{"_id":"5d767ec28ebc3e93dc47e6bf","slug":"campaign-for-greenery-dies-due-to-lack-of-care-gonda-news-lko4807386165","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाली तो आई नहीं, सूख गए एक लाख पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाली तो आई नहीं, सूख गए एक लाख पौधे
विज्ञापन
गोंडा के बेलसर-शुक्लगंज मार्ग पर पौध रोपण के लिए गए पौधे सूखे।
- फोटो : GONDA
गोंडा। पौधरोपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाने में हुए खेल अब उजागर हो रहे हैं। सड़कों व खाली पड़ी जमीनों पर 15 अगस्त से अभियान चलाकर पौध रोपण करना था। इसके लिए जिले में 43 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया था। अब पौधरोपण को लेकर हुए खेल सामने आ रहे हैं। अकेले तरबगंज क्षेत्र में ही आधा दर्जन सड़कों व खाली जमीनों पर पौधे तो भेजे गए लेकिन वे लगाए नहीं गए। तरबगंज क्षेत्र में 12 हजार पौधे पड़े-पड़े सूख गए हैं और पूरे जिले में एक लाख से अधिक पौधे सूख चुके हैं। अब शिकायत शासन से हुई तो वन विभाग को होश आया है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में पौधे पूरी तरह नहीं लग पाए हैं। वन विभाग जांच कराने की बात कह रहा है और दावा करता है कि 15 सितंबर तक सूखे पौधों को बदलकर नए लगवाए जाएंगे। पौधरोपण के स्थिति की शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर हुई और जांच शुरू हो गई है।
जिले के 1054 गांवों के साथ ही 3140 परिषदीय स्कूलों में पौधरोपण कराकर रिकॉर्ड बनाने में जिले ने भी प्रतिभाग किया। हाल ही में एक सामाजिक कार्यकर्ता की पड़ताल में खुलासा हुआ कि बड़े पैमाने पर पौधे पड़े-पड़े ही सूख गए, उनका रोपण ही नहीं किया गया है। 43 लाख के करीब पौधों को रोपने के अभियान में तो एक लाख से अधिक पौधे या तो लगे नहीं या अभी भी पौधे पड़े-पड़े सूख चुके हैं। तरबगंज क्षेत्र में ही 12 हजार से अधिक पौधे पड़े सूखते मिले। स्थिति यह है कि अब यह पौधे लगाए ही नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा कई विभागों ने सिर्फ खानापूर्ति ही की है। वन विभाग के जिम्मेदारों ने अभी पौधों की गणना ही नहीं किया है उनका कहना है कि साल में दो बार पौधों की गिनती की जाती है अभी 15 सितंबर तक जहां पौधे सूख गए हैं वहां नए पौधे लगाए जाएंगे। सवाल यह भी है कि जिन्होंने रिपोर्टिंग भी कर दी है और पौधे नहीं लगाए हैं वहां के बारे में सही स्थिति दिसंबर में गिनती के बाद होगी। फिर से उन विभागों को पेड़ लगवाने पड़ेंगे। फिलहाल पौधरोपण अभियान में कई स्तर पर मनमानी हुई है।
तरबगंज क्षेत्र में पौधरोपण की यह है स्थिति
तरबगंज क्षेत्र में पौधरोपण में हुए खेल की शिकायत धनश्याम जायसवाल ने की और शासन से जांच भी हुई। बेलसर के शुकुलगंज से गंगरौली मार्ग पर 5500 पौधे लगने थे, लेकिन 2500 ही लगाए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा पकवानगांव से बडनापुर मार्ग तक 5500 से पौधों में 2000 पौधे ही लगे हैं। तरबगंज ब्लाक के नरायनपुर गांव में 2000 पौधे तो खेत में पड़े-पड़े ही सूख गए। बौरिहा में भी 5500 पौधे सूखे पड़े हैं। अकबरपुर में 4000 हजार पौधों के स्थान पर 2500 से ही लगाए गए। सिंगहाचंदा के खालेदुबरा में फलदार पेड़ के स्थान पर कटीले पौधे लगा दिए गए हैं। पकड़ी- अमदही मार्ग पर 5500 पौधों में 2200 पौधे और तरबगंज से करनैलगंज मार्ग पर 5500 पौधों में 3000 पौधे ही लगाए गए हैं। इस तरह पौधों को लगाने में ही कंजूसी की गई है।
विज्ञापन
श्रमिकों को नहीं मिली मजदूरी तो बंद कर दिया काम
