फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   10 lakhs cheated in the name of home delivery

होम डिलीवरी के नाम पर 10 लाख का चूना

Mon, 27 Jan 2020 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jan 2020 10:27 PM IST
विज्ञापन
10 lakhs cheated in the name of home delivery
गोंडा में फर्राटा भरती बाइक टैक्सी। - फोटो : GONDA
गोंडा। परमिट शर्तों के उल्लंघन और ओवरलोडिंग के नाम वाहनों का फट से चालान काटने वाले परिवहन अधिकारियों के लिए जिले में धड़ल्ले दौड़ रही कामर्शियल बाइकें चुनौती बनी हुई हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो बीते तीन साल में देश और विदेश की नामी कंपनियों और आधा दर्जन ई-कॉमर्स साइटों ने परविहन विभाग को अब तक 10 लाख से अधिक का चूना लगाया है। बताया जा रहा है कि होम डिलीवरी के नाम कई नामी कंपनियां लाखों का टैक्स और परमिट का शुल्क हर महीने चोरी कर रही हैं।
विज्ञापन

29 नवंबर 2016 को परिवहन आयुक्त की ओर से बाइक टैक्सी के पंजीकरण संबंधी आदेश जारी किये गये थे। जिसमें चौपहिया और अन्य भारी वाहनों की ही तरह बाइकों का भी व्यावसायिक पंजीकरण किया जायेगा। इस योजना की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य कम पैसे में ही बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराना था। वहीं बाइक का कॉमर्शियल उपयोग करने वालों से परमिट और टैक्स के रूप में राजस्व की वसूली के आदेश दिये गये। लेकिन यहां जिले में बाइकों का प्राइवेट पंजीकरण कराकर उसका व्यावसायिक उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। नवंबर 2016 में हुए इस आदेश को आरटीए की बैठक में साल 2017 में मंजूरी दी गई थी। इसलिए बीते लगभग तीन साल हर साल टैक्स और परमिट फीस न भरकर प्राइवेट बाइकों के व्यावसायिक उपयोग से अब तक लगभग 10 लाख रुपये का चूना लग चुका है। तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन एक भी बाइक टैक्सी का पंजीकरण नहीं हुआ है।
विज्ञापन

100 से अधिक कॉमर्शियल बाइकें सड़क पर
ऑनलाइन बुकिंग के बाद खाने और अन्य सामनों की होम डिलीवरी कराने वाली कंपनियों के डिलीवरी ब्वॉय बाइकों से घरों तक डिलीवरी करते हैं। बताया जा रहा है कि नामी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के साथ ही कई ई-कामर्स साइटों के डिलीवरी ब्वॉय बाइकों से डिलीवरी के लिए दौड़ते हैं। इसकी लगभग 100 से अधिक बाइकें सड़क पर अवैध ढंग से चल रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शहर के रेस्टोरेंट भी इसमें नहीं हैं पीछे
ऑनलाइन बुकिंग साइट ही नहीं यहां शहर के कई नामी रेस्टोरेंट भी होम डिलीवरी का दावा करते हैं। बाजारों में इसके लिए भी बड़े-बड़े बैनर पर फ्री होम डिलीवरी की स्कीम पेश की जाती है। इतना ही बाइक पर डिलीवरी बॉक्स बनाकर उसपर संबंधित रेस्टोरेंट और होटल का नाम भी लिखा रहता है। लेकिन इसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

ये बाइक टैक्सी पंजीकरण का शुल्क
बाइक का पंजीकरण शुल्क 300 रुपये
तिमाही टैक्स 660 रुपये
परमिट फीस 2700 रुपये
बाइक टैक्सी का पंजीकरण अनिवार्य
किसी भी निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग करना नियम के खिलाफ है। बाइक को भी किसी कंपनी या प्रतिष्ठान की ओर से इस तरह से उपयोग में लाये जाने के लिए बाइक टैक्सी का पंजीकरण करवाना आवश्यक है। जिले में करीब सौ से अधिक बाइक टैक्सियां अवैध रूप से दौड़ रही हैं। ऐसे सभी वाहन को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर उनके खिलाफ सीज और चालान की कार्रवाई की जायेगी। -राजेश कुमार श्रीवास्तव, संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed