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दतौली गांव के हर घर में बसी हैं भारत रत्न अटल जी की यादें
Updated Sat, 18 Aug 2018 11:04 PM IST
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दतौली के हर घर में बसी हैं अटल जी की यादें
गोंडा। जिले के दिल में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की यादें हमेशा समाई रही हैं। उनके निधन के बाद यादें ताजा हो गर्ई हैं। हर किसी की जुबां पर अटल जी के गोंडा प्रवास की यादों की दास्तां चर्चाओं में है। यहां के दतौली गांव में सबसे ज्याद अटल जी के रुकने की चर्चा है।
उनके पुराने सहयोगियों का कहना हैं कि वे बलरामपुर दौरे पर आते थे तो दतौली गांव जरूर जाते थे। पूर्व राजस्व राज्य मंत्री स्वर्गीय धनश्याम शुक्ल के पिता स्वर्गीय चंद्रशेखर शुक्ल से उनकी काफी घनिष्ठता थी।
वर्ष 1957 में बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ने से पहले से ही अटल जी दतौली गांव जाते थे। वहां वे रुकते भी थे और गांव घूमते थे। वहां स्थित पुरानी हनुमान गढ़ी मंदिर में भी जाते थे। मंदिर से उनका खास जुड़ाव था।
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जनसंघ और आरएसएस विचारधारा के स्वर्गीय चन्द्रशेखर शुक्ल से अटल जी की घनिष्ठता सभी को मालूम थी। कभी कभार लोग अटल से मिलने दतौली ही जाया करते थे। स्वर्गीय शुक्ल की बहन विमला देवी अभी भी हैं वे यादों को ताजा करके हुए बताती हैं कि अटल जी का स्वभाव ऐसा था कि हर कोई उनसे मिलने के लिए इंतजार करता था।
कभी कभी कई दिनों तक नहीं आते थे तो लोग पूछने आते थे। सांसद होने के बाद भी कई बार आए। विमला देवी कहती हैं कि उनके यहां सादा भोजना बनता था और स्वर्गीय चंद्रशेखर शुक्ला जी व अटल जी एक साथ ही बैठकर खाना खाते थे।
1957 से पहले और उसके बाद कई बार गांव आना हुआ। दोनो की घनिष्ठता इतनी थी, कि एक बार कुछ समस्या पर तांगे से अटल जी को स्वर्गीय चंद्रशेखर उन्हें लेकर बाराबंकी तक ले गए। बाद में शुक्ला जी की हत्या हो गई तो अटल जी बहुत दुखी हुए।
उसके बाद उन्होंने ही 1991 में मुजेहना विधानसभा सीट से धनश्याम शुक्ल को विधानसभा का टिकट दिया। बाद में वर्ष 2002 में यूपी में भाजपा-बसपा गठबंधन की सरकार में राज्यमंत्री भी बनवाया। वर्ष 2004 में गोंडा संसदीय सीट से धनश्याम शुक्ल को टिकट भी दिया, लेकिन धनश्याम शुक्ल की मतदान की रात एक घटना में मौत हो गई।
इस दौरान पीएम रहे अटल जी ने दुख जताया। स्वर्गीय धनश्याम शुक्ल की पत्नी पूर्व विधायक नन्दिता शुक्ला ने बताया कि वे 2004 में अटल जी से दिल्ली में जाकर मिलीं थीं।
उस समय वे पीएम थे और उन्हे दतौली में बिताए दिन याद भी थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दतौली से अटल जी का कितना गहरा नाता था। उनके निधन से दतौली गांव और खासकर स्वर्गीय चंद्रशेखर शुक्ल का परिवार खासा दुखी है और उनकी यादों को संजोए है।
गजाधर पुरवा में अटल जी ने लगाई थी चौपाल
-पूर्व पीएम अटल जी की यादें बेलसर के माधवपुर के गजाधरपुरवा के लोगों के दिलों में धड़क रही है। गांव में अटल जी वर्ष 1985 में गए थे। वहां उन्होंने चौपाल लगाई थी और जिले की सियासत को एक नई दिशा दी थी। उस समय उनके साथ मौजूदा समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री भी थे।
गजाधरपुरवा के स्वर्गीय बृजबिहारी ओझा के साथ उन्होने गंाव के लोगों से सीधा संवाद किया था और राष्ट्र प्रेम का संदेश दिया था। गांव के लोगों के बीच 1985 का वह कार्यक्रम अब चर्चा में है।
मंच संचालन पर दी थी बधाई
-भाजपा के वरिष्ठ नेता केके श्रीवास्तव कई सालों से पार्टी के मीडिया का कार्य देख रहे हैं। रामलीला मैदान में एक कार्यक्रम था। बतातें हैं कि उस समय अटल जी मंच पर थे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। कार्यक्रम का संचालन करते समय उन्होंने अटल जी के अंदाज को बयां किया।
जब अटल जी ने माइक संभाला तो उन्होने संचालन के लिए उनकी पीठ थपथपाई। मंच पर पूर्व संासद सत्यदेव सिंह, पूर्व विधायक तुलसी दासराय चंदानी भी मौजूद थे। उस समय उत्साहवर्धन उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी। आज भी वह दिन याद आते ही आंखें आंसुओं से भर जाती हैं।
