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भूमि अधिग्रहण : किसानों को नोटिस देना शुरू
Updated Thu, 26 Apr 2018 11:08 PM IST
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देवकली(गाजीपुर)। फोरलेन सड़क में गांव के किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई। इसके लिए उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। पिछले दिनों कानूनगो और लेखपाल ने किसानों के साथ बैठक कर सीधे फाइल जमा करने के लिए दबाव बनाया गया लेकिन किसान पहले नोटिस देने की बात पर अड़ गए। किसानों की इस समस्या को जब 24 अप्रैल 2018 के अंक में ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो विभाग ने देवकली में किसानों को नोटिस देना शुरू कर दिया।
गाजीपुर-वाराणसी के बीच देवकली ही एक ऐसा गांव है, जहां पुल और सड़क जोर-शोर के साथ बन रहा है लेकिन अभी तक मुआवजा देना तो दूर रहा, अधिग्रहीत जमीन का नोटिस तक वितरित नहीं किया गया। इसके चलते किसान काफी परेशान थे। अब नोटिस मिलने से किसानों ने कुछ राहत की सांस ली है। मालूम हो कि वर्ष 1971 में देवकली गांव में करीब डेढ़ किमी सड़क एवं पुल बाजार से बाहर बाईपास बनाया गया लेकिन उसका मुआवजा काफी भाग दौड़ के बाद 25 वर्ष बीत जाने के बाद मनमाने ढंग से दिया गया। उस समय किस रेट से मुआवजा दिया गया और कितना मीटर जमीन अधिगृहीत की गई, इसका नेशनल हाईवे के पास कोई रिकार्ड नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ नेशनल हाईवे ने एनएचआई को अधिगृहीत जमीन से ज्यादा जमीन अधिगृहीत करने का आंकड़ा दिया है। किसानों की माने तो पिछले दो साल से भूमि अधिग्रहण का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अकेले देवकली के 40 से 50 किसान भूमि के मुआवजे तथा नोटिस के लिए भटक रहे थे। जबकि अन्य गांवों के किसानों को नोटिस जारी होने के साथ ही उनको मुआवजा तक दिया जा चुका है। इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन सभी चुप्पी साधे रहे।
गाजीपुर-वाराणसी के बीच देवकली ही एक ऐसा गांव है, जहां पुल और सड़क जोर-शोर के साथ बन रहा है लेकिन अभी तक मुआवजा देना तो दूर रहा, अधिग्रहीत जमीन का नोटिस तक वितरित नहीं किया गया। इसके चलते किसान काफी परेशान थे। अब नोटिस मिलने से किसानों ने कुछ राहत की सांस ली है। मालूम हो कि वर्ष 1971 में देवकली गांव में करीब डेढ़ किमी सड़क एवं पुल बाजार से बाहर बाईपास बनाया गया लेकिन उसका मुआवजा काफी भाग दौड़ के बाद 25 वर्ष बीत जाने के बाद मनमाने ढंग से दिया गया। उस समय किस रेट से मुआवजा दिया गया और कितना मीटर जमीन अधिगृहीत की गई, इसका नेशनल हाईवे के पास कोई रिकार्ड नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ नेशनल हाईवे ने एनएचआई को अधिगृहीत जमीन से ज्यादा जमीन अधिगृहीत करने का आंकड़ा दिया है। किसानों की माने तो पिछले दो साल से भूमि अधिग्रहण का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अकेले देवकली के 40 से 50 किसान भूमि के मुआवजे तथा नोटिस के लिए भटक रहे थे। जबकि अन्य गांवों के किसानों को नोटिस जारी होने के साथ ही उनको मुआवजा तक दिया जा चुका है। इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन सभी चुप्पी साधे रहे।
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