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नगर पालिका में शामिल होने से चूकीं 34 पंचायतें
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गोंडा। भाजपा के सात विधायक, दो सांसद हैं फिर भी विकास में फिसड्डी हो रहे जिले को एक और झटका लगा है। सोमवार को कैबिनेट बैठक में गोंडा नगर पालिका में 34 ग्राम पंचायतों को शामिल करने के प्रस्ताव को ही नहीं भेजा जा सका, जबकि शहरी सीमा में बसी 34 ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मांगने के लिए शासन ने पहले ही निर्देशित किया था। लेकिन यहां न तो जनप्रतिनिधियों ने रुचि दिखाई और न ही अधिकारियों ने जहमत उठाई।
वर्ष 2009 से शहर की सीमा से सटे गांवों को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किए जाने की कवायद हो रही है। हर बार कोई न कोई कमी से सीमा विस्तार का मामला आगे नहीं बढ़ रहा है। इससे शहरी क्षेत्र का सुनियोजित विकास रुका हुआ है।
गोंडा नगर पालिका परिषद का दायरा बढ़ाने के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन डीएम मुक्तेश मोहन मिश्र ने पहल की थी। उन्होंने विनियमित क्षेत्र के 34 गांवों को नगर क्षेत्र में शामिल करके विस्तार दिए जाने का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद बीते साल वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम जेबी सिंह ने भी प्रस्ताव तैयार कराया।
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इसके बाद बीते माह अक्तूबर 2019 को शहर की सीमावर्ती 34 ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मांगा गया, लेकिन अभी तक न तो प्रस्ताव आए और न ही शासन को प्रस्ताव ही भेजा गया। इससे बीते सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में गोंडा नगर पालिका के सीमा विस्तार का प्रस्ताव ही न आ सका। कैबिनेट का फैसला आने के बाद एक फिर गोंडा के लोगों को निराशा ही हाथ लगी। उम्मीद थी कि इस बार नपाप की सीमा का विस्तार हो जाएगा।
जिलाध्यक्ष भाजपा सूर्य नरायन तिवारी ने बताया कि कैबिनेट के फैसले की जानकारी हुई है। गोंडा नगर पालिका के विस्तार का प्रस्ताव भिजवाने के लिए अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश के संगठन को भी जन भावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
डीपीआरओ बताया कि धनश्याम सागर शहर की सीमा से सटी 34 ग्राम पंचायतों को नगर पालिका में शामिल किए जाने का प्रस्ताव मांगा गया है। अभी प्रस्ताव नहीं मिला है, पंडरी व झंझरी के गांव हैं। दोनों ब्लॉकों के एडीओ पंचायत से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
राकेश सिंह ने नगर मजिस्ट्रेट बताया कि पंचायत राज विभाग से प्रस्ताव मिलने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
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वर्ष 2009 से शहर की सीमा से सटे गांवों को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किए जाने की कवायद हो रही है। हर बार कोई न कोई कमी से सीमा विस्तार का मामला आगे नहीं बढ़ रहा है। इससे शहरी क्षेत्र का सुनियोजित विकास रुका हुआ है।
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गोंडा नगर पालिका परिषद का दायरा बढ़ाने के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन डीएम मुक्तेश मोहन मिश्र ने पहल की थी। उन्होंने विनियमित क्षेत्र के 34 गांवों को नगर क्षेत्र में शामिल करके विस्तार दिए जाने का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद बीते साल वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम जेबी सिंह ने भी प्रस्ताव तैयार कराया।
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इसके बाद बीते माह अक्तूबर 2019 को शहर की सीमावर्ती 34 ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मांगा गया, लेकिन अभी तक न तो प्रस्ताव आए और न ही शासन को प्रस्ताव ही भेजा गया। इससे बीते सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में गोंडा नगर पालिका के सीमा विस्तार का प्रस्ताव ही न आ सका। कैबिनेट का फैसला आने के बाद एक फिर गोंडा के लोगों को निराशा ही हाथ लगी। उम्मीद थी कि इस बार नपाप की सीमा का विस्तार हो जाएगा।
जिलाध्यक्ष भाजपा सूर्य नरायन तिवारी ने बताया कि कैबिनेट के फैसले की जानकारी हुई है। गोंडा नगर पालिका के विस्तार का प्रस्ताव भिजवाने के लिए अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश के संगठन को भी जन भावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
डीपीआरओ बताया कि धनश्याम सागर शहर की सीमा से सटी 34 ग्राम पंचायतों को नगर पालिका में शामिल किए जाने का प्रस्ताव मांगा गया है। अभी प्रस्ताव नहीं मिला है, पंडरी व झंझरी के गांव हैं। दोनों ब्लॉकों के एडीओ पंचायत से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
राकेश सिंह ने नगर मजिस्ट्रेट बताया कि पंचायत राज विभाग से प्रस्ताव मिलने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।