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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   48 lacs of tender cast without tender

बिना टेंडर के ही छपवा डाली 48 लाख की सामग्री

Wed, 29 Mar 2017 11:44 PM IST
amarujala
amarujala Updated Wed, 29 Mar 2017 11:44 PM IST
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 बेसिक शिक्षा विभाग के सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत परिषदीय स्कूलों में पढने वाले नौनिहालों को दी जाने वाली छात्र प्रोफाइल व प्रगति रिपोर्ट की छपाई में अफसरों ने बड़ा घपला कर डाला। बिना टेंडर कराये ही अफसरों ने डीएम को गुमराह कर इसकी अनुमति ले ली और  चुनाव के समय इन शैक्षिक सामग्रियों को छपवाकर उनका भुगतान कर दिया। शैक्षिक सत्र की समाप्ति पर इन शैक्षिक सामग्रियों को विद्यालयों में भेजा जा रहा है।    
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बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में पढने वाले 3.73 लाख नौनिहालों को उनके शैक्षिक विकास के आकलन के लिए छात्र प्रोफाइल व प्रगति रिपोर्ट कार्ड दिया जाना था। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए जनपहल पुस्तिका व सभी प्रबंध समितियों को एसएमसी रजिस्टर दिया जाना था।
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सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक ने 8 दिसंबर को इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कराये जाने का निर्देश दिया था। साथ ही इन सामग्रियों की खरीद के लिए 48 लाख रुपये भी का आवंटन भी कर दिया था।
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इस निर्देश के बाद जिले स्तर पर डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिले के वरिष्ठतम खंड शिक्षा अधिकारी व जिलाधिकारी समेत चार अफसरों की एक कमेटी का गठन किया गया था।

कमेटी की ओर से 24 दिसंबर को इसके लिए टेंडर भी कराया गया लेकिन इस टेंडर की नियम व शर्ते कुछ इस तरह से रख दी गई कि कोई फर्म इसका टेंडर ही नही भर पाई। इसके बाद ठीक विधानसभा चुनाव के पहले कमेटी के अफसरों ने जिलाधिकारी को गुमराह कर उनसे टेंडर मुक्त संस्था से कार्य कराने की अनुमति ले ली और पूरे कार्य का ठेका लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित पंचायत उद्योग नाम की संस्था को सौंप दिया गया।       
  
वित्तीय नियमों के मुताबिक एक लाख रुपये से अधिक के कार्य को कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। अगर एक बार की टेंडर निकासी पर कोई फर्म सामने नही आती है तो दोबारा टेंडर कराया जाना चाहिए या फिर वित्त विभाग की अनुमति के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए लेकिन इस मामले में नियमों का पालन ही नहीं किया गया।       
इनसेट      
सत्र बीतने के बाद आई छात्र प्रोफाइल व अन्य सामग्री      
गोंडा। पंचायत उद्योग ससं्था को काम मिलने के बाद उसने भी इसकी छपाई में करीब तीन माह लगा दिए और शैक्षिक सत्र की समाप्ति के बाद मार्च महीने में इन सामग्रियों की आपूर्ति की। अफसरों ने भी इस पर पूरे समय चुप्पी साधे रखी। अब शैक्षिक सत्र खत्म होने में महज कुछ ही दिन बचे है तो सर्व शिक्षा अभियान के अफसर इसे गुपचुप ढंग से ब्लाक संसाधन केंद्रो तक पहुंचाने में जुटे हुए है।       
  
इस प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के कारण तत्कालीन जिला समन्वयक प्रशिक्षण चंद्रभान पांडेय अपने तबादले के बाद चार्ज देने में भी आनाकानी कर रहे थे। इस पर डीएम ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी और उनके खिलाफ एफआईआर के भी आदेश दिए थे लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने इस मामले को भी दबा लिया और आनन फानन में प्रक्रिया पूरी करा ली।       


दिसंबर माह में छात्र प्रोफाइल व अन्य सामग्रियों की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया था लेकिन किसी भी फर्म ने इसके लिए आवेदन नही किया था। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण जिलाधिकारी से अनुमति लेकर पंचायत उद्योग से इसकी छपाई कराई गई है। इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नही है।       
अजय कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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