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25 हजार किसानों को मुआवजे की दरकार
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करनैलगंज/गोंडा। सरकार किसानों की आय दोगुना करने तथा उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं पर जिले के 25 हजार किसान ऐसे हैं जिनकी फसलें आपदाओं में तबाह हो गईं, लेकिन उन्हें इसका मुआवजा नहीं मिला। प्रशासन सूची लेकर किसानों को हर संभव मदद करने का दिलाशा दे रहा है पर उनकी फरियाद को अनसुना किया जा रहा है। ओलावृष्टि, बाढ़ सहित अन्य आपदाओं में वे अपनी पूंजी तक गवां चुके हैं।
जिले में बड़े, मध्यम व लघु किसानों की संख्या करीब पांच लाख है। अप्रैल माह से किसानों की फसलों पर आफत शुरू हो जाती है। अप्रैल से लेकर जून माह अग्निकांडों, बारिश के साथ ओलावृष्टि, बरसात में बाढ़ सहित विभिन्न आपदाओं में किसानों को दो-चार होना पड़ता है। बीते मार्च माह में ओलावृष्टि में करनैलगंज तहसील सहित जिले भर में करीब 50 हजार किसानों की फसलें प्रभावित हुई थीं। इसमें गेहूं सहित कई फसलें नष्ट हो गई थीं। इसके बाद अप्रैल व मई माह में सैकड़ों बीघे फसल अग्निकांडों की भेंट चढ़ गईं। इसके अलावा अभी खत्म हुई बाढ़ की त्रासदी में करनैलगंज व तरबगंज तहसील क्षेत्र में करीब आठ हजार हेक्टेयर फसल तबाह हो गई। इसमें किसानों की पूरी की पूरी फसल डूब गई। लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिला। आपदा राहत में हर साल राशि दी जाती है। इस बार भी शासन ने करीब ढाई करोड़ रुपये दिए हैं। लेकिन 2019 में हुई तबाही की भरपाई किसानों की नहीं हुई। इस बार भी किसानों को कुछ नहीं मिला।
केवल एक प्रतिशत किसानों को ही मिला मुआवजा
बीते मार्च माह में हुई ओलावृष्टि में जिले में किसानों की फसलें तबाह हुई थीं उसमें 50 हजार किसान प्रभावित हुए थे। करनैलगंज तहसील में 11 हजार से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। लॉकडाउन के बाद ओलावृष्टि व अतिवृष्टि से प्रभावित हुए किसानों को मिलने वाली सहायता भी लॉकडाउन का शिकार हो गई। साढे़ 11 हजार प्रभावित किसानों में मात्र 175 किसानों को ही सरकारी इमदाद का लाभ मिल सका है। प्रशासन द्वारा 34 गांव को ओलावृष्टि, अतिवृष्टि से प्रभावित घोषित किया गया था। इन 34 गांव में 11 हजार 460 किसानों को चिह्नित किया गया था। जिनके फसल का नुकसान हुआ था और किसानों को 13 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति मिलना था। जिले के प्रभारी मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने करनैलगंज की ग्राम मसौलिया में एक समारोह आयोजित कर 130 लोगों को उन्होंने सहायता का चेक वितरित किया था और कुछ किसानों को सीधे उनके खाते में उनके नुकसान का लाभ भेज दिया गया था। कुल मिलाकर 175 लोगों को 12 लाख रुपये की सहायता राशि केवल दी गई है। जबकि सभी लाभार्थियों को मिलाकर 2 करोड़ 51 लाख की सहायता का वितरण होना था। तहसीलदार करनैलगंज बृजमोहन बताते हैं कि सभी किसानों के नुकसान का आकलन करके उन्हें सूचीबद्ध किया जा चुका है। आपदा राहत कोष में धन की डिमांड की गई है। दैवी आपदा का धन प्राप्त होते ही सभी किसानों को सीधे खाते में भुगतान भेज दिया जाएगा।
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60 हजार किसानों को नहीं मिली किसान निधि
अधिकारियों की लापरवाही व गलत फीडिंग के कारण जिले के करीब 60 हजार किसानों को किसान सम्मान निधि का भी लाभ नहीं मिल पाया है। शुरुआत में गलत फीडिंग के कारण तमाम अपात्र व मृतक किसानों को राशि मिल गई लेकिन पात्र किसानों के नाम अभी तक फीड नहीं हो पाए हैं। यदि फीड भी हो गए हैं तो उनके खाते या आधार नंबरों का मिलान तक नहीं किया जा सका है। यही कारण है कि आज तक 60 हजार किसान सम्मान निधि के लिए भटक रहे हैं।
सरकारी इमदाद मिलती तो बढ़ जाता हौसला
किसान शिवबालक ने बताया कि ओलावृष्टि व अतिवृष्टि में उनकी गेहूं सहित सभी फसलें तबाह हुई थीं। सर्वे में रिपोर्ट भी तैयार हुई लेकिन राशि नहीं मिली। बड़े काश्तकार मुकेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि हम लोगों की स्थिति बहुत खराब है। कभी आग तो कभी पानी या प्राकृतिक आपदाओं से जूझते रहते हैं। सरकारी इमदाद की घोषणा भी होती है पर मिलता कुछ नहीं है। किसान नानबाबू व सरदार अवतार सिंह ने कहा कि फसलें बर्बाद हो जाने से पूरी पूंजी चली जाती है। मेहनत पर पानी फिर जाता है। यदि सरकार की ओर से थोड़ी राहत मिल जाती है तो उससे किसानों को उठने का मौका मिल जाता है।
