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पंचायत भवन का जिम्मा देने पर भड़के चौकीदार
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ग्रामीण चौकीदार अधिकार मोर्चा की ओर से बुधवार को समता भवन स्थित कार्यालय पर मासिक बैठक की गई। जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात करीब 1100 चौकीदारों की स्थिति और दुर्दशा पर चर्चा हुई। इस दौरान चौकीदारों ने कहा कि हमारी मांगों को नहीं मांगा गया तो धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
चर्चा के दौरान मुख्य रुप से पंचायत भवनों में संचालित ग्राम सचिवालयों में रात में ड्यूटी करने के प्रशासनिक दबाव को लेकर सवाल किया गया। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन उन पर नये-नये काम का दबाव बनाता है, लेकिन नये कामों को लेकर वेतनवृद्धि या भत्ता नहीं दिया जाता। न ही सुविधाएं ही उपलब्ध हो पा रही है। कहा कि जिला प्रशासन की ओर से जून महीने से ग्राम सचिवालयों की देख-रेख करने को कहा जा रहा है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए भत्ता देने की कोई बात नहीं हो रही।
संगठन के जिलाध्यक्ष घूरा पासवन ने कहा कि रोजाना करीब 84 रुपये पर काम करना होता है। पूरी रात गांव की चौकीदारी की जिम्मेदारी होती है। जबकि इसी काम के लिए बिहार सरकार चौकीदारों को 25 हजार रुपये मासिक वेतन देती है, जबकि यहां सिर्फ 2500 रुपये मिलता है। उन्होंने कहा कि चौकीदारों को चोर, उचक्कों या अन्य अपराधियों से जान-माल का नुकसान होता है, लेकिन जिला प्रशासन या शासन उनको बीमा का भी लाभ नहीं देती। न ही आत्मरक्षा के लिए लाठी-डंडा के अलावा कोई हथियार ही देती है। कई चौकीदारों की मौत होने के बाद उनकी जगह नवीन तैनाती भी नहीं हुई। न हीं मृतक आश्रितों को कोई सहायता दिया जाता है। प्रदेश सरकार ने भी ग्रामीण चौकीदारों को साइकिल का भत्ता, टार्च, जूता, मुरेठा, बेल्ट उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन बड़ी मुश्किल से एक थाना क्षेत्र में 10 लोगों को मिल पाया। जबकि उसके दस से पंद्रह गुना लोग वंचित रह गये। बैठक में राजनारायण यादव, विजय सुब्बा, नथुनी, हरेंद्र पासवान समेत अन्य लोग शामिल हुए।
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चर्चा के दौरान मुख्य रुप से पंचायत भवनों में संचालित ग्राम सचिवालयों में रात में ड्यूटी करने के प्रशासनिक दबाव को लेकर सवाल किया गया। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन उन पर नये-नये काम का दबाव बनाता है, लेकिन नये कामों को लेकर वेतनवृद्धि या भत्ता नहीं दिया जाता। न ही सुविधाएं ही उपलब्ध हो पा रही है। कहा कि जिला प्रशासन की ओर से जून महीने से ग्राम सचिवालयों की देख-रेख करने को कहा जा रहा है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए भत्ता देने की कोई बात नहीं हो रही।
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संगठन के जिलाध्यक्ष घूरा पासवन ने कहा कि रोजाना करीब 84 रुपये पर काम करना होता है। पूरी रात गांव की चौकीदारी की जिम्मेदारी होती है। जबकि इसी काम के लिए बिहार सरकार चौकीदारों को 25 हजार रुपये मासिक वेतन देती है, जबकि यहां सिर्फ 2500 रुपये मिलता है। उन्होंने कहा कि चौकीदारों को चोर, उचक्कों या अन्य अपराधियों से जान-माल का नुकसान होता है, लेकिन जिला प्रशासन या शासन उनको बीमा का भी लाभ नहीं देती। न ही आत्मरक्षा के लिए लाठी-डंडा के अलावा कोई हथियार ही देती है। कई चौकीदारों की मौत होने के बाद उनकी जगह नवीन तैनाती भी नहीं हुई। न हीं मृतक आश्रितों को कोई सहायता दिया जाता है। प्रदेश सरकार ने भी ग्रामीण चौकीदारों को साइकिल का भत्ता, टार्च, जूता, मुरेठा, बेल्ट उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन बड़ी मुश्किल से एक थाना क्षेत्र में 10 लोगों को मिल पाया। जबकि उसके दस से पंद्रह गुना लोग वंचित रह गये। बैठक में राजनारायण यादव, विजय सुब्बा, नथुनी, हरेंद्र पासवान समेत अन्य लोग शामिल हुए।
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