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विद्यालय प्रबंधक और ग्राम पंचायतें भी बनी लापरवाह
Ghazipur
Updated Sat, 14 Dec 2013 05:44 AM IST
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गाजीपुर। डीआरडीए से सांसद-विधायक निधि जारी करोड़ों रुपये का हिसाब देने में कार्यदायी संस्थाओं के साथ ही विद्यालय प्रबंधक कतरा रहे हैं। इससे सरकारी धन में वित्तीय अनियमितता की आशंका विभागीय अधिकारी जता रहे हैं। तीन वर्षों से जिन-जिन विभागों को धन जारी किया गया है वहां से कार्यपूर्ति अभी तक नहीं प्राप्त हुई है। इसको लेकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई है। उन्होेंने निर्देश दिया है कि तत्काल संबंधित संस्थाओं के लोगों की बैठक आयोजित कर कार्यपूर्ति जमा कराई जाए।
वित्तीय वर्ष 2010-11 से लेकर अब तक सांसद-विधायक निधि में करोड़ों रुपये कार्यदायी संस्थाओं को जारी किए गए हैं। एक विधायक को प्रति वर्ष करोड़ से अधिक की धनराशि विकास कार्यों के लिए जारी की जाती है। जिले में पांच विधायक हैं। जिनकी तीन वर्ष में करीब 15 करोड़ रुपये की धनराशि से विकास कार्य हुआ है। सांसद को भी करीब पांच करोड़ रुपये मिलते हैं। करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को लेकर जिलाधिकारी ने चिंता जताई है। डीएम की सख्ती के बाद डीआरडीए ने भी हाथ पैर चलाना शुरू कर दिया है। विधायकों एवं सांसदों के प्रस्ताव पर विकास कार्य कराए जाते हैं। ज्यादातर धनराशि विधायकों ने विद्यालयों के भवन निर्माण पर दी है। करीब 40 प्रतिशत की धनराशि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों के विकास पर देते हैं। इन्हें डीआरडीए से जब पहली किस्त जारी होती है तो उनके अभिलेखों की जांच की जाती है। इसके बाद जब विद्यालय संचालक दूसरी किस्त की मांग करते हैं तो एई डीआरडीए खुद विद्यालय में पहुंचकर जांच पड़ताल करके दूसरी किस्त जारी करते हैं। इसके बाद विभाग का अधिकारी यहां तक की सहायक अभियंता भी स्कूलों की जांच पड़ताल तक नहीं करते हैं। यह भी नहीं देखा जाता है कि संबंधित विद्यालय ने छत की ढलाई कराई या नहीं। जबकि नियम है कि विद्यालय का निर्माण होने के बाद संबंधित विद्यालयों के प्रबंधकों से उपभोग प्रमाण पत्र और कार्यपूर्ति लिया जाएगा। साथ ही विभाग का अधिकारी मौके पर जाकर स्कूल का निर्माण देखेंगे लेकिन जिले में ऐसा नहीं होता है। यही हाल कार्यदायी संस्थाओं का है। जिन कार्यदायी संस्थाओं को धन जारी किया जाता है उससे सड़क या गेट सहित अन्य कार्य कराए जाते हैं। इसकी भी जांच पड़ताल नहीं की जाती है। इस तरह से तीन वर्ष में 30 करोड़ से अधिक की धनराशि से विकास कार्य पूर्ण हुए है या नहीं। इसकी किसी भी अधिकारी को कोई चिंता नहीं है। अब मामले की जानकारी होने पर डीएम ने सख्ती दिखाई है। इसके बाद परियोजना निदेशक ने सभी कार्यदायी संस्थाओं, विद्यालयों के प्रबंधक और संबंधित ग्राम प्रधानों जिनके गांव में विधायक और सांसद निधि से विकास कार्य हुए हैं कि बैठक आगामी 16 दिसंबर से बुलाई है। इसमें कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र के साथ ही स्कूलों की फोटोग्राफी भी मांगी गई है।
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वित्तीय वर्ष 2010-11 से लेकर अब तक सांसद-विधायक निधि में करोड़ों रुपये कार्यदायी संस्थाओं को जारी किए गए हैं। एक विधायक को प्रति वर्ष करोड़ से अधिक की धनराशि विकास कार्यों के लिए जारी की जाती है। जिले में पांच विधायक हैं। जिनकी तीन वर्ष में करीब 15 करोड़ रुपये की धनराशि से विकास कार्य हुआ है। सांसद को भी करीब पांच करोड़ रुपये मिलते हैं। करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को लेकर जिलाधिकारी ने चिंता जताई है। डीएम की सख्ती के बाद डीआरडीए ने भी हाथ पैर चलाना शुरू कर दिया है। विधायकों एवं सांसदों के प्रस्ताव पर विकास कार्य कराए जाते हैं। ज्यादातर धनराशि विधायकों ने विद्यालयों के भवन निर्माण पर दी है। करीब 40 प्रतिशत की धनराशि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों के विकास पर देते हैं। इन्हें डीआरडीए से जब पहली किस्त जारी होती है तो उनके अभिलेखों की जांच की जाती है। इसके बाद जब विद्यालय संचालक दूसरी किस्त की मांग करते हैं तो एई डीआरडीए खुद विद्यालय में पहुंचकर जांच पड़ताल करके दूसरी किस्त जारी करते हैं। इसके बाद विभाग का अधिकारी यहां तक की सहायक अभियंता भी स्कूलों की जांच पड़ताल तक नहीं करते हैं। यह भी नहीं देखा जाता है कि संबंधित विद्यालय ने छत की ढलाई कराई या नहीं। जबकि नियम है कि विद्यालय का निर्माण होने के बाद संबंधित विद्यालयों के प्रबंधकों से उपभोग प्रमाण पत्र और कार्यपूर्ति लिया जाएगा। साथ ही विभाग का अधिकारी मौके पर जाकर स्कूल का निर्माण देखेंगे लेकिन जिले में ऐसा नहीं होता है। यही हाल कार्यदायी संस्थाओं का है। जिन कार्यदायी संस्थाओं को धन जारी किया जाता है उससे सड़क या गेट सहित अन्य कार्य कराए जाते हैं। इसकी भी जांच पड़ताल नहीं की जाती है। इस तरह से तीन वर्ष में 30 करोड़ से अधिक की धनराशि से विकास कार्य पूर्ण हुए है या नहीं। इसकी किसी भी अधिकारी को कोई चिंता नहीं है। अब मामले की जानकारी होने पर डीएम ने सख्ती दिखाई है। इसके बाद परियोजना निदेशक ने सभी कार्यदायी संस्थाओं, विद्यालयों के प्रबंधक और संबंधित ग्राम प्रधानों जिनके गांव में विधायक और सांसद निधि से विकास कार्य हुए हैं कि बैठक आगामी 16 दिसंबर से बुलाई है। इसमें कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र के साथ ही स्कूलों की फोटोग्राफी भी मांगी गई है।
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