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Gonda News: मेहनत व सूझबूझ से आत्मनिर्भर बनीं अंजलि
Fri, 18 Jul 2025 11:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 18 Jul 2025 11:55 PM IST
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अंजलि मौर्य।
गोंडा। ब्यूटी पार्लर व सिलाई सेंटर का संचालन कर आत्मनिर्भर बनीं अंजलि अब अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। घर की चारदीवारी से निकलकर अंजलि ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर ये मुकाम हासिल किया है।
माझा तरहर के कलंदरपुर निवासी अंजलि मौर्य के पति विजय प्रकाश मौर्य दूसरे से बंटाई पर खेत लेकर सब्जी उगाते थे। इस काम में इतनी कम आमदनी होती थी कि घर चलाना मुश्किल हो रहा था। दो बच्चों सहित पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। तभी अंजलि ने कामकाज करके परिवार चलाने में पति का साथ देने का फैसला लिया।
वर्ष 2023 में जय गंगे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सिलाई सेंटर का संचालन शुरू किया। इसके बाद अपनी मौसी के पास रहकर ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण लिया। स्वयं सहायता समूह से 1.10 लाख रुपये ऋण प्राप्त किया। 10 हजार रुपये अपनी जमा पूंजी भी लगाकर कुल एक लाख 20 हजार रुपये से उद्यम को विस्तार दिया। अंजलि ने जरूरी मशीनें, कॉस्मेटिक उत्पाद, हेयर और स्किन केयर सामग्री से ब्यूटी पार्लर शुरू किया। वहीं, सिलाई सेंटर में लेडीज गारमेंट्स, फैब्रिक्स, ड्रेस मटीरियल और रेडीमेड कपड़ों का भी स्टॉक बढ़ाया। यह बदलाव उनके उद्यम के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। मुश्किलों से जूझने के बाद अब वह हर साल चार से पांच लाख रुपये तक कमा रही हैं।
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माझा तरहर के कलंदरपुर निवासी अंजलि मौर्य के पति विजय प्रकाश मौर्य दूसरे से बंटाई पर खेत लेकर सब्जी उगाते थे। इस काम में इतनी कम आमदनी होती थी कि घर चलाना मुश्किल हो रहा था। दो बच्चों सहित पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। तभी अंजलि ने कामकाज करके परिवार चलाने में पति का साथ देने का फैसला लिया।
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वर्ष 2023 में जय गंगे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सिलाई सेंटर का संचालन शुरू किया। इसके बाद अपनी मौसी के पास रहकर ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण लिया। स्वयं सहायता समूह से 1.10 लाख रुपये ऋण प्राप्त किया। 10 हजार रुपये अपनी जमा पूंजी भी लगाकर कुल एक लाख 20 हजार रुपये से उद्यम को विस्तार दिया। अंजलि ने जरूरी मशीनें, कॉस्मेटिक उत्पाद, हेयर और स्किन केयर सामग्री से ब्यूटी पार्लर शुरू किया। वहीं, सिलाई सेंटर में लेडीज गारमेंट्स, फैब्रिक्स, ड्रेस मटीरियल और रेडीमेड कपड़ों का भी स्टॉक बढ़ाया। यह बदलाव उनके उद्यम के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। मुश्किलों से जूझने के बाद अब वह हर साल चार से पांच लाख रुपये तक कमा रही हैं।
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