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अभियान चलाकर की सरयू नदी की सफाई
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करनैलगंज (गोंडा)। कटराघाट पर अभियान चलाकर स्वयंसेेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने सरयू नदी की साफ-सफाई की। संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने हर सप्ताह नदी की साफ-सफाई करने का निर्णय लिया है।
रविवार को आजाद युवा विकास फाउंडेशन, टर्टल सरबाइवल एलाइंस व नेचर क्लब के संयुक्त तत्वावधान में कटरा घाट स्थित सरयू नदी में सफाई अभियान चलाया गया। संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने नदी के अंदर पड़ी पॉलीथिन, जलकुंभी, शैवाल, प्लास्टिक बोरी सहित अन्य कचरा निकालकर बाहर एकत्रित किया और घाट की भी साफ सफाई की।
फाउंडेशन के हर्षित सिंह ने बताया कि आस्थावान लोगों की न समझी के कारण जीवन दायिनी कही जाने वाली सरयू नदी का अस्तित्व खतरे में है। लोग पूजा में प्रयुक्त होने वाले फूल, प्लास्टिक, कांच, राख व मूर्तियां सहित अन्य सामग्री नदी में डालकर चले जाते हैं। जिससे नदी प्रदूषित होने के साथ ही उथली होती जा रही है। इसी वजह से नदी की जलधारण क्षमता भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने नदी को सुरक्षित रखने के लिये नदी में ऐसी सामग्री न डालने की लोगों से अपील की है। शोधकर्ता ऋषिका दुबला ने बताया कि सरयू नदी में 10 प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। जो नदी की सफाई करते हैं, मगर नदी में भारी मात्रा में फेंके जा रहे कचरे के दुष्प्रभाव से इनका अस्तित्व संकट में है।
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नेचर क्लब की रुषी दूबे ने बताया कि सरयू नदी व कछुओं के अस्तित्व को बचाने के लिए हर सप्ताह सामूहिक रूप से नदी की सफाई करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करके इसे जनांदोलन बनाया जाएगा। जिससे नदियों को गंदा करने के बजाय उसकी सफाई करने के लिए लोग आगे आएं। इस दौरान साफ-सफाई में डॉ. आशीष गुप्ता, अभिषेक सिंह, रिंटू सिंह, अखंड प्रताप, वैभव प्रताप, शशांक, प्रिंस, विवेक, आलोक एवं अभिषेक दूबे सहित कई अन्य लोगों ने सहयोग किया।
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रविवार को आजाद युवा विकास फाउंडेशन, टर्टल सरबाइवल एलाइंस व नेचर क्लब के संयुक्त तत्वावधान में कटरा घाट स्थित सरयू नदी में सफाई अभियान चलाया गया। संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने नदी के अंदर पड़ी पॉलीथिन, जलकुंभी, शैवाल, प्लास्टिक बोरी सहित अन्य कचरा निकालकर बाहर एकत्रित किया और घाट की भी साफ सफाई की।
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फाउंडेशन के हर्षित सिंह ने बताया कि आस्थावान लोगों की न समझी के कारण जीवन दायिनी कही जाने वाली सरयू नदी का अस्तित्व खतरे में है। लोग पूजा में प्रयुक्त होने वाले फूल, प्लास्टिक, कांच, राख व मूर्तियां सहित अन्य सामग्री नदी में डालकर चले जाते हैं। जिससे नदी प्रदूषित होने के साथ ही उथली होती जा रही है। इसी वजह से नदी की जलधारण क्षमता भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने नदी को सुरक्षित रखने के लिये नदी में ऐसी सामग्री न डालने की लोगों से अपील की है। शोधकर्ता ऋषिका दुबला ने बताया कि सरयू नदी में 10 प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। जो नदी की सफाई करते हैं, मगर नदी में भारी मात्रा में फेंके जा रहे कचरे के दुष्प्रभाव से इनका अस्तित्व संकट में है।
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नेचर क्लब की रुषी दूबे ने बताया कि सरयू नदी व कछुओं के अस्तित्व को बचाने के लिए हर सप्ताह सामूहिक रूप से नदी की सफाई करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करके इसे जनांदोलन बनाया जाएगा। जिससे नदियों को गंदा करने के बजाय उसकी सफाई करने के लिए लोग आगे आएं। इस दौरान साफ-सफाई में डॉ. आशीष गुप्ता, अभिषेक सिंह, रिंटू सिंह, अखंड प्रताप, वैभव प्रताप, शशांक, प्रिंस, विवेक, आलोक एवं अभिषेक दूबे सहित कई अन्य लोगों ने सहयोग किया।