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10 सरकारी अस्पतालों पर प्रशासन की छापेमारी, 18 का वेतन रोका
amar ujala
Updated Sat, 08 Apr 2017 11:07 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग में तैनात डाक्टर व अन्य स्टाफ अपनी जिम्मेदारियों के प्रति किस कदर बेपरवाह हो गए हैं, इसका अंदाजा शनिवार को प्रशासनिक छापेमारी से लगाई जा सकती है। जिसमें एक, दो नहीं बल्कि पूरे 18 कर्मचारी अपनी ड्यूटी से गायब मिले।
यह हाल तो जिले के 18 बड़े सरकारी अस्पतालों का है। वहीं इनसे ज्यादा खराब हालत तो उन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की है, जहां कभी कोई अधिकारी न तो छापेमारी के लिए जाता है। न ही वहां संचालित व्यवस्थाओं की पड़ताल के लिए। बहरहाल शनिवार को प्रशासनिक छापेमारी में जो 18 स्वास्थ्यकर्मी गायब मिले हैं, उनका जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने वेतन रोकते हुए सभी को कारण बताओ नोटिस जारी की है।
वहीं जिला अस्पताल से गायब मिले सीएमएस के अलावा प्रभारी अधीक्षक हलधरमऊ से भी उन्होंने लिखित जवाब मांगा है। सरकारी अस्पतालों से मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने के लिए शनिवार को जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन के निर्देश पर जहां मुख्य विकास अधिकारी जयन्त कुमार दीक्षित व डीडीओ ने जिला महिला अस्पतालए में छापेमारी की तो वहीं एसडीएम अर्चना वर्मा के साथ सीआरओ ने जिला पुरुष अस्पताल में।
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जबकि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष कुमार व तहसीलदार सदर रामनारायण वर्मा ने सीएचसी पंडरीकृपाल, एसडीएम मनकापुर अमरेश ने सीएचसी मनकापुर, अपर उपजिलाधिकारी ने सीएचसी झंझरी, एसडीएम करनैलगंज हरिशंकर लाल शुक्ल ने सीएचसी परसपुर तो नगर मजिस्ट्रेट जगदीश सिंह ने सीएचसी हलधरमऊ और अपर उपजिलाधिकारी नन्हेलाल यादव ने सीएचसी बेलसर का औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण में महिला अस्पताल के 6 कर्मचारी, सीएचसी बेलसर मेंसात कर्मचारी तो सीएचसी झंझरी में पांच कर्मचारियों को मिलाकर कुल 18 कर्मचारी ड्यूटी से गायब मिले। वहीं जिला अस्पताल में तैनात मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रतन कुमार व सीएचसी हलधरमऊ मे तैनात प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक भी ड्यूटी से नदारद मिले। जिसके लिए डीएम ने तत्काल प्रभाव से सभी का वेतन रोकते हुए हरेक को कारण बताओ नोटिस जारी की है।
शनिवार को निरीक्षण से पहले डीएम ने छापेमारी करने वाले सभी अधिकारियों को 38 बिंदुओं पर स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल करती हुई रिपोर्ट उन्हें देने के लिए कहा था। जिसके तहत सीएचसी पर गंदगी के अलावा पत्रावलियों का रखरखाव बेहद खराब मिला है।
जबकि जिला अस्पताल सहित सभी जगहों पर रोगी कल्याण समिति की बैठक अनियमित पाई गई। वहीं पूर्व में हुई बैठकों की कार्यवृत्ति भी नहीं मिली। इसके अलावा लगभग सभी जगहों पर ग्राम स्वच्छता समिति के तहत अनटाइड फंड का उपभोग बेहद खराब मिला है। जिला अस्पताल में दवाओं का स्टाक पर्याप्त तो पाया गया लेकिन रिकार्ड अपडेट नहीं था। वहीं सीएचसी मनकापुर में भी दवाओं की इंट्री व स्टॉक पंजिका तथा रखरखाव अपूर्ण पाया ग
या। सीएचसी पण्डरीकृपाल में तो जननी सुरक्षा योजना कार्यक्रम का रिकार्ड ही नहीं मिला। यहां पता चला कि जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को खाना भी नहीं मिलता है। यहां के अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में एक भी 102 एम्बुलेन्स नहीं है। जो थी उसे महिला अस्पताल से सम्बद्ध कर लिया गया है।
