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अटल के सहयोगी डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी का निधन
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2015 10:53 PM IST
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खास सहयोगी रहे डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 84 साल के डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्होंने अपने पैतृक गांव सोनवरसा में आखिरी सांस ली।
डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी को वर्ष 1962 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गोंडा पूर्वी सीट से विधानसभा का टिकट दिलवाकर चुनाव लड़ाया था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस के बाबू ईश्वरशरण के सामने हार का मुंह देखना पड़ा।
20 जून 1931 को सोनवरसा गांव में रहने वाले जगन्नाथ चौधरी के घर में जन्मे डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी ने प्रारम्भिक शिक्षा गांव में पूरी की और यहां से होम्योपैथ की पढ़ाई के लिए बाहर चले गए।
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होम्योपैथ के डॉक्टर बनने के बाद अपने गांव सोनवरसा लौटे डॉ. चतुर्धनलाल चौधरी ने धानेपुर बाजार में क्लीनिक खोल लिया। सामाजिक कार्यों में रुचि के साथ वह शुरू से ही आरएसएस के समर्थक भी थे। इसलिए जल्द ही उनका जुड़ाव पंडित दीनदयाल से हो गया और वह जनसंघ में शामिल हो गए।
1957 में जब पं. दीनदयाल ने अटल बिहारी बाजपेयी को बलरामपुर से चुनाव लड़ने के लिए भेजा तो यहां उनकी मुलाकात डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी से हुई।
इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के हर कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए वह उनके इतने करीब आ गए कि 1962 के विधानसभा चुनाव में अटल जी ने उन्हें गोंडा पूर्वी सीट से टिकट दिलवाकर जनसंघ का प्रत्याशी बना दिया।
1989 में संघ के तहसील संघ प्रमुख रहने के दौरान डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी ने लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की धानेपुर बाजार में अगुवाई की और 1992 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में उन्होंने उजैनीकला क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा, जिसमें उनकी जीत हुई।
1998 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. चतुर्धनलाल चौधरी को गोंडा जिले से दूरसंचार सलाहकार के सदस्य के रूप मे नामित किया।
वहीं 2002 में डॉ. चतुर्धनलाल चौधरी होम्योपैथिक एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष भी रहे। चार भाइयों के परिवार में डॉ. चतुर्धन सबसे बड़े थे।
उनके भतीजे कमलचंद चौधरी ने उन्हें मुखाग्नि दी। वहीं, डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी के निधन पर बुद्धिजीवियों ने शोक जताया है।
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डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी को वर्ष 1962 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गोंडा पूर्वी सीट से विधानसभा का टिकट दिलवाकर चुनाव लड़ाया था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस के बाबू ईश्वरशरण के सामने हार का मुंह देखना पड़ा।
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20 जून 1931 को सोनवरसा गांव में रहने वाले जगन्नाथ चौधरी के घर में जन्मे डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी ने प्रारम्भिक शिक्षा गांव में पूरी की और यहां से होम्योपैथ की पढ़ाई के लिए बाहर चले गए।
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होम्योपैथ के डॉक्टर बनने के बाद अपने गांव सोनवरसा लौटे डॉ. चतुर्धनलाल चौधरी ने धानेपुर बाजार में क्लीनिक खोल लिया। सामाजिक कार्यों में रुचि के साथ वह शुरू से ही आरएसएस के समर्थक भी थे। इसलिए जल्द ही उनका जुड़ाव पंडित दीनदयाल से हो गया और वह जनसंघ में शामिल हो गए।
1957 में जब पं. दीनदयाल ने अटल बिहारी बाजपेयी को बलरामपुर से चुनाव लड़ने के लिए भेजा तो यहां उनकी मुलाकात डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी से हुई।
इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के हर कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए वह उनके इतने करीब आ गए कि 1962 के विधानसभा चुनाव में अटल जी ने उन्हें गोंडा पूर्वी सीट से टिकट दिलवाकर जनसंघ का प्रत्याशी बना दिया।
1989 में संघ के तहसील संघ प्रमुख रहने के दौरान डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी ने लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की धानेपुर बाजार में अगुवाई की और 1992 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में उन्होंने उजैनीकला क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा, जिसमें उनकी जीत हुई।
1998 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. चतुर्धनलाल चौधरी को गोंडा जिले से दूरसंचार सलाहकार के सदस्य के रूप मे नामित किया।
वहीं 2002 में डॉ. चतुर्धनलाल चौधरी होम्योपैथिक एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष भी रहे। चार भाइयों के परिवार में डॉ. चतुर्धन सबसे बड़े थे।
उनके भतीजे कमलचंद चौधरी ने उन्हें मुखाग्नि दी। वहीं, डॉ. चतुर्धन लाल चौधरी के निधन पर बुद्धिजीवियों ने शोक जताया है।