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Ghazipur News: पहली में 415 और दूसरी पाली में 327 ने छोड़ी परीक्षा

Sat, 04 Jul 2026 01:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 01:27 AM IST
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415 candidates skipped the exam in the first shift, and 327 in the second shift.
राजकीय सिटी इंटर कॉलेज के यूपीटीईटी की परीक्षा देकर बाहर निकलते परीक्षार्थी। संवाद
गाजीपुर। तीन दिवसीय शिक्षक पात्रता परीक्षा दूसरे दिन शुक्रवार को पहली पाली में 415 और दूसरी पाली में 327 ने परीक्षा नहीं दी। परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कुछ का कहना था कि पहली बार परीक्षा दी है समय प्रबंध सबसे बड़ी चुनौती रहा। वहीं अधिकांश परीक्षार्थियों ने बताया कि पेपर का स्तर अपेक्षाकृत आसान रहा। हालांकि गणित और अंग्रेजी खंड के कुछ प्रश्न कठिन रहे इनमें समय भी अधिक लगा।
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टीईटी की परीक्षा 2 से 4 जुलाई तक आयोजित होगी। तीन दिनों तक चलने वाली यह परीक्षा कुल पांच पालियों पहले दो दिन दो और अंतिम दिन एक पाली में कराई जा रही है। प्रत्येक दिन हर पाली में 7392 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। इनके लिए बनाए गए 18 केंद्रों पर प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन और चेकिंग के बाद ही अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया। केंद्रों की निगरानी में 6 जोनल, 18 सेक्टर तथा 18 स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। दूसरे दिन कुल पंजीकृत 7392 में 94.38 फीसदी यानी 6977 उपस्थित और 415 अनुपस्थित और दूसरी में 95.57 यानी 7065 ने परीक्षा दी जबकि 327 ने नहीं दी। परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र का स्तर सामान्य से मध्यम रहा। अंग्रेजी और गणित के सवालों ने कुछ सोचने पर मजबूर किया। कुल मिलाकर परीक्षा ठीक रही। उम्मीद है कि कामयाबी मिल जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर सभी केंद्रों पर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
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0000 अभ्यर्थी बोले 0000
पेपर काफी आसान था, जितनी तैयारी की थी उतना ही आया था। परीक्षा में अंग्रेजी का भाग कुछ कठिन था लेकिन तैयारी के अनुसार ही आया था।- अमित कुमार, बलिया
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पेपर काफी संतुलित था। जिसकी तैयारी नहीं होगी उसी के लिए पेपर कठिन होगा। अच्छा परिणाम आने की संभावना है।- शिवनारायण मऊ
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ओवरऑल प्रश्न पत्र अच्छा था। कुछ सवाल वैचारिक थे, लेकिन तैयारी ठीक होने से कोई दिक्कत नहीं हुई। हिंदी एवं सामान्य अध्ययन के सवाल पढ़े हुए पूछे गए।- सज्जाद अंसारी भरौली
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पेपर मिला जुला था, अच्छा गया है। गणित एवं कई अन्य प्रश्न समय लेने वाले थे, लेकिन आसान थे। अच्छा परिणाम आने की संभावना है।- गिरधारी लाल, नगरा
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शिक्षक बोले-परिवार और स्कूल की जिम्मेदारी के बीच परीक्षा देना कठिन
गाजीपुर। सेवारत अध्यापकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की परीक्षा देना किसी चुनौती से कम नहीं है। उनके सिर विद्यालय से लेकर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ होता है। इन सबके बीच परीक्षा के लिए अपने-आप को तैयार करना बहुत ही कठिन है। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग इस बात से नाखुश है कि वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए यह परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। कई ऐसे शिक्षक हैं, जो 20-25 वर्ष से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है।

बलिया निवासी अध्यापक जितेंद्र कुमार ने कहा कि सेवारत अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक सरकारी कार्यों जैसे एसआईआर, जनगणना आदि में काफी समय देना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए भी समय निकालना पड़ता है। उम्र के फासले और अध्ययन की आदत का छूटना उनकी राह में रोड़े अटका सकता है। बलिया के ही शैलेश कुमार कहते हैं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने से नौकरी पर संकट है। नौकरी की रक्षा के लिए परीक्षा देना उनकी मजबूरी है। इसलिए तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हुए हैं। बलिया के रहने वाले मनोज का कहना है कि पहले से वह शिक्षक हैं। अब नए मानकों के अनुसार परीक्षा पास करना अनिवार्य हो गया है। नौकरी करनी है इसलिए वह शिक्षक पात्रता परीक्षा देने आए हैं। कुछ अन्य ने कहा कि सीमित समय में विद्यालय के कार्य, सामाजिक कार्य तथा निजी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। लंबे समय से केवल पढ़ाने में व्यस्त रहने के कारण प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न पर आधारित प्रश्नों को हल करने की आदत छूट जाने से उनके सामने समस्या उत्पन्न हुई है। उम्र के ऐसे पड़ाव पर हम लोग हैं कि पढ़ाई से हम दूर हैं। अब सेवा का काफी समय बीत चुका है तो अब हमारी परीक्षा ली जा रही है।
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