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93, 346 परिवारों के पास अब भी शौचालय नहीं
Updated Wed, 01 Aug 2018 11:04 PM IST
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गाजीपुर। जिले में अब भी 848 गांवों में रहने वाले 93, 346 परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। यह आंकड़ा सरकारी है, सच तो कुछ और ही है। उधर जिला प्रशासन अब तक कराए गए शौचालयों के निर्माण के दम पर जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित करने का दावा ठोक रहा है। जिला प्रशासन की आंकड़ेबाजी में अब तक 1613 गांव खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित किए जा चुके हैं। वर्ष 2012 के सर्वे को सच माने तो जिले में दो लाख 31 हजार 754 परिवारों के पास शौचालय नहीं था। उसके बाद से निर्मल भारत और स्वच्छ भारत अभियान में अब तक लगभग एक लाख 38 हजार 408 शौचालय ही बनाए गए हैं। जबकि शत-प्रतिशत शौचालय बनाने का लक्ष्य दो अक्टूबर 2018 कर दिया गया है। इस तिथि तक तक हर घर में शौचालय बनाया जाना अनिवार्य है।
जिले की कुल आबादी 33 लाख 46 हजार है। इसमें परिवारों की संख्या पांच लाख 79 हजार 763 है, जबकि कुल गांवों की संख्या 2661 है। इन गांवों में से अब भी 848 गांवों में शौचालय का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। स्वच्छता भारत अभियान को लेकर राज्य व केंद्र सरकार भले ही गंभीर हो, लेकिन पंचायतों के कर्मचारी और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं, बल्कि उदासीन हैं। इस वजह से शौचालय गुणवत्ता परख न बनने से अधिकतर उपयोग विहीन साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि शौचालय निर्माण का गांवों में कोरम पूरा किया जा रहा है। इन शौचालयों में ग्रामीण बनने के बाद भी इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं और खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। स्वच्छता भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण में कई तरह की खामियां सामने आई हैं। इसमें कहीं भेदभाव, तो कहीं गुणवत्ता की अनदेखी की गई है। कई परिवारों में शौचालय की नींव बना कर छोड़ दी गई है। कहीं सीट तक नहीं बैठाई गई है। इस सच को छुपाते हुए अधिकारी और कर्मचारी गांवों को ओडीएफ घोषित कर रहे हैं। ऐसे भी गांवों हैं जहां कई घरों में शौचालय ही नहीं बने हैं। लोग खुले में शौच के लिए न जाएं तो कहां जाएं ? यही सवाल ग्रामीण वहां के जनप्रतिनिधियों से पूछ रहे हैं। लोग उन्हें बहुत जल्द शौचालय बना कर देने का वादा कर रहे हैं। शिकायतों के आधार पर कुछ गांवों की जांच करने पहुंचे अफसरों के सामने भी यही सवाल आ रहा है, लेकिन जवाब नदारद है। स्वच्छता मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त यानी ओडीएफ करने के लिए शुरूआत में शासन से 31 दिसंबर 2017 तक का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब यह लक्ष्य दो अक्टूबर 2018 तक कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी हरिकेश चौरसिया ने बताया कि जिला प्रशासन स्तर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। गांवों को खुले में शौचमुक्त करने का पूरा प्रयास जारी है। अब तक 1613 गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। प्रत्येक गांव में शौचालय बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। आधे से अधिक गांव शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण कर चुके हैं।
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जिले की कुल आबादी 33 लाख 46 हजार है। इसमें परिवारों की संख्या पांच लाख 79 हजार 763 है, जबकि कुल गांवों की संख्या 2661 है। इन गांवों में से अब भी 848 गांवों में शौचालय का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। स्वच्छता भारत अभियान को लेकर राज्य व केंद्र सरकार भले ही गंभीर हो, लेकिन पंचायतों के कर्मचारी और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं, बल्कि उदासीन हैं। इस वजह से शौचालय गुणवत्ता परख न बनने से अधिकतर उपयोग विहीन साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि शौचालय निर्माण का गांवों में कोरम पूरा किया जा रहा है। इन शौचालयों में ग्रामीण बनने के बाद भी इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं और खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। स्वच्छता भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण में कई तरह की खामियां सामने आई हैं। इसमें कहीं भेदभाव, तो कहीं गुणवत्ता की अनदेखी की गई है। कई परिवारों में शौचालय की नींव बना कर छोड़ दी गई है। कहीं सीट तक नहीं बैठाई गई है। इस सच को छुपाते हुए अधिकारी और कर्मचारी गांवों को ओडीएफ घोषित कर रहे हैं। ऐसे भी गांवों हैं जहां कई घरों में शौचालय ही नहीं बने हैं। लोग खुले में शौच के लिए न जाएं तो कहां जाएं ? यही सवाल ग्रामीण वहां के जनप्रतिनिधियों से पूछ रहे हैं। लोग उन्हें बहुत जल्द शौचालय बना कर देने का वादा कर रहे हैं। शिकायतों के आधार पर कुछ गांवों की जांच करने पहुंचे अफसरों के सामने भी यही सवाल आ रहा है, लेकिन जवाब नदारद है। स्वच्छता मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त यानी ओडीएफ करने के लिए शुरूआत में शासन से 31 दिसंबर 2017 तक का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब यह लक्ष्य दो अक्टूबर 2018 तक कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी हरिकेश चौरसिया ने बताया कि जिला प्रशासन स्तर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। गांवों को खुले में शौचमुक्त करने का पूरा प्रयास जारी है। अब तक 1613 गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। प्रत्येक गांव में शौचालय बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। आधे से अधिक गांव शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण कर चुके हैं।
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