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न्यायालय ने दारोगा सहित तीन को भेजा जेल
Updated Fri, 25 May 2018 11:12 PM IST
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मरदह थाना क्षेत्र के घरिहां निवासी एवं शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कुबेरनाथ सिंह को मारने-पीटने एवं फर्जी मुकदमे में फंसाने के संबंध में पीड़ित ने एसआई सुदामा यादव सहित अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में शुक्रवार को पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एसआई सहित तीन पुलिस कर्मियों को पेश किया। जहां न्यायालय ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
पीड़ित के इस खबर को अमर उजाला ने बीते वर्ष 20 जुलाई को पृष्ठ संख्या तीन पर आईजी जोन से मांगा स्पष्टीकरण शीर्षक के साथ प्रमुखता से छापा था। मालूम हो कि बीते 14 अप्रैल 1991 में पीड़ित कुबेरानाथ सिंह को मारने-पीटने एवं फर्जी मुकदमे में फंसाने के मामले में मरदह थाना पर तैनात तत्कालीन एसआई सुदामा यादव सहित अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी विवेचना सीबीसीआईडी की ओर से की गई थी। आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रस्तुत किया गया था। करीब 25 वर्ष पुराने इस मामले में आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित करने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से तीन जुलाई 2017 को गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए एसपी गाजीपुर को पत्र भेजा था। इसके बाद भी आरोपी न तो न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही एसपी की ओर से उन्हें गिरफ्तार करा कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। परिवादी कुबेरनाथ सिंह के पुत्र छपरा विश्वविद्यालय के कुलपति डा. हरिकेश सिंह ने उच्च न्यायालय में इस संबंध में याचिका प्रस्तुत की। न्यायालय ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए 17 मई को आदेश पारित किया। आईजी जोन वाराणसी से शपथ पत्र पर गाजीपुर के एसपी द्वारा वारंट का तामिला न कराए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके लिए 24 मई की तिथि नियत की थी। उस दिन उच्च न्यायालय में उपस्थित होकर सभी गिरफ्तार कर न्यायालय शपथ पत्र आईजी जोन की तरफ से दिया गया था। इस पर उच्च न्यायालय ने 31 मई की तिथि निर्धारित की है। आनन-फानन में रिटायर्ड एसआई सुदामा यादव, रिटायर्ड पुलिसकर्मी दुलारे सिंह और वाराणसी में तैनात सिपाही धर्मदेव तिवारी को पुलिस गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तीन आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया। आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 26 मई तिथि निर्धारित की गई है। इस संबंध में परिवादी अधिवक्ता संजय कुमार राय ने जानकारी दी।
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पीड़ित के इस खबर को अमर उजाला ने बीते वर्ष 20 जुलाई को पृष्ठ संख्या तीन पर आईजी जोन से मांगा स्पष्टीकरण शीर्षक के साथ प्रमुखता से छापा था। मालूम हो कि बीते 14 अप्रैल 1991 में पीड़ित कुबेरानाथ सिंह को मारने-पीटने एवं फर्जी मुकदमे में फंसाने के मामले में मरदह थाना पर तैनात तत्कालीन एसआई सुदामा यादव सहित अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी विवेचना सीबीसीआईडी की ओर से की गई थी। आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रस्तुत किया गया था। करीब 25 वर्ष पुराने इस मामले में आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित करने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से तीन जुलाई 2017 को गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए एसपी गाजीपुर को पत्र भेजा था। इसके बाद भी आरोपी न तो न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही एसपी की ओर से उन्हें गिरफ्तार करा कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। परिवादी कुबेरनाथ सिंह के पुत्र छपरा विश्वविद्यालय के कुलपति डा. हरिकेश सिंह ने उच्च न्यायालय में इस संबंध में याचिका प्रस्तुत की। न्यायालय ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए 17 मई को आदेश पारित किया। आईजी जोन वाराणसी से शपथ पत्र पर गाजीपुर के एसपी द्वारा वारंट का तामिला न कराए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके लिए 24 मई की तिथि नियत की थी। उस दिन उच्च न्यायालय में उपस्थित होकर सभी गिरफ्तार कर न्यायालय शपथ पत्र आईजी जोन की तरफ से दिया गया था। इस पर उच्च न्यायालय ने 31 मई की तिथि निर्धारित की है। आनन-फानन में रिटायर्ड एसआई सुदामा यादव, रिटायर्ड पुलिसकर्मी दुलारे सिंह और वाराणसी में तैनात सिपाही धर्मदेव तिवारी को पुलिस गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तीन आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया। आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 26 मई तिथि निर्धारित की गई है। इस संबंध में परिवादी अधिवक्ता संजय कुमार राय ने जानकारी दी।
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