पौधरोपण के लिए लगाए गए श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं मिला। इससे मजदूरों ने पौधे लगाने का काम ही बंद कर दिया है। पौधरोपण के कार्य में लगे मजदूरों बालेंद्र, पूजाराम, बच्चाराम, जुगुनराम, रविशंकर, शिवशंकर, राम जियावन का कहना है कि उन्हें मजदूरी ही नहीं दी गई है। पौधों को लगाने के लिए कैसे काम करें। पौधों के देखरेख के लिए कोई निर्देश नहीं मिला है। इसके अलावा कोई समस्या भी नहीं पूंछ रहा है।
पौधरोपण के लिए तय किए लक्ष्य को पूरा किया गया है। 15 सितंबर तक सूखे पौधों को बदलने का कार्य होगा। इसके अलावा पौधों की गिनती दिसंबर माह में होगी। इसके बाद ही स्थिति तय होगी। फिर सुधार होगा और फिर मई में पौधों की गिनती कराई जाएगी। पौधरोपण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -आरके तिवारी, डीएफओ
विज्ञापन
जिले के 1054 गांवों के साथ ही 3140 परिषदीय स्कूलों में पौधरोपण कराकर रिकॉर्ड बनाने में जिले ने भी प्रतिभाग किया। हाल ही में एक सामाजिक कार्यकर्ता की पड़ताल में खुलासा हुआ कि बड़े पैमाने पर पौधे पड़े-पड़े ही सूख गए, उनका रोपण ही नहीं किया गया है। 43 लाख के करीब पौधों को रोपने के अभियान में तो एक लाख से अधिक पौधे या तो लगे नहीं या अभी भी पौधे पड़े-पड़े सूख चुके हैं। तरबगंज क्षेत्र में ही 12 हजार से अधिक पौधे पड़े सूखते मिले। स्थिति यह है कि अब यह पौधे लगाए ही नहीं जा सकते हैं। इसके अलावा कई विभागों ने सिर्फ खानापूर्ति ही की है। वन विभाग के जिम्मेदारों ने अभी पौधों की गणना ही नहीं किया है उनका कहना है कि साल में दो बार पौधों की गिनती की जाती है अभी 15 सितंबर तक जहां पौधे सूख गए हैं वहां नए पौधे लगाए जाएंगे। सवाल यह भी है कि जिन्होंने रिपोर्टिंग भी कर दी है और पौधे नहीं लगाए हैं वहां के बारे में सही स्थिति दिसंबर में गिनती के बाद होगी। फिर से उन विभागों को पेड़ लगवाने पड़ेंगे। फिलहाल पौधरोपण अभियान में कई स्तर पर मनमानी हुई है।
विज्ञापन
तरबगंज क्षेत्र में पौधरोपण की यह है स्थिति
तरबगंज क्षेत्र में पौधरोपण में हुए खेल की शिकायत धनश्याम जायसवाल ने की और शासन से जांच भी हुई। बेलसर के शुकुलगंज से गंगरौली मार्ग पर 5500 पौधे लगने थे, लेकिन 2500 ही लगाए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा पकवानगांव से बडनापुर मार्ग तक 5500 से पौधों में 2000 पौधे ही लगे हैं। तरबगंज ब्लाक के नरायनपुर गांव में 2000 पौधे तो खेत में पड़े-पड़े ही सूख गए। बौरिहा में भी 5500 पौधे सूखे पड़े हैं। अकबरपुर में 4000 हजार पौधों के स्थान पर 2500 से ही लगाए गए। सिंगहाचंदा के खालेदुबरा में फलदार पेड़ के स्थान पर कटीले पौधे लगा दिए गए हैं। पकड़ी- अमदही मार्ग पर 5500 पौधों में 2200 पौधे और तरबगंज से करनैलगंज मार्ग पर 5500 पौधों में 3000 पौधे ही लगाए गए हैं। इस तरह पौधों को लगाने में ही कंजूसी की गई है।
विज्ञापन
श्रमिकों को नहीं मिली मजदूरी तो बंद कर दिया काम
पौधरोपण के लिए लगाए गए श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं मिला। इससे मजदूरों ने पौधे लगाने का काम ही बंद कर दिया है। पौधरोपण के कार्य में लगे मजदूरों बालेंद्र, पूजाराम, बच्चाराम, जुगुनराम, रविशंकर, शिवशंकर, राम जियावन का कहना है कि उन्हें मजदूरी ही नहीं दी गई है। पौधों को लगाने के लिए कैसे काम करें। पौधों के देखरेख के लिए कोई निर्देश नहीं मिला है। इसके अलावा कोई समस्या भी नहीं पूंछ रहा है।
पौधरोपण के लिए तय किए लक्ष्य को पूरा किया गया है। 15 सितंबर तक सूखे पौधों को बदलने का कार्य होगा। इसके अलावा पौधों की गिनती दिसंबर माह में होगी। इसके बाद ही स्थिति तय होगी। फिर सुधार होगा और फिर मई में पौधों की गिनती कराई जाएगी। पौधरोपण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -आरके तिवारी, डीएफओ