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Abbas Ansari: पिता की कब्र पर फातिहा पढ़ने आ सकते हैं अब्बास अंसारी, 28 को है मुख्तार अंसारी की पहली बरसी

Sat, 22 Mar 2025 10:07 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 22 Mar 2025 10:07 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब्बास अंसारी की जेल से रिहाई के बाद लोग कयास लगा रहे हैं कि पिता की पहली बरसी पर फातिहा पढ़ने आ सकते हैं। हालांकि परिवार वाले इस पर कुछ नहीं बता रहे।  

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Mau MLA Abbas Ansari may come to read Fatiha on Mukhtar Ansari grave in ghazipur
अब्बास अंसारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मऊ विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कासगंज जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई की खबर सुनते हुए शुभचिंतकों में खुशी दौड़ गई। अब हर जुबां पर यही चर्चा है कि वह अपने मरहूम मुख्तार अंसारी की पहली बरसी पर 28 मार्च को कालीबाग कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ने जरूर आएंगे। हालांकि परिवार के लोग इस बाबत कुछ नहीं बोल रहे हैं।
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दो साल आठ महीने बाद जेल से हुए रिहा
मऊ से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक और मरहूम गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को दो साल आठ महीने बाद शुक्रवार को कासगंज जेल से रिहा कर दिया गया। हालांकि इसके पहले पेरोल पर वह जेल से दो बार बाहर आ चुके हैं।
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वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 7 मार्च 2025 को उन्हें गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद चित्रकूट कोर्ट ने 2-2 लाख रुपये के जमानतदारों की जमानत पर उनकी रिहाई का आदेश जारी किया। अब्बास अंसारी को प्रवर्तन निदेशालय ने नवंबर 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था।
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ईद पर भी घर रह सकते हैं विधायक अब्बास अंसारी

चित्रकूट जेल से फरवरी 2023 में प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए कासगंज जेल भेज दिया गया। इस दौरान अब्बास पर कई अन्य मामले भी दर्ज हुए थे। इधर, उनके अंतरिम जमानत की खबर मिलने पर मुहम्मदाबाद स्थित उनके पैतृक घर में खुशी का माहौल है। समर्थकों और परिजनों को उम्मीद है कि अब्बास अंसारी अपने पिता, मरहूम मुख्तार अंसारी की पहली बरसी पर 28 मार्च को कालीबाग कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ने जरूर आएंगे।

इसके साथ ही, 30-31 मार्च को पड़ने वाली ईद भी वह यहीं मना सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों के तहत उन्हें लखनऊ स्थित विधायक निवास पर रहने का आदेश दिया है।

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मऊ या गाजीपुर जाने के लिए उन्हें अदालत से अनुमति लेनी होगी और स्थानीय पुलिस को भी सूचित करना होगा। अब यह देखना होगा कि क्या अब्बास अंसारी अपने पिता की कब्र पर दुआ के लिए पहुंच पाते हैं या नहीं और इस बार उनकी ईद कहां मनती है।

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