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2.20 लाख गरीबों को पांच लाख रुपए तक मिलेगा मुफ्त इलाज
Updated Thu, 01 Feb 2018 09:32 PM IST
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2.20 लाख गरीबों को पांच लाख रुपये तक मिलेगा मुफ्त इलाज
गोंडा। संसद में गुरुवार को केंद्रीय बजट पेश किया गया। इसमें कर में भले ही किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन आम लोगों को राहत देने की कोशिश जरूर हुई। चुनावी बजट न होने से कुछ लोगों को निराशा भी हुई तो बुनियादी ढांचे में सुधार के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण भी माना जा रहा है।
आम बजट में बुजुर्गों व गरीबों के इलाज को लेकर मेहरबानी की गई है। इसमें गोंडा जिले के करीब 2.20 लाख गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक एक साल में मुफ्त इलाज मिलेगा। बजट में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की धनराशि पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष किए जाने से अब गंभीर बीमारियों का भी इलाज गरीबों को मिल सकेगा।
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स्वास्थ्य बीमा में किन बीमारियों को रखा जाएगा, यह तो बीमा के दौरान पता चलेगा, लेकिन इससे गरीबों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
तीन लाख महिलाओं को मिलेगा मुफ्त गैस कनेक्शन
भारत सरकार की उज्ज्वला योजना से जिले के छह लाख परिवारों में गैस पर खाना पकाया जा रहा है। पिछले बजट में पांच करोड़ महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन दिए जाने की व्यवस्था पर जिले में छह लाख महिलाओं को इसका लाभ दिया गया।
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इस बार पांच से बढ़ाकर आठ करोड़ किए जाने से करीब तीन लाख और महिलाओं को इसका लाभ मिलना तय है। जिले में कुल उपभोक्ताओं की संख्या करीब साढ़े आठ लाख है, जिसमें छह लाख कनेक्शन उज्ज्वला योजना के तहत ही हैं। स्कीम के विस्तार से जिले के हर घर में मिट्टी के चूल्हे से निजात मिल जाएगी।
60 हाट को मिलेगी संजीवनी
बीते 15 साल में जिले भर में विभिन्न योजनाओं के तहत हाट बनाए गए थे। उद्देश्य था कि इन हाटों पर नजदीकी किसान अपनी उपज लाकर बेच सकेंगे, लेकिन बाजार न होने के कारण यह फ्लाप रहा और ये आज तक बेजान पड़े हैं।
जिले के 16 ब्लॉक क्षेत्रों के 166 न्याय पंचायतों में ये हाट बनने थे, लेकिन नहीं बन पाए। जिला पंचायत, डीआरडीए व नाबार्ड ने करीब 60 हाट तैयार कराए थे, जो बदहाल पड़े हैं। बजट में सरकार ने इन सभी हाटों को कृषि बाजार के रूप में विकसित करने का प्रावधान किया है। इससे जिले के किसानों को बाजार मिलेगा और उसका सीधा फायदा काश्तकारों को मिलेगा। साथ ही उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिल सकेगा
ढाई लाख पशुपालकों व मछुवारों के बनेंगे केसीसी
जिले में करीब पांच लाख किसान सीधे खेती से जुड़े हैं। इसमें करीब तीन लाख किसानों को केसीसी मिला है और उसका लाभ भी उन्हें मिल रहा है, लेकिन कम खेती करने वाले तमाम किसान ऐसे हैं, जो पशुपालन से परिवार का गुजारा कर रहे हैं।
जिले में दो लाख किसान पशुपालन का कार्य करते हैं। इनके पास एक एकड़ से कम खेेती है और कुछ खेतिहर मजदूर हैं। इसके अलावा जिले के विभिन्न हिस्सों में 50 हजार मछुवारे रहते हैं। सरयू, घाघरा व टेढ़ी नदी के किनारे बसे इन मछुवारों को भी केसीसी का लाभ मिलेगा और ये किसानों की तरह बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवा सकेंगे।
ऑपरेशन ग्रीन के दायरे में आएंगे साढ़े आठ हजार किसान
जिले में 2600 हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। ढाई सौ हेक्टेयर में प्याज तथा इतने में ही किसान टमाटर की खेती करते हैं। 25 क्विंटल से लेकर 200 क्विंटल की दर से यह उत्पादन करते हैं। लेकिन इन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता है।
बजट में आलू, प्याज व टमाटर उत्पादन करने वाले किसानों को ऑपरेशन ग्रीन के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई है। जिले मेें ऑपरेशन ग्रीन के दायरे में करीब साढे़ आठ हजार किसान आएंगे।