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Ghazipur News: नशे के इंजेक्शन से 2 साल में 10 मरीजों की मौत, जद में 13 साल का बच्चा और बुजुर्ग भी

Wed, 16 Sep 2026 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 01:27 AM IST
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10 patients died from drug injections in two years; victims include a 13-year-old child and an elderly person.
गाजीपुर। जिले के युवा नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि क्या बच्चा और क्या बुजुर्ग...इनमें नशे ने जकड़ रखा है। यह हम नहीं गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज के 200 शय्या अस्पताल में संचालित ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर के आंकड़े बता रहे हैं। यहां इंजेक्शन के जरिये नशा करने वाले करीब 192 लोग पंजीकृत हैं। इनमें 16 से 38 वर्ष के करीब 35 मरीज हैं। चिंता की बात यह है कि इस सूची में 13 वर्ष का एक बच्चा और 80 वर्ष से अधिक उम्र के एक बुजुर्ग भी शामिल हैं। बीते दो वर्षों में करीब 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। सेंटर में इलाज कराने वाले लोगों ने बताया कि शुरुआत में इंजेक्शन के जरिये जब शौकिया तौर पर नशा शुरू किया तो लगता था कि इसे जब चाहे जैसे चाहे छोड़ देंगे। लेकिन कब नशे ने उनको अपनी गिरफ्त में ले लिया उन्हें पता ही नहीं चला। हालत ये है कि अब इससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया। हालांकि सेंटर में उनका इलाज चल रहा है।
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केस 1

दोस्तों के साथ शुरू किया नशा, अब छोड़ना भी मुश्किल

वाराणसी स्थित एक महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल में रहने वाले तीन छात्र दूसरे छात्रों के संपर्क में आए। यहीं से उन्होंने इंजेक्शन के जरिये नशा करना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें लगा कि कुछ दिनों में नशा छोड़ देंगे। लेकिन धीरे-धीरे आदत इतनी बढ़ गई कि अब वह इसे छोड़ नहीं पा रहे हैं। तीनों फिलहाल ओएसटी सेंटर में थेरेपी करा रहे हैं। पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ नशा अब उनके लिए ऐसी लत बन चुका है, जिससे बाहर निकलने के लिए लगातार उपचार की जरूरत पड़ रही है।
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केस 2

जिस उम्र में खेलना था, उस उम्र में नशे का इलाज

ओएसटी सेंटर में 13 वर्ष का एक बच्चा भी पंजीकृत है। जिस उम्र में बच्चे स्कूल, खेल और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में उसका नाम इंजेक्शन से नशा करने वाले मरीजों की सूची में शामिल हो गया। सेंटर में उसका पंजीकरण यह बताता है कि नशे का खतरा केवल युवाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि किशोर उम्र तक पहुंच चुका है।
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केस -3

80 पार उम्र में भी नशे से पीछा नहीं छूटा

नशे की गिरफ्त उम्र देखकर नहीं लगती। सेंटर में 80 वर्ष से अधिक उम्र का एक बुजुर्ग भी पंजीकृत है। इसके अलावा 40 से 50 वर्ष के करीब 20, 50 से 60 वर्ष के करीब 25 और 60 से 70 वर्ष के करीब तीन मरीज भी उपचार करा रहे हैं। यानी नशे की समस्या किशोर से लेकर बुजुर्ग तक अलग-अलग उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है।

80 मरीज रोजाना पहुंच रहे सेंटर

मेडिकल कॉलेज में मार्च 2024 में ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर शुरू किया गया था। नशा मुक्ति केंद्र के इंचार्ज डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि सेंटर में करीब 192 मरीज पंजीकृत हैं और रोजाना 70 से 80 मरीज पहुंचते हैं। इनमें 18 से 25 वर्ष के करीब 20 से 22 मरीज हैं।

मॉर्फिन को एविल या फेंटानिल इंजेक्शन में मिलाकर लेते हैं

नशा मुक्ति केंद्र के इंचार्ज डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि ज्यादातर लोग हेरोइन और मॉर्फिन को एविल या फेंटानिल इंजेक्शन में मिलाकर लेते हैं। हेरोइन और स्मैक का इंजेक्शन लगाने से नसों और मांसपेशियों को काफी नुकसान पहुंचता है। नशे की मात्रा शरीर में कम होने पर हाथ कांपने, दर्द, अनिद्रा, दस्त, पेट में मरोड़ और नाक से पानी आने जैसी समस्या होने लगती है। इससे घबराकर मरीज दोबारा इंजेक्शन लगा लेता है।

एड्स संक्रमण का भी सबसे ज्यादा खतरा

ओएसटी सेंटर के नोडल डॉ. अमित यादव ने बताया कि इंजेक्शन से नशा करने वालों में एड्स से संक्रमित होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। उत्तर प्रदेश एड्स कंट्रोल सोसाइटी के तहत मेडिकल कॉलेज में ओएसटी सेंटर संचालित है। मरीजों की एक से दो वर्ष तक थेरेपी चलती है। इस दौरान हर तीन माह में आरएनसी और हर छह माह में एचआईवी की जांच कराई जाती है। ---


नशे की लत गंभीर जरूर है, लेकिन मरीज को इससे बाहर निकालने के लिए उपचार की व्यवस्था है। नशीले इंजेक्शन की डिटॉक्सिफिकेशन के लिए आवश्यक जांच के बाद ओएसटी सेंटर में बुप्रोनॉर्फिन दवा दी जाती है। इसे सेंटर में ही दवा वितरक के सामने खिलाया जाता है और घर ले जाने के लिए नहीं दी जाती। थेरेपी के माध्यम से मरीज को धीरे-धीरे नशीले इंजेक्शन की निर्भरता से बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है।-डॉ. प्रदीप यादव, नशा मुक्ति केंद्र के इंचार्ज।
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