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मनोज सिन्हा को हराया था विश्वनाथ शास्त्री ने

Tue, 19 Mar 2019 01:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2019 01:16 AM IST
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मनोज सिन्हा को हराया था विश्वनाथ शास्त्री ने
जमानिया(गाजीपुर)। क्षेत्र के असाव गांव निवासी तथा भाकपा के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व सांसद विश्वनाथ शास्त्री का रविवार की देर रात लखनऊ में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर सोमवार की देर शाम पैतृक आवास पर ला कर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। मंगलवार को स्थानीय नगर स्थित महर्षि परशुराम जमदग्नि ऋषि उर्फ बलुआ घाट पर शव का अंतिम संस्कार किया जायेगा। निधन की सूचना से जिले भर में शोक की लहर छा गई।
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सरल स्वभाव तथा वाक्पटुता के लिए जाने जाने वाले शास्त्री जी का जन्म जन्म 6 जुलाई 1945 को मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था। पहले इनका नाम विश्वनाथ यादव था। एमए की पढ़ाई वाराणसी के काशी विद्यापीठ से पूरा करने के बाद इन्होंने शास्त्री की डिग्री हासिल की। इसके बाद से उनका नाम विश्वनाथ शास्त्री पड़ गया। छात्र जीवन से ही वह कम्युनिस्ट विचारधारा को मानने लगे थे। वह आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के नेता के रूप में काम करने लगे। उनकी कार्य कुशलता को देखते हुए अखिल भारतीय नौजवान सभा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई। इनके कार्य कुशलता को देख कर उन्हें पार्टी का गाजीपुर का जिला सचिव बना दिया गया। बाद में इनकी निष्ठा को देखते हुए 1889 में कम्युनिस्ट पार्टी से गाजीपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बना दिया। जिसमें उनको सफलता नहीं मिली और वो जगदीश कुशवाहा से चुनाव हार गये। उनके लगन और समाज में पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें दुबारा 1991 में कम्युनिस्ट पार्टी का प्रत्याशी बनाया। उस समय जनता दल से पार्टी का समझौता था और उन्हें जनता दल समर्थित उम्मीदवार घोषित किया गया। उस समय उन्होंने भाजपा के मनोज सिन्हा को हरा कर पहली बार लोकसभा में कदम रखा। यह उनका पहला और अंतिम चुनाव था। उसके बाद वह कभी चुनाव नहीं लड़े। बाद में लखनऊ के गोमतीनगर में रहने लगे। इधर कुछ दिनों से उनके पुत्र आलोक उर्फ विनोद ने बताया कि उनकी तबियत खराब चल रही थी और उनका इलाज लखनऊ में ही हो रहा था कि अचानक देर रात को उनकी मृत्यु हो गयी। इस बाबत कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव अमेरिका यादव ने बताया कि शास्त्री जी विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे और वो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा पूर्व विधायक रहे। वरिष्ठ नेताओं रामसुंदर शास्त्री तथा सरजू पांडेय के विचारों से वह बहुत प्रभावित रहते थे। पार्टी में उनकी कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता। जनपद में दूसरा कोई विश्वनाथ शास्त्री नहीं पैदा हो सकता।
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