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तो खामी छुपाने के लिए उड़ा दिये सात हजार टिन नम्बर
Updated Wed, 14 Jun 2017 03:04 AM IST
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तो खामी छुपाने के लिए उड़ा दिये सात हजार टिन
जीएसटीएन के लिए दौड़ रहे सात हजार व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। तीन महीने पहले वाणिज्य कर विभाग ने अपनी खामी छुपाने के लिए सात हजार व्यापारियों के टिन उड़ा कर निरस्त कर दिया था। इसके बाद जीएसटीएन के लिए जिले के करीब सात हजार व्यापारी अब अपने टिन नम्बर के लिए दौड़ लगा रहे हैं। यह हाल तब है जब पूरे देश में एक साथ एक जुलाई से जीएसटी लागू होने जा रही है।
वाणिज्य कर विभाग ने तीन माह पूर्व विभाग में पंजीकृत करीब सात हजार व्यापारियों का टिन यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि इन लोगों ने तय समय में अपना टिन नम्बर जीएसटीएन में माइग्रेट नही कराया। जबकि व्यापारियों व वाणिज्य कर विभाग के अधिवक्ताओं का आरोप है कि विभाग ने अपनी खामी छुपाने के लिए टिन निरस्त कर दिया। बताया जाता है कि शासन की ओर से पिछले कई माह से जीएसटी को पटरी पर लाने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है जिलों से रिपोर्ट मांगी जा रही है। जिले में जितने व्यापारी है अभी तक उसमें कुल 20 फीसद व्यापारियों का टिन माइग्रेट हो सका है। इसकी वजह व्यापारी व अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिकारियों को पहले नोटिस जारी कर उन्हें मेल व मैनुअल तरीके से पासवर्ड जारी करना चाहिए। लेकिन इसकी जानकारी व्यापारियों को नही हो सकी और विभाग ने कार्रवाई कर दी। उनका कहना था कि टिन निरस्त हो जाने पर व्यापारियों को बाहर से माल लाने में दिक्कत होने लगी। जांच में पकड़े जाने पर उन्हें तीन गुना अधिक जुर्माना भर कर अधिक क्षति उठाना पड़ा। इस बाबत कई बार अधिवक्ताओं व व्यापारियों ने विभाग के अफसरों से शिकायत की। अब जीएसटी के लागू होने का समय करीब आ जाने पर व्यापारियों में खलबली मची है। वह अपने अधिवक्ताओं के चैम्बर व अफसरों के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी को कई बार सूचित किया जा चुका है काम न करने वालों को और अधिक मौका नही दिया जा सकता है। इस बावत ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक दिनेश कुमार का कहना है कि काम करने के इच्छुक किसी भी व्यापारी का माईग्रेशन होना नही छूटेगा इसकी व्यवस्था की गई है।
इनसेट
वाणिज्य कर विभाग ने खोला जीएसटी हेल्प डेस्क
वाणिज्य कर विभाग ने एक जुलाई से जीएसटी शुरू होने से पहले व्यापारियों के लिए हेल्पडेस्क खोलने का दावा किया है। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक दिनेश कुमार ने बताया कि कोई भी व्यापारी अपना पंजीयन जीएसटीएन में माइग्रेट करा सकता है इसके लिए विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर मनीष कुमार द्विवेदी व असिस्टेंट कमिश्नर संतोष कुमार सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। एक जुलाई से पूरे भारत में एक साथ जीएसटी (गुड्स एण्ड सवस टैक्स)लागू किया जा रहा है। इस बावत प्रदेश के कमिश्नर वाणिज्य कर आयुक्त की ओर से व्यापारियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क खोले जाने का निर्देश दिया गया है। हेल्पडेस्क पर आने वाले व्यापारियों को निशुल्क जीएसटी पोर्टल पर माईग्रेशन व इनरोलमेंट की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। वाणिज्य कर कमिश्नर व वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन के निर्देश पर जिला कार्यालय पर हेल्पडेस्क खोलकर अफसरों व कमयों की तैनाती कर दी गई है।
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इनसेट
जीएसटी के लिए हेल्पलाइन नम्बर
* मनीष कुमार द्विवेदी एसी- 7235003263