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यह हाल तो जिले के 18 बड़े सरकारी अस्पतालों का है। वहीं इनसे ज्यादा खराब हालत तो उन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की है, जहां कभी कोई अधिकारी न तो छापेमारी के लिए जाता है। न ही वहां संचालित व्यवस्थाओं की पड़ताल के लिए। बहरहाल शनिवार को प्रशासनिक छापेमारी में जो 18 स्वास्थ्यकर्मी गायब मिले हैं, उनका जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने वेतन रोकते हुए सभी को कारण बताओ नोटिस जारी की है।
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वहीं जिला अस्पताल से गायब मिले सीएमएस के अलावा प्रभारी अधीक्षक हलधरमऊ से भी उन्होंने लिखित जवाब मांगा है। सरकारी अस्पतालों से मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने के लिए शनिवार को जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन के निर्देश पर जहां मुख्य विकास अधिकारी जयन्त कुमार दीक्षित व डीडीओ ने जिला महिला अस्पतालए में छापेमारी की तो वहीं एसडीएम अर्चना वर्मा के साथ सीआरओ ने जिला पुरुष अस्पताल में।
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जबकि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष कुमार व तहसीलदार सदर रामनारायण वर्मा ने सीएचसी पंडरीकृपाल, एसडीएम मनकापुर अमरेश ने सीएचसी मनकापुर, अपर उपजिलाधिकारी ने सीएचसी झंझरी, एसडीएम करनैलगंज हरिशंकर लाल शुक्ल ने सीएचसी परसपुर तो नगर मजिस्ट्रेट जगदीश सिंह ने सीएचसी हलधरमऊ और अपर उपजिलाधिकारी नन्हेलाल यादव ने सीएचसी बेलसर का औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण में महिला अस्पताल के 6 कर्मचारी, सीएचसी बेलसर मेंसात कर्मचारी तो सीएचसी झंझरी में पांच कर्मचारियों को मिलाकर कुल 18 कर्मचारी ड्यूटी से गायब मिले। वहीं जिला अस्पताल में तैनात मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रतन कुमार व सीएचसी हलधरमऊ मे तैनात प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक भी ड्यूटी से नदारद मिले। जिसके लिए डीएम ने तत्काल प्रभाव से सभी का वेतन रोकते हुए हरेक को कारण बताओ नोटिस जारी की है।
शनिवार को निरीक्षण से पहले डीएम ने छापेमारी करने वाले सभी अधिकारियों को 38 बिंदुओं पर स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल करती हुई रिपोर्ट उन्हें देने के लिए कहा था। जिसके तहत सीएचसी पर गंदगी के अलावा पत्रावलियों का रखरखाव बेहद खराब मिला है।
जबकि जिला अस्पताल सहित सभी जगहों पर रोगी कल्याण समिति की बैठक अनियमित पाई गई। वहीं पूर्व में हुई बैठकों की कार्यवृत्ति भी नहीं मिली। इसके अलावा लगभग सभी जगहों पर ग्राम स्वच्छता समिति के तहत अनटाइड फंड का उपभोग बेहद खराब मिला है। जिला अस्पताल में दवाओं का स्टाक पर्याप्त तो पाया गया लेकिन रिकार्ड अपडेट नहीं था। वहीं सीएचसी मनकापुर में भी दवाओं की इंट्री व स्टॉक पंजिका तथा रखरखाव अपूर्ण पाया ग
या। सीएचसी पण्डरीकृपाल में तो जननी सुरक्षा योजना कार्यक्रम का रिकार्ड ही नहीं मिला। यहां पता चला कि जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को खाना भी नहीं मिलता है। यहां के अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में एक भी 102 एम्बुलेन्स नहीं है। जो थी उसे महिला अस्पताल से सम्बद्ध कर लिया गया है।