गोंडा। जिले के दिल में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की यादें हमेशा समाई रही हैं। उनके निधन के बाद यादें ताजा हो गर्ई हैं। हर किसी की जुबां पर अटल जी के गोंडा प्रवास की यादों की दास्तां चर्चाओं में है। यहां के दतौली गांव में सबसे ज्याद अटल जी के रुकने की चर्चा है।
उनके पुराने सहयोगियों का कहना हैं कि वे बलरामपुर दौरे पर आते थे तो दतौली गांव जरूर जाते थे। पूर्व राजस्व राज्य मंत्री स्वर्गीय धनश्याम शुक्ल के पिता स्वर्गीय चंद्रशेखर शुक्ल से उनकी काफी घनिष्ठता थी।
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वर्ष 1957 में बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ने से पहले से ही अटल जी दतौली गांव जाते थे। वहां वे रुकते भी थे और गांव घूमते थे। वहां स्थित पुरानी हनुमान गढ़ी मंदिर में भी जाते थे। मंदिर से उनका खास जुड़ाव था।
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जनसंघ और आरएसएस विचारधारा के स्वर्गीय चन्द्रशेखर शुक्ल से अटल जी की घनिष्ठता सभी को मालूम थी। कभी कभार लोग अटल से मिलने दतौली ही जाया करते थे। स्वर्गीय शुक्ल की बहन विमला देवी अभी भी हैं वे यादों को ताजा करके हुए बताती हैं कि अटल जी का स्वभाव ऐसा था कि हर कोई उनसे मिलने के लिए इंतजार करता था।
कभी कभी कई दिनों तक नहीं आते थे तो लोग पूछने आते थे। सांसद होने के बाद भी कई बार आए। विमला देवी कहती हैं कि उनके यहां सादा भोजना बनता था और स्वर्गीय चंद्रशेखर शुक्ला जी व अटल जी एक साथ ही बैठकर खाना खाते थे।
1957 से पहले और उसके बाद कई बार गांव आना हुआ। दोनो की घनिष्ठता इतनी थी, कि एक बार कुछ समस्या पर तांगे से अटल जी को स्वर्गीय चंद्रशेखर उन्हें लेकर बाराबंकी तक ले गए। बाद में शुक्ला जी की हत्या हो गई तो अटल जी बहुत दुखी हुए।
उसके बाद उन्होंने ही 1991 में मुजेहना विधानसभा सीट से धनश्याम शुक्ल को विधानसभा का टिकट दिया। बाद में वर्ष 2002 में यूपी में भाजपा-बसपा गठबंधन की सरकार में राज्यमंत्री भी बनवाया। वर्ष 2004 में गोंडा संसदीय सीट से धनश्याम शुक्ल को टिकट भी दिया, लेकिन धनश्याम शुक्ल की मतदान की रात एक घटना में मौत हो गई।
इस दौरान पीएम रहे अटल जी ने दुख जताया। स्वर्गीय धनश्याम शुक्ल की पत्नी पूर्व विधायक नन्दिता शुक्ला ने बताया कि वे 2004 में अटल जी से दिल्ली में जाकर मिलीं थीं।
उस समय वे पीएम थे और उन्हे दतौली में बिताए दिन याद भी थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दतौली से अटल जी का कितना गहरा नाता था। उनके निधन से दतौली गांव और खासकर स्वर्गीय चंद्रशेखर शुक्ल का परिवार खासा दुखी है और उनकी यादों को संजोए है।
गजाधर पुरवा में अटल जी ने लगाई थी चौपाल
-पूर्व पीएम अटल जी की यादें बेलसर के माधवपुर के गजाधरपुरवा के लोगों के दिलों में धड़क रही है। गांव में अटल जी वर्ष 1985 में गए थे। वहां उन्होंने चौपाल लगाई थी और जिले की सियासत को एक नई दिशा दी थी। उस समय उनके साथ मौजूदा समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री भी थे।
गजाधरपुरवा के स्वर्गीय बृजबिहारी ओझा के साथ उन्होने गंाव के लोगों से सीधा संवाद किया था और राष्ट्र प्रेम का संदेश दिया था। गांव के लोगों के बीच 1985 का वह कार्यक्रम अब चर्चा में है।
मंच संचालन पर दी थी बधाई
-भाजपा के वरिष्ठ नेता केके श्रीवास्तव कई सालों से पार्टी के मीडिया का कार्य देख रहे हैं। रामलीला मैदान में एक कार्यक्रम था। बतातें हैं कि उस समय अटल जी मंच पर थे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। कार्यक्रम का संचालन करते समय उन्होंने अटल जी के अंदाज को बयां किया।
जब अटल जी ने माइक संभाला तो उन्होने संचालन के लिए उनकी पीठ थपथपाई। मंच पर पूर्व संासद सत्यदेव सिंह, पूर्व विधायक तुलसी दासराय चंदानी भी मौजूद थे। उस समय उत्साहवर्धन उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी। आज भी वह दिन याद आते ही आंखें आंसुओं से भर जाती हैं।