* विकास श्रीवास्तव सीटीओ - 7235003286
* संतोष कुमार सिंह एसी - 7235003264
* अजय कुमार एसी - 7235003264
जीएसटीएन के लिए दौड़ रहे सात हजार व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। तीन महीने पहले वाणिज्य कर विभाग ने अपनी खामी छुपाने के लिए सात हजार व्यापारियों के टिन उड़ा कर निरस्त कर दिया था। इसके बाद जीएसटीएन के लिए जिले के करीब सात हजार व्यापारी अब अपने टिन नम्बर के लिए दौड़ लगा रहे हैं। यह हाल तब है जब पूरे देश में एक साथ एक जुलाई से जीएसटी लागू होने जा रही है।
वाणिज्य कर विभाग ने तीन माह पूर्व विभाग में पंजीकृत करीब सात हजार व्यापारियों का टिन यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि इन लोगों ने तय समय में अपना टिन नम्बर जीएसटीएन में माइग्रेट नही कराया। जबकि व्यापारियों व वाणिज्य कर विभाग के अधिवक्ताओं का आरोप है कि विभाग ने अपनी खामी छुपाने के लिए टिन निरस्त कर दिया। बताया जाता है कि शासन की ओर से पिछले कई माह से जीएसटी को पटरी पर लाने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है जिलों से रिपोर्ट मांगी जा रही है। जिले में जितने व्यापारी है अभी तक उसमें कुल 20 फीसद व्यापारियों का टिन माइग्रेट हो सका है। इसकी वजह व्यापारी व अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिकारियों को पहले नोटिस जारी कर उन्हें मेल व मैनुअल तरीके से पासवर्ड जारी करना चाहिए। लेकिन इसकी जानकारी व्यापारियों को नही हो सकी और विभाग ने कार्रवाई कर दी। उनका कहना था कि टिन निरस्त हो जाने पर व्यापारियों को बाहर से माल लाने में दिक्कत होने लगी। जांच में पकड़े जाने पर उन्हें तीन गुना अधिक जुर्माना भर कर अधिक क्षति उठाना पड़ा। इस बाबत कई बार अधिवक्ताओं व व्यापारियों ने विभाग के अफसरों से शिकायत की। अब जीएसटी के लागू होने का समय करीब आ जाने पर व्यापारियों में खलबली मची है। वह अपने अधिवक्ताओं के चैम्बर व अफसरों के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी को कई बार सूचित किया जा चुका है काम न करने वालों को और अधिक मौका नही दिया जा सकता है। इस बावत ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक दिनेश कुमार का कहना है कि काम करने के इच्छुक किसी भी व्यापारी का माईग्रेशन होना नही छूटेगा इसकी व्यवस्था की गई है।
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वाणिज्य कर विभाग ने खोला जीएसटी हेल्प डेस्क
वाणिज्य कर विभाग ने एक जुलाई से जीएसटी शुरू होने से पहले व्यापारियों के लिए हेल्पडेस्क खोलने का दावा किया है। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक दिनेश कुमार ने बताया कि कोई भी व्यापारी अपना पंजीयन जीएसटीएन में माइग्रेट करा सकता है इसके लिए विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर मनीष कुमार द्विवेदी व असिस्टेंट कमिश्नर संतोष कुमार सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। एक जुलाई से पूरे भारत में एक साथ जीएसटी (गुड्स एण्ड सवस टैक्स)लागू किया जा रहा है। इस बावत प्रदेश के कमिश्नर वाणिज्य कर आयुक्त की ओर से व्यापारियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क खोले जाने का निर्देश दिया गया है। हेल्पडेस्क पर आने वाले व्यापारियों को निशुल्क जीएसटी पोर्टल पर माईग्रेशन व इनरोलमेंट की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। वाणिज्य कर कमिश्नर व वाणिज्य कर विभाग के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन के निर्देश पर जिला कार्यालय पर हेल्पडेस्क खोलकर अफसरों व कमयों की तैनाती कर दी गई है।
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जीएसटी के लिए हेल्पलाइन नम्बर
* मनीष कुमार द्विवेदी एसी- 7235003263
* विकास श्रीवास्तव सीटीओ - 7235003286
* संतोष कुमार सिंह एसी - 7235003264
* अजय कुमार एसी - 7235003264