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पत्रावली जमा, मार्च में सौगात की उम्मीद
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ताड़ीघाट-मऊ रेल परियोजना के पहले चरण का काम अंतिम दौर में है। इसको देखते हुए कार्यदायी संस्था आरवीएनएल की ओर से रेल लाइन पर ट्रेनों की संचालन का परीक्षण कराने के लिए कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) को पत्रावली जमा की गई है। कार्यदायी संस्था की मानें तो मार्च रेल ट्रैक का परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान सबकुछ ठीक रहा तो मार्च में ही रेलवे लाइन का उद्घाटन होने की संभावना है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। संभावित तौर पर पीएम के हाथों ही समर्पित किया जाएगा।
इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का बृहस्पतिवार को रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के मुख्य परियोजना प्रबंधक विकास चंद्रा ने निरीक्षण कर समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने छह जगहों पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने धीमे कार्य पर मातहतों चेतावनी दी। कहा कि दिसंबर तक हर हाल में नई रेल लाइन को सिटी से जोड़ देना है। इस दौरान उन्होंने बताया कि परियोजना के सीआरएस के लिए सभी जरूरी पत्रावलियां जमा हो चुकी है।
रेल अधिकारियों के मुताबिक परियोजना का 90 फीसदी कार्य हो चुका है। इसे तय समय में पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था दो शिफ्टों में निर्माण कार्य में जुटी है। सोनवल व घाट पर बन रहे नए रेलवे स्टेशन का 95 फीसदी कार्य हो चुका है। जबकि रेल एप्रोच वायडक का 90 फीसदी और पैनल रूम का 20 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे ही रेल सह रोड पुल का करीब 95 फीसदी, स्टेशनों के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो चुका है। जबकि अन्य जगहों पर कार्य तेजी से चल रहा है।
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किसी स्तर पर न बरतें कोताही: विकास चंद्रा
मुख्य परियोजना प्रबंधक विकास चंद्रा ने कांफ्रेंस हाल में निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मातहतों को निर्देशित किया कि मार्च में परियोजना का पीएम के हाथों उद्घाटन होना है। इससे निर्माण कार्य में किसी स्तर पर कोताही न बरती जाए। इसके बाद वह सीधे रेल सह कम रोड ब्रिज पहुंचे। जहां उन्होंने पुल का निरीक्षण किया। इसके बाद उनका काफिला सोनवल, सुखदेवपुर, चकफैज आदि जगहों पर पहुंचा। सभी साइटों पर जायजा लेने के बाद मातहतों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पटेल आयोग की संस्तुति के बावजूद साल 2016 में शुरू हुआ काम
साल 1962 में गाजीपुर से लोक सभा सदस्य विश्वनाथ सिंह गहमरी के आग्रह पर संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पूर्वांचल की विकास के लिए पटेल आयोग का गठन किया था। इसमें आयोग के द्वारा जिले व पूर्वांचल के विकास के लिए तमाम सिफारिशों के साथ ताड़ीघाट को मऊ रेल लाइन जोडने की कवायद में गंगा पर रेल कम रोड ब्रिज की संस्तुति की थी। इसके बाद 14 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। जिसकी लागत करीब 1766 करोड़ रुपये है।
छह बड़ी और तीन छोटी पुलिया से गुजरेगी रेल लाइन
इस परियोजना के तहत तीन जगहों पर रेल लाइन और चार जगहों पर सड़क के ऊपर से होकर गुजरेगी। वहीं नए रेल रूट पर सोनवल से सिटी तक छह बड़ी व तीन छोटी पुलिया है। जिससे होकर नई रेल लाइन गुजरेगी। निरीक्षण के दौरान आरवीएनएल के पीडी जीवेश ठाकुर, एस पी सिंग्ला कंस्ट्रक्शन के पीएम अमनदीप गोयल, जीपीटी के वाइस प्रेसिडेंट अश्वनी कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का बृहस्पतिवार को रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के मुख्य परियोजना प्रबंधक विकास चंद्रा ने निरीक्षण कर समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने छह जगहों पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने धीमे कार्य पर मातहतों चेतावनी दी। कहा कि दिसंबर तक हर हाल में नई रेल लाइन को सिटी से जोड़ देना है। इस दौरान उन्होंने बताया कि परियोजना के सीआरएस के लिए सभी जरूरी पत्रावलियां जमा हो चुकी है।
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रेल अधिकारियों के मुताबिक परियोजना का 90 फीसदी कार्य हो चुका है। इसे तय समय में पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था दो शिफ्टों में निर्माण कार्य में जुटी है। सोनवल व घाट पर बन रहे नए रेलवे स्टेशन का 95 फीसदी कार्य हो चुका है। जबकि रेल एप्रोच वायडक का 90 फीसदी और पैनल रूम का 20 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे ही रेल सह रोड पुल का करीब 95 फीसदी, स्टेशनों के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो चुका है। जबकि अन्य जगहों पर कार्य तेजी से चल रहा है।
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किसी स्तर पर न बरतें कोताही: विकास चंद्रा
मुख्य परियोजना प्रबंधक विकास चंद्रा ने कांफ्रेंस हाल में निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मातहतों को निर्देशित किया कि मार्च में परियोजना का पीएम के हाथों उद्घाटन होना है। इससे निर्माण कार्य में किसी स्तर पर कोताही न बरती जाए। इसके बाद वह सीधे रेल सह कम रोड ब्रिज पहुंचे। जहां उन्होंने पुल का निरीक्षण किया। इसके बाद उनका काफिला सोनवल, सुखदेवपुर, चकफैज आदि जगहों पर पहुंचा। सभी साइटों पर जायजा लेने के बाद मातहतों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पटेल आयोग की संस्तुति के बावजूद साल 2016 में शुरू हुआ काम
साल 1962 में गाजीपुर से लोक सभा सदस्य विश्वनाथ सिंह गहमरी के आग्रह पर संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पूर्वांचल की विकास के लिए पटेल आयोग का गठन किया था। इसमें आयोग के द्वारा जिले व पूर्वांचल के विकास के लिए तमाम सिफारिशों के साथ ताड़ीघाट को मऊ रेल लाइन जोडने की कवायद में गंगा पर रेल कम रोड ब्रिज की संस्तुति की थी। इसके बाद 14 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। जिसकी लागत करीब 1766 करोड़ रुपये है।
छह बड़ी और तीन छोटी पुलिया से गुजरेगी रेल लाइन
इस परियोजना के तहत तीन जगहों पर रेल लाइन और चार जगहों पर सड़क के ऊपर से होकर गुजरेगी। वहीं नए रेल रूट पर सोनवल से सिटी तक छह बड़ी व तीन छोटी पुलिया है। जिससे होकर नई रेल लाइन गुजरेगी। निरीक्षण के दौरान आरवीएनएल के पीडी जीवेश ठाकुर, एस पी सिंग्ला कंस्ट्रक्शन के पीएम अमनदीप गोयल, जीपीटी के वाइस प्रेसिडेंट अश्वनी कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे।