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आठ परिषदीय स्कूलों के सैकड़ों बच्चों का पठन पाठन ठप
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:31 PM IST
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बाढ़ से बिगड़े हालात, दो हजार बच्चों की पढ़ाई चौपट
पानी से घिरे आठ परिषदीय स्कूलों में पठन पाठन ठप
अभी भी लाल निशान से पार है घाघरा
बाढ़ के पानी से घिरे स्कूल
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ का कहर क्षेत्र में जारी है। शुक्रवार तक बाढ़ से प्रभावित होने वाले मजरों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ ही 100 के पार हो गई है। वहीं घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के नीचे नहीं हो रहा है जिससे बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलों का दौर जारी है।
वहीं बाढ़ के पानी से घिरे करनैलगंज क्षेत्र के आठ परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले करीब दो हजार बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई है। नदी का जलस्तर 106.226 पर स्थिर रहा। वहीं पानी क्षेत्र में लगातार फैलना जारी है।
बाढ़ ने करीब दो हजार बच्चों की पढ़ाई को चौपट कर दिया है। पहले बाढ़ पीड़ितों के लिए शरणार्थी स्थल का चयन होता था जहां उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए भी शिविर लगाये जाते थे। मगर इस बार की बाढ़ में प्रशासन ऐसी व्यवस्था करने में अस्मर्थ साबित हो रहा है। जिससे बाढ़ के पानी से घिरे करनैलगंज क्षेत्र के आठ परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। स्कूलों में तैनात शिक्षकों को निकटतम विद्यालयों में उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय नकहरा, प्राथमिक विद्यालय अतरसुइया, प्राथमिक विद्यालय घरकुइंया, प्राथमिक विद्यालय बाबा माझा, प्राथमिक स्कूल दिवली, प्राथमिक स्कूल पूरे अंगद सहित अन्य विद्यालय शामिल हैं। जबकि प्राथमिक विद्यालय गौरा सिंहनापुर व प्राथमिक विद्यालय पाल्हापुर को बाढ़ चौकी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। सीमा पर बसे बाराबंकी जिले के प्राथमिक विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालय परसावल पिछले वर्ष ही नदी में समा चुका है। प्राथमिक विद्यालय नैपुरा का अस्तित्व खतरे में हैं। वह भी बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुका है। साथ ही नदी भी कटान करती हुई स्कूल भवन की तरफ बढ़ती चली आ रही है। ऐसे में इन स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई तीन माह के लिए स्थगित हो गई है। बाढ़ पीड़ितों के लिए कोई भी शरणार्थी स्थल नहीं बनाया गया है, बल्कि स्कूलों को बाढ़ चौकी बना दिया गया है। जिससे नौनिहालों का भविष्य अधर में है। खंड शिक्षा अधिकारी अनिल झा ने बताया कि शिक्षा क्षेत्र करनैलगंज के 8 विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके हैं। यहां के शिक्षकों को निकटतम स्कूल से संबद्ध कर दिया गया है। उधर एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि शीघ्र ही स्कूलों को बाढ़ चौकियों पर संचालन कराने की व्यवस्था कराई जाऐगी। अभी बाढ़ से प्रभावित गांवों से लोगों को बाहर निकालने का कार्य चल रहा है।
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फोटो-8-9-10
बाक्स
बाढ़ से प्रभावित गांव
करनैलगज तहसील की एक दर्जन ग्राम पंचायतों चंदापुर किटौली के मजरा विचरा मांझा, नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुंइया, पूरे अंगद, भटपुरवा, दिवली, गौरासिंगपुर, बहुवन मदार मांझा, शिवगढ, अतरसुइया, मोहम्मदपुर गडवार के अब तक 69 मजरे प्रभावित हो चुके हैं। जिसमें अधिकांश जलमग्न हैं। तथा कुछ को पानी ने चौतरफा घेर रखा है। तथा जिले की सीमा पर बसी बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों परसावल, रायपुर, बेहटा, कमियार, नैपूरा के 32 मजरे पहले से ही बाढ प्रभावित है। गुरुवार को ग्राम मोहम्मदपुर गड़वार के मजरा नरेश पुरवा राजपति पुरवा, लोनियन पुरवा, अहिरन पुरवा व ग्राम दिवली व अहिरन पुरवा, खालेपूरवा, दुलारे पुरवा, संभर पुरवा, देवकिशुन पुरवा, सांवल पुरवा, राधे पुरवा, भगत पुरवा, श्यामविहारी पुरवा, गोसांई पुरवा, तीरथराम पुरवा, पुहिल पुरवा, हरीलाल पुरवा एवं मोछारन पुरवा, काशीपुर के मजरे, सीताराम पुरवा, पेंड़ा पुरवा, हनोमान पुरवा, रामसिंह पुरवा, हरिपाल पुरवा, मल्लहन पुरवा, गौघट्टा, जानकी पुरवा, ग्राम घरकुइंया के मजरे नऊवनपुरवा, गोड़ियन पुरवा, चमारन पुरवा एवं धोबिन पुरवा, सोमईपुरवा, सम्भू पुरवा पूरी तरह पहले से ही प्रभावित हैं। वहीं गौरा सिंहनापुर का मजरा पासिंनपुरवा, पूर्वी घरकुइंया का जगन्नाथ पुुरवा, बासुदेव पुरवा, जोगनिपुरवा, लोनियनपुरवा, प्रतापपुर, ग्राम अतरसुइया डीहा व उसके मजरे जगन्नाथ पुरवा, घरुकन पुरवा, बहुवन मदार मांझा का मजरा बाबा मांझा, मर्दन पुुरवा, रामचन्दर पुरवा, लालूपुरवा, भुजवनपुरवा, तेलहनपुरवा, चेला प्रधानपुरवा, ध्रुवराज पुरवा, खजुहनपुरवा, ग्राम शिवगढ का देवी पाण्डेयपुरवा, धनलाल पुरवा, ग्राम पूरे अंगद का सुन्दर प्रधानपुरवा, नेकपाल पुरवा, बधुुवन पुरवा, मतवालन पुरवा, अंजनी पुरवा, आल्हकपुरवा, भटपुरवा, टेंगनहा, बौडिहन पुरवा, चौबे पुरवा एवं सुुंदर पुरवा के आस पास बाढ़ का पानी आ चुका है। लगातार बाढ़ की स्थिति बदतर होती जा रही है। तथा बाढ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
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खाली कराए जा रहे गांव
एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि अब तक गोंडा जिले के 31 गांव बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। वहीं करीब 30 गांव को बाढ़ के पानी ने घेर रखा है। लगातार उनपर नजर रखी जा रही है। प्रभावित हो चुके सभी मजरों में लंच पैकेट पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 30 नावें गांवों में लगाई जा चुकी हैं, जबकि और नावें मगाई जा रही हैं। सभी प्रभावित गांवों में नावों की व्यवस्था कराई जा रही है। जो गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं उन्हें खाली कराया जा रहा है।
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पानी से घिरे आठ परिषदीय स्कूलों में पठन पाठन ठप
अभी भी लाल निशान से पार है घाघरा
बाढ़ के पानी से घिरे स्कूल
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ का कहर क्षेत्र में जारी है। शुक्रवार तक बाढ़ से प्रभावित होने वाले मजरों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ ही 100 के पार हो गई है। वहीं घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के नीचे नहीं हो रहा है जिससे बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलों का दौर जारी है।
वहीं बाढ़ के पानी से घिरे करनैलगंज क्षेत्र के आठ परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले करीब दो हजार बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई है। नदी का जलस्तर 106.226 पर स्थिर रहा। वहीं पानी क्षेत्र में लगातार फैलना जारी है।
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बाढ़ ने करीब दो हजार बच्चों की पढ़ाई को चौपट कर दिया है। पहले बाढ़ पीड़ितों के लिए शरणार्थी स्थल का चयन होता था जहां उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए भी शिविर लगाये जाते थे। मगर इस बार की बाढ़ में प्रशासन ऐसी व्यवस्था करने में अस्मर्थ साबित हो रहा है। जिससे बाढ़ के पानी से घिरे करनैलगंज क्षेत्र के आठ परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। स्कूलों में तैनात शिक्षकों को निकटतम विद्यालयों में उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय नकहरा, प्राथमिक विद्यालय अतरसुइया, प्राथमिक विद्यालय घरकुइंया, प्राथमिक विद्यालय बाबा माझा, प्राथमिक स्कूल दिवली, प्राथमिक स्कूल पूरे अंगद सहित अन्य विद्यालय शामिल हैं। जबकि प्राथमिक विद्यालय गौरा सिंहनापुर व प्राथमिक विद्यालय पाल्हापुर को बाढ़ चौकी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। सीमा पर बसे