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बारिश से उफनाई घाघरा, 90 गांव बाढ़ की चपेट में

Thu, 19 Sep 2019 10:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 10:24 PM IST
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90 villages in the grip of flood of Ghaghara
गोंडा के करनैलगंज में घाघरा में आई बाढ़ को रोकने के लिए इस तरह बोल्डर डाल कर की गई तैयारी। - फोटो : GONDA
करनैलगंज (गोंडा)। नेपाल की पहाड़ियों व कई जिलों में लगातार हो रही बारिश से गिरिजा, शारदा व सरयू बैराजों का डिस्चार्ज बढ़ने पर गुरुवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 42 सेमी ऊपर पहुंच गया। बुधवार को लगभग 2 लाख 30 हजार क्यूसेक पानी विभिन्न बैराजों ने घाघरा में छोड़ा गया था। जिसका असर अब यहां दिखना शुरू हो गया है। इससे घाघरा में आए उफान से करीब 90 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सितंबर के अंतिम दौर में यह पहला वाकया है कि जिले में बाढ़ की स्थिति बन गई है। इससे लोगों में दहशत है और पलायन शुरू हो गया है।
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जानकारों के अनुसार जब तक मौसम साफ नहीं हो जाता तब तक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे जाना संभव नहीं दिख रहा है। बढ़े जलस्तर के चलते कई स्थानों पर घाघरा का सैलाब बांध को नुकसान पहुंचाने पर आमादा दिखाई दे रहा है। बांसगांव के पास बांध को हुई क्षति को ठीक करने में सिंचाई विभाग को पसीने आ रहे है। क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने के लिए यहां सिंचाई विभाग ब्रिकरोरा, बालू की बोरियां सहित पेड़ों को काट कर नदी में डाल बांध बचाने की कवायद में लगा है।
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करनैलगंज व बाराबंकी के सरहदी इलाकों सहित एल्गिन चरसड़ी बांध की जद में आने वाले व तराई के गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से भरना शुरू हो गया है। जिन लोगों ने बाढ़ आने के बाद भी अपने घर नहीं छोड़े थे वो अब संभावित खतरे को देखते हुए ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण ले रहे हैं। हालांकि बैराजों में पानी का डिस्चार्ज कम हो जाने से आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर में कमी होने के संकेत मिल रहे हैं। बाढ़ के पानी से जहां माझा रायपुर, कमियार, बांसगांव, नकहरा के करीब डेढ़ दर्जन मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं बढ़ रहे जलस्तर से मैदानी इलाकों में लगातार पानी भरता जा रहा है। जिससे आने वाले समय में लोगों की दुश्वारियां बढ़ सकती है।
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एल्गिन चरसड़ी बांध पर बरसात के चलते लगातार रेनकट बढ़ते जा रहे हैं। रैंनकट्स की वजह से बांध भी काफी कमजोर हो चुका है और वाहनों के आवागमन में दिक्कत हो रही है। जिससे सिंचाई विभाग को रेंनकट्स भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश कुमार सिंह व अवर अभियंता एमके सिंह बताते हैं कि रेनकट और नदी की धारा के बहाव से जहां बांध दिक्कत हो रही है वहां उसे ठीक कराने का काम तेजी से चलाया जा रहा है। बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे ग्रामीण
उमरी क्षेत्र में ऐली परसौली सहित कई ग्राम पंचायतों के मजरे बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। ऐली का केवटाही गांव के लोग पलायन कर बांध पर जा टिके हैं। गांव पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर गया है। इसके अलावा घोड़हनपुरवा भी पूरी तरह से बाढ़ से घिर गया है। तरबगंज तहसील क्षेत्र के कई दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बरसात के कारण बांध की मरम्मत भी प्रभावित है। नदी की उफान को देखते हुए लोगों ने बांध व सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर चुके हैं। जो लोग गांव में हैं उन्हें पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
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