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उम्मीद टूटी, नहीं होंगे स्कूलों में खेल!

Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
Ghaziabad
Ghaziabad Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
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गाजियाबाद। खेल के मैदान में उतरने की नौनिहालों की आखिरी आस भी टूट गई। एनजीओ के सहयोग से नवंबर लास्ट में होने वाली जिला खेल प्रतियोगिताएं अब नहीं होंगी। ऐन वक्त पर एनजीओ ने अपने हाथ खींच लिए हैं।

पिछले दो वर्षों से प्राइमरी में होने वाले वार्षिक खेल प्रतियोगिता बजट के अभाव में बंद है। वहीं, गाजियाबाद मेें कक्षा-1 से आठ तक करीब 82 हजार 712 स्टूडेंट हैं। बच्चे स्कूल मैदान में पकड़म-पकड़ाई और गुल्ली डंडा तक सिमट चुके हैं। सत्र 2012 में जिले के पीटीआई शिक्षकों ने चंदे से खेल प्रतियोगिता कराने का विचार किया तो स्पांसर्स ने हाथ पीछे कर लिए। यहां तक कि खेल की तारीख और जगह भी तय हो गई। जिला पीटीआई शिक्षक प्रवीन का कहना है कि हम अपनी ओर से खेल नहीं करा सकते। पहले बच्चों से एक-एक रुपये स्पोर्ट्स फीस ली जाती थी। वहीं, साठ हजार के करीब शासन की ओर से बजट दिया जाता था। इन सबको मिलाकर खेल प्रतियोगिता हो जाया करती थी। वर्ष 2010 में आरटीई लागू होने के बाद से बच्चों से किसी भी तरह की फीस नहीं ली जा रही। न ही शासन से कोई बजट रिलीज किया जाता है। यहां तक कि शिक्षा पर करोड़ों खर्च करने वाला सर्व शिक्षा अभियान की ओर से भी खेलों के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता। प्रवीन बताते हैं कि इस बार नवंबर से पूर्व जिले के कुछ एनजीओ से स्पांसरशिप की बात की थी। सबने सहमति देकर कदम पीछे कर लिए। अभी बात चल रही है, बात बनी तो जिलास्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जा सकता है। वहीं, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रवेश यादव कहते हैं कि बजट का अलग से कोई प्रावधान नहीं है। बिना बजट प्रतियोगिताएं संभव नहीं हैं। कुछ नए प्रायोजकों से बातचीत की जा रही है। यदि सहमति बन पाती है तो दिसंबर में प्रतियोगिताएं होंगी।
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