के भुगतान के बाद अब स्कूली बच्चों की सेहत सुधारने के नाम पर खरीदी गयी दवा खरीद में घालमेल सामने आया है। महालेखा परीक्षक (एजी) की आडिट रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि सरकारी स्कूलों के साथ ही मदरसों और संस्कृत स्कूलों के आठ लाख विद्यार्थियों को वितरित करने के लिए 30 तरह की दवाओं में से सिर्फ तीन तरह की दवाओं का वितरण ही छात्र-छात्राओं को किया गया। इसके साथ ही योजना से जुड़े मानकों के अनुपालन में भी अनदेखी बरती गई है। रिपोर्ट में नियोजित तरह से वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताते हुए पूरे मामले की गहन जांच की बात भी कही गई है।
विज्ञापन

अभिलेखीय दस्तावेजों की जांच पड़ताल के बाद तैयार ऑडिट रिर्पोट में सामने आया कि योजना के तहत स्कूली बच्चों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए वितरित की जाने वाली 30 जरुरी दवाओं में सिर्फ तीन दवाएं ही वितरित कर खानापूर्ति कर दी गई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी तथा सहायता प्राप्त स्कूलों मेें पढ़ने वाले करीब आठ लाख विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कर उनमें मिलने वाली बीमारी की दवाएं मुफ्त देने का प्रावधान है। इस योजना पर खर्च के लिए विभाग को कई लाख का बजट मिलता है। मोबाइल स्वास्थ्य टीमें बच्चों की सेहत जांचने के लिए विद्यालय तो पहुंची लेकिन उनके पास बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए दी जाने वाली जरूरी दवाओं की उपलब्धता नहीं मिली।
विज्ञापन

रिपोर्ट में सामने आया कि योजना के तहत जरूरी दवाओं की पूरी खरीद न होने से छात्रों की सेहत जांचने पहुंची टीमों के 30 के सापेक्ष मात्र 3 दवाएं ही वितरण को उपलब्ध रही। आईएमएनसीआई के गाइड लाइन के अनुसार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के मोबाइल हेल्थ टीमों के पास बच्चों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए 30 प्रकार की दवाएं होना जरूरी है। एजी विभाग की ऑडिट टीम को जांच में मोबाइल टीमों के पास बांटने के लिए सिर्फ आयरन, फोलिक ऐसिड तथा विटामिन ए की गोली ही स्टॉक में मिली। सीएचसी बेलसर, मुजेहना तथा तरबगंज में उपलब्ध अभिलेखों की जांच में पाया गया कि यहां मात्र आयरन तथा फोलिक एसिड टैबलेट को छोड़कर किसी भी अन्य दवा का वितरण बच्चों को नहीं किया गया। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि जिम्मेदारों ने उक्त तीन दवाओं को छोड़कर सूची में शामिल बाकी अन्य दवाओं की कागजी खरीददारी कर लाखों रुपये का बंदरबांट कर जेब भरी है। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

तीन दवाओं से ही 32 बीमारियों का इलाज !
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में 16 स्वास्थ्य टीमों को सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों व मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में 32 तरह की बीमारियों की स्क्रीनिंग करनी होती है। इसमें मुख्य रुप में ऊंचाई, भार, हृदयरोग, कान रोग, नेत्र रोग,दांत रोग, शारीरिक विकृति, जन्मजात रोगों समेत अन्य गंभीर रोगों की जांच की जानी होती है। सामान्य बीमारी से पीड़ित बच्चों को मौके पर ही इलाज के लिए जरूरी दवाएं वितरित करानी होती है जबकि गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को बड़े अस्पतालों में भर्ती करा कर इलाज कराया जाता है। मोबाइल टीमों की ओर से तीन दवाओं के सहारे 32 बीमारियों के इलाज की दवा कैसे उपलब्ध करा दी गयी, इसका जवाब देने से अब विभाग के जिम्मेदार बच रहे हैं।

एसीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा बस इतना कह कर चुप्पी साध लेती है कि संबंधित वित्तीय वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं हुई है। ऑडिट रिपोर्ट में उजागर गड़बड़ी सामने आने पर ही इससे संबंधित जिम्मेदारों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed