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इलाहाबाद बैंक के करेंसी चेस्ट में मिले 86 हजार के पुराने जाली नोट
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गोंडा में इलाहाबाद बैंक भवन।
- फोटो : GONDA
गोंडा। बाजार को छोड़िए यहां जाली करेंसी बैंकों के करेंसी चेस्ट तक पहुंच गई हैं। इसका खुलासा गुुरुवार देर शाम इलाहाबाद बैंक के करेंसी चेस्ट प्रभारी की ओर से एसपी को दी गई तहरीर के बाद हुआ है। यहां करेंसी चेस्ट में लगभग 86 हजार रुपये के पुराने जाली नोट पाये गये हैं। वरिष्ठ प्रबंधक व करेंसी चेस्ट प्रभारी की ओर से दी गई तहरीर पर एसपी ने नगर कोतवाल को इसकी एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिये हैं। वहीं इसी तरह के एक पुराने प्रकरण में भी एसपी ने कागजात मांगे हैं।
इलाहाबाद बैंक के मु्द्रा कोष प्रभारी राजाराम मौर्य ने बताया कि 2016 में नोटबंदी के दौरान 25 नवंबर से 28 दिसंबर 2016 के बीच बड़ी संख्या में जाली नोट मार्केट में आ गये थे। इस चक्कर में पुराने जाली नोट बड़ी संख्या में बैंक कर्मियों की लापरवाही की वजह से बैंकों में जमा हो गये थे। उन्होंने इस मामले में एसपी आरके नैयर से कार्रवाई की मांग की है। करेंसी चेस्ट में जाली नोट के पहुंचने के इस मामले के उजागर होने के बाद बैंक के कर्मचारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। मुद्रा कोष प्रभारी मौर्य ने कहा कि मेरे आने के बाद ताजा निरीक्षण में ये लापरवाही सामने आई है। ऐसे मामले पर अब तक कार्रवाई हो जानी चाहिए।
नकली जाली नोट 100, 500 और 1000 के
इलाहाबाद बैंक के करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों में सारे नोट 100, 500 और 1000 के हैं। कुल मिलाक 500 रुपये के 101 नोट, 100 के 72 और 1000 रुपये के 29 नोट पाये गये हैं। अधिकांश नोट नोटबंदी के दौरान ही बैंकों में जमा कराये गये हैं। इन नोटों की कुल कीमत 85 हजार 700 रुपये है। इनमें कुछ नोट 2005 के भी करेंसी चेस्ट में मिले हैं। इस बारे में एसपी ने बैंक के करेंसी प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है।
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आरबीआई की टीम ने भी दी थी रिपोर्ट
2018 में आरबीआई की टीम के निरीक्षण में भी ये मामला सामने आया था। इस बारे में रिजर्व बैंक की ओर से अक्तूबर 2018 में ही यहां के सहायक महाप्रबंधक को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था लेकिन अभी तक इस पर कार्रवाई नहीं की गई। बैंक के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव ने कहा कि रिजर्व बैंक की गाइडलाइन है कि पांच से अधिक नकली नोट करेंसी चेस्ट में मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाये।
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इलाहाबाद बैंक के मु्द्रा कोष प्रभारी राजाराम मौर्य ने बताया कि 2016 में नोटबंदी के दौरान 25 नवंबर से 28 दिसंबर 2016 के बीच बड़ी संख्या में जाली नोट मार्केट में आ गये थे। इस चक्कर में पुराने जाली नोट बड़ी संख्या में बैंक कर्मियों की लापरवाही की वजह से बैंकों में जमा हो गये थे। उन्होंने इस मामले में एसपी आरके नैयर से कार्रवाई की मांग की है। करेंसी चेस्ट में जाली नोट के पहुंचने के इस मामले के उजागर होने के बाद बैंक के कर्मचारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। मुद्रा कोष प्रभारी मौर्य ने कहा कि मेरे आने के बाद ताजा निरीक्षण में ये लापरवाही सामने आई है। ऐसे मामले पर अब तक कार्रवाई हो जानी चाहिए।
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नकली जाली नोट 100, 500 और 1000 के
इलाहाबाद बैंक के करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों में सारे नोट 100, 500 और 1000 के हैं। कुल मिलाक 500 रुपये के 101 नोट, 100 के 72 और 1000 रुपये के 29 नोट पाये गये हैं। अधिकांश नोट नोटबंदी के दौरान ही बैंकों में जमा कराये गये हैं। इन नोटों की कुल कीमत 85 हजार 700 रुपये है। इनमें कुछ नोट 2005 के भी करेंसी चेस्ट में मिले हैं। इस बारे में एसपी ने बैंक के करेंसी प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है।
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आरबीआई की टीम ने भी दी थी रिपोर्ट
2018 में आरबीआई की टीम के निरीक्षण में भी ये मामला सामने आया था। इस बारे में रिजर्व बैंक की ओर से अक्तूबर 2018 में ही यहां के सहायक महाप्रबंधक को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था लेकिन अभी तक इस पर कार्रवाई नहीं की गई। बैंक के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव ने कहा कि रिजर्व बैंक की गाइडलाइन है कि पांच से अधिक नकली नोट करेंसी चेस्ट में मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाये।