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Ghazipur News: मन के घाव छिपाएं नहीं, अपनों से साझा करें, लें विशेषज्ञ की मदद

Sun, 11 Oct 2026 01:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:37 AM IST
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Do not hide emotional wounds; share them with your loved ones and seek expert help.
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शा
गाजीपुर। तन के घाव दिखाई देते हैं, लेकिन मन के घाव अक्सर छिपे रह जाते हैं। इन्हें दबाने के बजाय किसी करीबी से साझा करना चाहिए और परेशानी का समाधान न हो तो विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शनिवार को राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. प्रदीप यादव ने छात्राओं को यही संदेश दिया। वहीं, राजकीय गाजीपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, रौजा में आयोजित कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक भ्रांतियों, तनाव प्रबंधन और डिजिटल युग की चुनौतियों पर चर्चा की गई।
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महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में डॉ. प्रदीप यादव ने कहा कि जीवन में तनाव हर जगह है, लेकिन यह स्वयं को बेहतर साबित करने का अवसर भी देता है। जीवन की हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। सफलता और असफलता जीवन के क्षण हैं, इसलिए किसी को भी इन्हें अपने सिर पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी की तुलना दूसरे से नहीं करनी चाहिए।
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कार्यक्रम से पहले उन्होंने छात्राओं की ओर से बनाए गए चार्ट और पोस्टरों का अवलोकन किया।
तनाव का असर शरीर पर भी पड़ता है
राजकीय गाजीपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में प्राचार्य प्रो. डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण मुद्दा है।
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कार्यशाला में जीवनशैली में सुधार, योग, तनाव प्रबंधन और समय पर परामर्श के जरिये मानसिक समस्याओं की रोकथाम पर जोर दिया गया। मानसिक तनाव के उच्च रक्तचाप, मधुमेह और पाचन तंत्र संबंधी विकारों पर पड़ने वाले प्रभावों तथा इनके समग्र उपचार पर भी चर्चा हुई। लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों व युवाओं में बढ़ रही चिंता और अवसाद को नियंत्रित करने के उपाय भी बताए गए। डॉ. सुबोध त्रिपाठी, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. नितिन त्यागी, डॉ. विवेक पांडेय और डॉ. सुधीर चौहान ने भी विचार रखे। अंत में छात्र-छात्राओं और चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने तथा मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की शपथ ली।
पोस्टर में पलक और चार्ट में मुस्कान प्रथम
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से वर्ष 2026 की थीम जीवन के अनुभवों को सुना जाए : सच्ची आवाजें, सच्चे बदलाव पर चार्ट, पोस्टर, विचार-अभिव्यक्ति प्रतियोगिता और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। 30 से अधिक छात्राओं ने मानसिक स्वास्थ्य के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को चित्रों व रंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

पोस्टर प्रतियोगिता में पलक चौरसिया प्रथम, खुशबू चौहान द्वितीय और ऋतु राज तृतीय रहीं। अलीशा परवीन और अलीशा खान के प्रयासों की भी सराहना की गई। चार्ट प्रतियोगिता में मुस्कान प्रथम, आनंदी गुप्ता द्वितीय और शाइस्ता तृतीय रहीं। हुमैरा फातिमा और नेहा वर्मा के प्रयास भी सराहे गए। पोस्टर प्रतियोगिता का मूल्यांकन डॉ. सारिका सिंह, डॉ. इखलाक खान और डॉ. ओम शिवानी ने किया, जबकि चार्ट प्रतियोगिता का निर्णय डॉ. निरंजन कुमार यादव, डॉ. नेहा कुमारी और डॉ. रामनाथ केसरवानी ने किया।
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