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63 करोड़ रुपये के विकास कार्य में गड़बड़ी की जांच में ईओ का ब्रेक
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63 करोड़ के घपले की जांच में अधिकारी का अड़ंगा
गोंडा। नगर पालिका परिषद गोंडा में 2016-17 में कराये गये विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी की जांच में नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी ही रोड़ा बन गये हैं।
63 करोड़ रुपये के विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी की शिकायत पर आयुक्त की ओर से जांच समिति गठित कर जांच आख्या तलब की गई थी। अब जांच कर रही मण्डलीय तकनीकी संपरीक्षा समिति अभिलेखों के अभाव में खाली हाथ बैठी है।
जांच समिति का कहना है कि नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी कोई पत्रावली मुहैया नही करा रहेे हैं जिसकी वजह से जांच आगे नही बढ़ पा रही है।
नगर पालिका परिषद गोंडा में वित्तीय वर्ष 2016-17 में रबर मोल्डेड इण्टरलॉकिंग व कई तरह के निर्माण कार्य को लेकर में करीब 63 करोड़ रुपये खर्च कराये गये थे।
इस दौरान तत्कालीन अपर जिलाधिकारी त्रिलोकी सिंह नगर पालिका अध्यक्ष का पावर सीज होने की दशा में प्रशासक थे। उन्हें की निगरानी में शहर के गई तरह के विकास कार्य कराये गये थे। इस मामले में 16 मार्च 2018 को पीयूष मिश्रा की ओर से नगर में कराये गये विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत आयुक्त से की गई थी।
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तत्कालीन आयुक्त की ओर से मामले की जांच के लिए अपर आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में मुख्य कोषाधिकारी व मुख्य राजस्व अधिकारी वाली तीन सदस्य मण्डल स्तरीय तकनीकि सम्परीक्षा समिति गठित कर जांच सौंप दी थी।
इस मामले की पिछले 10 माह से जांच चल रही है लेकिन अभी तक कोई रिजल्ट सामने नही आया है। जांच की आंच न आने को लेकर नगर के लोगों की ओर से तरह तरह से सवाल उठाये जा रहे हैं।
लोगों का मानना है कि जांच समिति के प्रशासनिक अधिकारी अधिकारियों व नगर पालिका के अधिकारियों कर्मचारियों को बचाने के लिए जांच को लटका रहे हैं। गडबड़ी में नगर पालिका के अधिकारियों की मिलीभगत बतायी जा रही है।
जबकि इस मामले में जांच टीम के अधिकारियों का कहना है कि वे जांच किस वेस पर करें। कई बार मांगने के बावजूद नगर के अधिशाषी अधिकारी की ओर से कोई भी पत्रावली उपलब्ध नही करायी गई है।
जानकारों की माने तो कोई भी घपले की जांच अधिकतम तीन माह में पूरी कर ली जानी चाहिए। ताकि सही समय पर लोगों के सामने सच आ सके। जबकि नगर पालिका के अधिकारी कागजात दिये जाने की दुहाई दी जा रही है।जांच पूरी न होने से कई कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान भी लटक गया है।
जबकि उन्हें 80 फीसद कार्य का भुगतान कर दिया जाना चाहिए। जबकि नगर पालिका के अधिकारियों की ओर से इसमें भी खेल किया जा रहा है सेटिंग गेटिंग वाली कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान जांच के दौरान भी कर दिया गया है इसकी भी मैक इन्फराविजन कार्यदायी संस्था के प्रोपराइटर मुश्फिक अहमद ने आयुक्त से शिकायत कर जांच कराने की मांग की है।
कार्यों में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के मामले में जांच समिति को कुछ कागजात दे दिया है। कुछ और कागजात मांगेंगे तो वह भी मुहैया करा दिया जाएगा। जांच में विभाग सहयोग कर रहा है।
- विजय सेन, ईओ नगर पालिका परिषद
नगर पालिका परिषद गोंडा के विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत की आयुक्त के निर्देश पर जांच समिति को जांच मिली है। जांच तभी शुरू होगी और आगे बढ़ेगी जब इस के बावत पत्रावली मिले। कई बार मांगने पर ईओ की ओर से अभिलेख नही दिये जा रहे हैं। अभिलेख न दिए जाने के मामले में जल्द ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश चन्द्र शर्मा, अपर आयुक्त प्रशासन
गोंडा। नगर पालिका परिषद गोंडा में 2016-17 में कराये गये विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी की जांच में नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी ही रोड़ा बन गये हैं।
63 करोड़ रुपये के विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी की शिकायत पर आयुक्त की ओर से जांच समिति गठित कर जांच आख्या तलब की गई थी। अब जांच कर रही मण्डलीय तकनीकी संपरीक्षा समिति अभिलेखों के अभाव में खाली हाथ बैठी है।
जांच समिति का कहना है कि नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी कोई पत्रावली मुहैया नही करा रहेे हैं जिसकी वजह से जांच आगे नही बढ़ पा रही है।
नगर पालिका परिषद गोंडा में वित्तीय वर्ष 2016-17 में रबर मोल्डेड इण्टरलॉकिंग व कई तरह के निर्माण कार्य को लेकर में करीब 63 करोड़ रुपये खर्च कराये गये थे।
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इस दौरान तत्कालीन अपर जिलाधिकारी त्रिलोकी सिंह नगर पालिका अध्यक्ष का पावर सीज होने की दशा में प्रशासक थे। उन्हें की निगरानी में शहर के गई तरह के विकास कार्य कराये गये थे। इस मामले में 16 मार्च 2018 को पीयूष मिश्रा की ओर से नगर में कराये गये विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत आयुक्त से की गई थी।
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तत्कालीन आयुक्त की ओर से मामले की जांच के लिए अपर आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में मुख्य कोषाधिकारी व मुख्य राजस्व अधिकारी वाली तीन सदस्य मण्डल स्तरीय तकनीकि सम्परीक्षा समिति गठित कर जांच सौंप दी थी।
इस मामले की पिछले 10 माह से जांच चल रही है लेकिन अभी तक कोई रिजल्ट सामने नही आया है। जांच की आंच न आने को लेकर नगर के लोगों की ओर से तरह तरह से सवाल उठाये जा रहे हैं।
लोगों का मानना है कि जांच समिति के प्रशासनिक अधिकारी अधिकारियों व नगर पालिका के अधिकारियों कर्मचारियों को बचाने के लिए जांच को लटका रहे हैं। गडबड़ी में नगर पालिका के अधिकारियों की मिलीभगत बतायी जा रही है।
जबकि इस मामले में जांच टीम के अधिकारियों का कहना है कि वे जांच किस वेस पर करें। कई बार मांगने के बावजूद नगर के अधिशाषी अधिकारी की ओर से कोई भी पत्रावली उपलब्ध नही करायी गई है।
जानकारों की माने तो कोई भी घपले की जांच अधिकतम तीन माह में पूरी कर ली जानी चाहिए। ताकि सही समय पर लोगों के सामने सच आ सके। जबकि नगर पालिका के अधिकारी कागजात दिये जाने की दुहाई दी जा रही है।जांच पूरी न होने से कई कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान भी लटक गया है।
जबकि उन्हें 80 फीसद कार्य का भुगतान कर दिया जाना चाहिए। जबकि नगर पालिका के अधिकारियों की ओर से इसमें भी खेल किया जा रहा है सेटिंग गेटिंग वाली कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान जांच के दौरान भी कर दिया गया है इसकी भी मैक इन्फराविजन कार्यदायी संस्था के प्रोपराइटर मुश्फिक अहमद ने आयुक्त से शिकायत कर जांच कराने की मांग की है।
कार्यों में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के मामले में जांच समिति को कुछ कागजात दे दिया है। कुछ और कागजात मांगेंगे तो वह भी मुहैया करा दिया जाएगा। जांच में विभाग सहयोग कर रहा है।
- विजय सेन, ईओ नगर पालिका परिषद
नगर पालिका परिषद गोंडा के विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत की आयुक्त के निर्देश पर जांच समिति को जांच मिली है। जांच तभी शुरू होगी और आगे बढ़ेगी जब इस के बावत पत्रावली मिले। कई बार मांगने पर ईओ की ओर से अभिलेख नही दिये जा रहे हैं। अभिलेख न दिए जाने के मामले में जल्द ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश चन्द्र शर्मा, अपर आयुक्त प्रशासन