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Ghazipur News: पांच वर्ष में 22.82 % फीसदी लोग गरीबी से उबरे
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पूर्वांचल के 10 जिलों में गरीबी से उबरने वाला दूसरा जिला बना गाजीपुर
- नीति आयोग ने जारी किया है राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक
- अब भी जिले में 18.22 फीसदी आबादी बहुआयामी रूप से है गरीब
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। नीति आयोग की ओर से 17 जुलाई को जारी एमपीआई (राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक) जनपद को राहत देने वाली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वांचल के दस जिलों में जौनपुर के बाद गाजीपुर ही दूसरा ऐसा जिला है, जहां गरीबी से उबरने की दर सबसे ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 तक जौनपुर में 40.78 फीसदी गरीबी थी, जो अब महज 16.13 फीसदी रह गई है। जबकि गाजीपुर में कुल आबादी के करीब 22.82 फीसदी लोग पिछले पांच साल में बहुआयामी गरीबी से मुक्त हो गए हैं। हालांकि 18.22 फीसदी आबादी बहुआयामी रूप से अभी गरीब है। जिन्हें लेकर सरकार गंभीर है। ऐसे लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने के लिए योजनाएं लागू करने के साथ उन्हें लाभान्वित करने पर जोर दे रही है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आधार पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक तैयार किया गया है। इसका आंकलन 12 बिंदुओं पर हुआ है, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन स्तर से जुड़े अन्य मानकों को ध्यान में रखा गया है।
इनमें पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, रसोई गैस, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, परिसंपत्ति और बैंक खाते शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता और उसके प्रकार के आधार पर आयोग ने बहुआयामी गरीबी का सूचकांक तैयार किया है।
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इसी सूचकांक के आधार पर नीति आयोग भविष्य की योजनाएं तैयार करेगा। नीति आयोग की इस रिपोर्ट के मुताबिक, पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसे कार्यक्रमों से स्वास्थ्य में अभावों को कम करने में मदद मिली है।
इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से भी काफी सुधार हुआ। गरीबी को कम करने में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना, सौभाग्य योजना, समग्र शिक्षा जैसी पहल काफी महत्वपूर्ण है।
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- नीति आयोग ने जारी किया है राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक
- अब भी जिले में 18.22 फीसदी आबादी बहुआयामी रूप से है गरीब
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। नीति आयोग की ओर से 17 जुलाई को जारी एमपीआई (राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक) जनपद को राहत देने वाली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वांचल के दस जिलों में जौनपुर के बाद गाजीपुर ही दूसरा ऐसा जिला है, जहां गरीबी से उबरने की दर सबसे ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 तक जौनपुर में 40.78 फीसदी गरीबी थी, जो अब महज 16.13 फीसदी रह गई है। जबकि गाजीपुर में कुल आबादी के करीब 22.82 फीसदी लोग पिछले पांच साल में बहुआयामी गरीबी से मुक्त हो गए हैं। हालांकि 18.22 फीसदी आबादी बहुआयामी रूप से अभी गरीब है। जिन्हें लेकर सरकार गंभीर है। ऐसे लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने के लिए योजनाएं लागू करने के साथ उन्हें लाभान्वित करने पर जोर दे रही है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आधार पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक तैयार किया गया है। इसका आंकलन 12 बिंदुओं पर हुआ है, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन स्तर से जुड़े अन्य मानकों को ध्यान में रखा गया है।
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इनमें पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, रसोई गैस, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, परिसंपत्ति और बैंक खाते शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता और उसके प्रकार के आधार पर आयोग ने बहुआयामी गरीबी का सूचकांक तैयार किया है।
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इसी सूचकांक के आधार पर नीति आयोग भविष्य की योजनाएं तैयार करेगा। नीति आयोग की इस रिपोर्ट के मुताबिक, पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसे कार्यक्रमों से स्वास्थ्य में अभावों को कम करने में मदद मिली है।
इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से भी काफी सुधार हुआ। गरीबी को कम करने में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना, सौभाग्य योजना, समग्र शिक्षा जैसी पहल काफी महत्वपूर्ण है।