सर्वे कराया गया है जो भी किसान राहत से अछूते रह गए हैं राशि के आते ही उनके खातों में भेज दी जाएगी। प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हो रही है। -राकेश सिंह, अपर जिलाधिकारी गोंडा
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जिले में बड़े, मध्यम व लघु किसानों की संख्या करीब पांच लाख है। अप्रैल माह से किसानों की फसलों पर आफत शुरू हो जाती है। अप्रैल से लेकर जून माह अग्निकांडों, बारिश के साथ ओलावृष्टि, बरसात में बाढ़ सहित विभिन्न आपदाओं में किसानों को दो-चार होना पड़ता है। बीते मार्च माह में ओलावृष्टि में करनैलगंज तहसील सहित जिले भर में करीब 50 हजार किसानों की फसलें प्रभावित हुई थीं। इसमें गेहूं सहित कई फसलें नष्ट हो गई थीं। इसके बाद अप्रैल व मई माह में सैकड़ों बीघे फसल अग्निकांडों की भेंट चढ़ गईं। इसके अलावा अभी खत्म हुई बाढ़ की त्रासदी में करनैलगंज व तरबगंज तहसील क्षेत्र में करीब आठ हजार हेक्टेयर फसल तबाह हो गई। इसमें किसानों की पूरी की पूरी फसल डूब गई। लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिला। आपदा राहत में हर साल राशि दी जाती है। इस बार भी शासन ने करीब ढाई करोड़ रुपये दिए हैं। लेकिन 2019 में हुई तबाही की भरपाई किसानों की नहीं हुई। इस बार भी किसानों को कुछ नहीं मिला।
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केवल एक प्रतिशत किसानों को ही मिला मुआवजा
बीते मार्च माह में हुई ओलावृष्टि में जिले में किसानों की फसलें तबाह हुई थीं उसमें 50 हजार किसान प्रभावित हुए थे। करनैलगंज तहसील में 11 हजार से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। लॉकडाउन के बाद ओलावृष्टि व अतिवृष्टि से प्रभावित हुए किसानों को मिलने वाली सहायता भी लॉकडाउन का शिकार हो गई। साढे़ 11 हजार प्रभावित किसानों में मात्र 175 किसानों को ही सरकारी इमदाद का लाभ मिल सका है। प्रशासन द्वारा 34 गांव को ओलावृष्टि, अतिवृष्टि से प्रभावित घोषित किया गया था। इन 34 गांव में 11 हजार 460 किसानों को चिह्नित किया गया था। जिनके फसल का नुकसान हुआ था और किसानों को 13 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति मिलना था। जिले के प्रभारी मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने करनैलगंज की ग्राम मसौलिया में एक समारोह आयोजित कर 130 लोगों को उन्होंने सहायता का चेक वितरित किया था और कुछ किसानों को सीधे उनके खाते में उनके नुकसान का लाभ भेज दिया गया था। कुल मिलाकर 175 लोगों को 12 लाख रुपये की सहायता राशि केवल दी गई है। जबकि सभी लाभार्थियों को मिलाकर 2 करोड़ 51 लाख की सहायता का वितरण होना था। तहसीलदार करनैलगंज बृजमोहन बताते हैं कि सभी किसानों के नुकसान का आकलन करके उन्हें सूचीबद्ध किया जा चुका है। आपदा राहत कोष में धन की डिमांड की गई है। दैवी आपदा का धन प्राप्त होते ही सभी किसानों को सीधे खाते में भुगतान भेज दिया जाएगा।
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60 हजार किसानों को नहीं मिली किसान निधि
अधिकारियों की लापरवाही व गलत फीडिंग के कारण जिले के करीब 60 हजार किसानों को किसान सम्मान निधि का भी लाभ नहीं मिल पाया है। शुरुआत में गलत फीडिंग के कारण तमाम अपात्र व मृतक किसानों को राशि मिल गई लेकिन पात्र किसानों के नाम अभी तक फीड नहीं हो पाए हैं। यदि फीड भी हो गए हैं तो उनके खाते या आधार नंबरों का मिलान तक नहीं किया जा सका है। यही कारण है कि आज तक 60 हजार किसान सम्मान निधि के लिए भटक रहे हैं।
सरकारी इमदाद मिलती तो बढ़ जाता हौसला
किसान शिवबालक ने बताया कि ओलावृष्टि व अतिवृष्टि में उनकी गेहूं सहित सभी फसलें तबाह हुई थीं। सर्वे में रिपोर्ट भी तैयार हुई लेकिन राशि नहीं मिली। बड़े काश्तकार मुकेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि हम लोगों की स्थिति बहुत खराब है। कभी आग तो कभी पानी या प्राकृतिक आपदाओं से जूझते रहते हैं। सरकारी इमदाद की घोषणा भी होती है पर मिलता कुछ नहीं है। किसान नानबाबू व सरदार अवतार सिंह ने कहा कि फसलें बर्बाद हो जाने से पूरी पूंजी चली जाती है। मेहनत पर पानी फिर जाता है। यदि सरकार की ओर से थोड़ी राहत मिल जाती है तो उससे किसानों को उठने का मौका मिल जाता है।
सर्वे कराया गया है जो भी किसान राहत से अछूते रह गए हैं राशि के आते ही उनके खातों में भेज दी जाएगी। प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हो रही है। -राकेश सिंह, अपर जिलाधिकारी गोंडा