{"_id":"593ae5d44f1c1b366e9c90dc","slug":"nalos-are-formed-from-the-anuleom-inverse","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनुलोम-विलोम से नाड़ियां होती हैं शुद्ध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनुलोम-विलोम से नाड़ियां होती हैं शुद्ध
अमर उजाला ब्यूरो/ गाजीपुर
Updated Fri, 09 Jun 2017 11:45 PM IST
विज्ञापन
दीया हास्टल में योगा करते बच्चे।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम से पूर्व योगाचार्यों की ओर से योग कक्षा चलाने के साथ ही उनसे होने वाले लाभ और योगाभ्यास भी कराया जा रहा है। शुक्रवार को योग कक्षा में योगाचार्य अमित पांडेय ने लोगों को अनुलोम-विलोम योग का अभ्यास कराने के साथ ही उसके फायदे और सावधानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने अनुलोम विलोम को एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम बताया। इसे नियमित रूप से करने पर शरीर की सारी नाड़ियां शुद्ध और निरोग रहती हैं। इसके अलावा इस आसान को करने से सर्दी, जुकाम और दमा जैसी बीमारियों में राहत मिलती है।
योगाचार्य ने बताया कि इस प्राणायाम में सांस लेने की क्रिया को बार-बार किया जाता है। अनुलोम का मतलब होता है सीधा और विलोम का मतलब होता है उल्टा। इस प्राणायाम याने की अनुलोम विलोम में नाक के दाए छिद्र से सांस को खींचने के साथ बांए नाक के छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं।
विज्ञापन
अनुलोम-विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोधक प्राणायाम के नाम से भी जाना जाता है। बताया कि इस आसन को करने के लिए उम्र का बंधन नहीं है। हर उम्र के व्यक्ति इसका लाभ उठा सकते है। उन्होंने बताया कि अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करते वक्त तीन क्रियाएं की जाती है, पूरक, कुंभक और रेचक। इसको नियमित रूप से 10 मिनट करने पर भी स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते है।
इस प्राणायाम से न केवल शरीर स्वस्थ बनाता है बल्कि मन को भी शुद्ध करके सकारात्मकता और आत्मविश्वास प्रदान करता है। इसलिए प्राणायाम का पूर्ण रूप से लाभ लेने के लिए प्राणायाम करते समय सकारात्मक संकल्प लेना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने अनुलोम विलोम को एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम बताया। इसे नियमित रूप से करने पर शरीर की सारी नाड़ियां शुद्ध और निरोग रहती हैं। इसके अलावा इस आसान को करने से सर्दी, जुकाम और दमा जैसी बीमारियों में राहत मिलती है।
विज्ञापन
योगाचार्य ने बताया कि इस प्राणायाम में सांस लेने की क्रिया को बार-बार किया जाता है। अनुलोम का मतलब होता है सीधा और विलोम का मतलब होता है उल्टा। इस प्राणायाम याने की अनुलोम विलोम में नाक के दाए छिद्र से सांस को खींचने के साथ बांए नाक के छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं।
विज्ञापन
अनुलोम-विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोधक प्राणायाम के नाम से भी जाना जाता है। बताया कि इस आसन को करने के लिए उम्र का बंधन नहीं है। हर उम्र के व्यक्ति इसका लाभ उठा सकते है। उन्होंने बताया कि अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करते वक्त तीन क्रियाएं की जाती है, पूरक, कुंभक और रेचक। इसको नियमित रूप से 10 मिनट करने पर भी स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते है।
इस प्राणायाम से न केवल शरीर स्वस्थ बनाता है बल्कि मन को भी शुद्ध करके सकारात्मकता और आत्मविश्वास प्रदान करता है। इसलिए प्राणायाम का पूर्ण रूप से लाभ लेने के लिए प्राणायाम करते समय सकारात्मक संकल्प लेना चाहिए।