बाराबंकी जिले के प्राथमिक विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालय परसावल पिछले वर्ष ही नदी में समा चुका है। प्राथमिक विद्यालय नैपुरा का अस्तित्व खतरे में हैं। वह भी बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुका है। साथ ही नदी भी कटान करती हुई स्कूल भवन की तरफ बढ़ती चली आ रही है। ऐसे में इन स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई तीन माह के लिए स्थगित हो गई है। बाढ़ पीड़ितों के लिए कोई भी शरणार्थी स्थल नहीं बनाया गया है, बल्कि स्कूलों को बाढ़ चौकी बना दिया गया है। जिससे नौनिहालों का भविष्य अधर में है। खंड शिक्षा अधिकारी अनिल झा ने बताया कि शिक्षा क्षेत्र करनैलगंज के 8 विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके हैं। यहां के शिक्षकों को निकटतम स्कूल से संबद्ध कर दिया गया है। उधर एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि शीघ्र ही स्कूलों को बाढ़ चौकियों पर संचालन कराने की व्यवस्था कराई जाऐगी। अभी बाढ़ से प्रभावित गांवों से लोगों को बाहर निकालने का कार्य चल रहा है।
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बाढ़ से प्रभावित गांव
करनैलगज तहसील की एक दर्जन ग्राम पंचायतों चंदापुर किटौली के मजरा विचरा मांझा, नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुंइया, पूरे अंगद, भटपुरवा, दिवली, गौरासिंगपुर, बहुवन मदार मांझा, शिवगढ, अतरसुइया, मोहम्मदपुर गडवार के अब तक 69 मजरे प्रभावित हो चुके हैं। जिसमें अधिकांश जलमग्न हैं। तथा कुछ को पानी ने चौतरफा घेर रखा है। तथा जिले की सीमा पर बसी बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों परसावल, रायपुर, बेहटा, कमियार, नैपूरा के 32 मजरे पहले से ही बाढ प्रभावित है। गुरुवार को ग्राम मोहम्मदपुर गड़वार के मजरा नरेश पुरवा राजपति पुरवा, लोनियन पुरवा, अहिरन पुरवा व ग्राम दिवली व अहिरन पुरवा, खालेपूरवा, दुलारे पुरवा, संभर पुरवा, देवकिशुन पुरवा, सांवल पुरवा, राधे पुरवा, भगत पुरवा, श्यामविहारी पुरवा, गोसांई पुरवा, तीरथराम पुरवा, पुहिल पुरवा, हरीलाल पुरवा एवं मोछारन पुरवा, काशीपुर के मजरे, सीताराम पुरवा, पेंड़ा पुरवा, हनोमान पुरवा, रामसिंह पुरवा, हरिपाल पुरवा, मल्लहन पुरवा, गौघट्टा, जानकी पुरवा, ग्राम घरकुइंया के मजरे नऊवनपुरवा, गोड़ियन पुरवा, चमारन पुरवा एवं धोबिन पुरवा, सोमईपुरवा, सम्भू पुरवा पूरी तरह पहले से ही प्रभावित हैं। वहीं गौरा सिंहनापुर का मजरा पासिंनपुरवा, पूर्वी घरकुइंया का जगन्नाथ पुुरवा, बासुदेव पुरवा, जोगनिपुरवा, लोनियनपुरवा, प्रतापपुर, ग्राम अतरसुइया डीहा व उसके मजरे जगन्नाथ पुरवा, घरुकन पुरवा, बहुवन मदार मांझा का मजरा बाबा मांझा, मर्दन पुुरवा, रामचन्दर पुरवा, लालूपुरवा, भुजवनपुरवा, तेलहनपुरवा, चेला प्रधानपुरवा, ध्रुवराज पुरवा, खजुहनपुरवा, ग्राम शिवगढ का देवी पाण्डेयपुरवा, धनलाल पुरवा, ग्राम पूरे अंगद का सुन्दर प्रधानपुरवा, नेकपाल पुरवा, बधुुवन पुरवा, मतवालन पुरवा, अंजनी पुरवा, आल्हकपुरवा, भटपुरवा, टेंगनहा, बौडिहन पुरवा, चौबे पुरवा एवं सुुंदर पुरवा के आस पास बाढ़ का पानी आ चुका है। लगातार बाढ़ की स्थिति बदतर होती जा रही है। तथा बाढ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
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खाली कराए जा रहे गांव
एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि अब तक गोंडा जिले के 31 गांव बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। वहीं करीब 30 गांव को बाढ़ के पानी ने घेर रखा है। लगातार उनपर नजर रखी जा रही है। प्रभावित हो चुके सभी मजरों में लंच पैकेट पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 30 नावें गांवों में लगाई जा चुकी हैं, जबकि और नावें मगाई जा रही हैं। सभी प्रभावित गांवों में नावों की व्यवस्था कराई जा रही है। जो गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं उन्हें खाली कराया जा रहा है।
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